पुलिस प्रशासन ने यातायात के खूब बनाए प्लान, लगातार बढ़ रहे वाहनों से शहर की व्यवस्था धड़ाम
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शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस और प्रशासन ने खूब प्लान बनाए। लेकिन शहर को जाम से मुक्ति नहीं मिली। इसकी वजह प्लानिंग में कमी नहीं, बल्कि वाहनों का बढ़ता दबाव है। बीते आठ सालों में मेरठ में वाहनों की संख्या दोगुनी हो गई है, लेकिन सड़क और संसाधनों पर कोई काम नहीं हुआ है। वाहनों के लोड से मेरठ की सड़कें हांफ चुकी हैं।
आरटीओ में वाहनों के रजिस्ट्रेशन की संख्या 7.10 लाख पहुंच गई है। 31 दिसंबर 2010 तक वाहनों की संख्या 3.50 लाख थी। जिले में एक लाख वाहन ऐसे हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन दूसरे जिलों और राज्यों का है। वर्तमान में मेरठ में आठ लाख से अधिक वाहन दौड़ रहे हैं।
मेरठ-दिल्ली हाईवे पर सर्वाधिक दबाव
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि मेरठ-दिल्ली हाईवे और एनएच-58 पर वाहनों का सबसे ज्यादा दबाव है। सुबह सात से लेकर रात नौ बजे तक मेरठ दिल्ली हाईवे पर करीब 1.20 लाख वाहन गुजरते हैं। छुट्टी के दिनों में यह संख्या 1.40 लाख तक पहुंच जाती है। इसके अलावा मेरठ-हापुड़ रोड, गढ़ रोड और मेरठ-पौड़ी मार्ग पर भी वाहनों का अधिक दबाव है।
प्रतिदिन निकलते हैं इतने वाहन
मेरठ-दिल्ली हाईवे एक लाख से 1.20 लाख वाहन
मेरठ-हापुड़ मार्ग 70 से 80 हजार वाहन
मेरठ-गढ़ मार्ग 50 से 55 हजार वाहन
मेरठ मवाना रोड 40 से 45 हजार वाहन
शहर में भी वाहनों का दबाव
दिल्ली रोड पर 70 से 80 हजार वाहन
जीरो माइल स्टोन 80 से 90 हजार वाहन
हापुड़ अड्डा 50 से 55 हजार वाहन
सड़क हादसों में नहीं आई कमी
वर्ष सड़क हादसे मृतक घायल
2013 882 467 848
2014 1047 384 921
2015 952 386 728
2016 977 421 758
2017 1040 417 808
2018 875 367 625
(इस वर्ष की स्थिति एक जनवरी से 15 नवंबर तक ट्रैफिक पुलिस के अनुसार है।)
पार्किंग की भी नहीं व्यवस्था
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार शहर में 4700 ई रिक्शा आरटीओ से रजिस्टर्ड हैं, जबकि सड़कों पर करीब आठ हजार दौड़ रहे हैं। वहीं दस से 12 हजार ऑटो हैं। सबसे अधिक जाम का कारण यही है। इनके लिए पार्किंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
सिर्फ दो फ्लाईओवर
एसपी ट्रैफिक के अनुसार बीते दस साल में सिर्फ दिल्ली रोड पर अतुल माहेश्वरी सेतु और रोहटा रोड पर फ्लाईओवर का निर्माण हुआ है। इन दोनों फ्लाईओवर के अलावा शहर में किसी भी सड़क का चौड़ीकरण या चौराहों पर काम नहीं हुआ। मुख्य चौराहों में जीरो माइल, बेगमपुल, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा तिराहा, हापुड़ अड्डा, एल ब्लॉक तिराहा, तेजगढ़ी चौराहा, जेलचुंगी चौराहा और कमिश्नरी आवास चौराहे पर सबसे ज्यादा जाम की समस्या रहती है।
पार्किंग की भी नहीं व्यवस्था
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार शहर में 4700 ई रिक्शा आरटीओ से रजिस्टर्ड हैं, जबकि सड़कों पर करीब आठ हजार दौड़ रहे हैं। वहीं दस से 12 हजार ऑटो हैं। सबसे अधिक जाम का कारण यही है। इनके लिए पार्किंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
सिर्फ दो फ्लाईओवर
एसपी ट्रैफिक के अनुसार बीते दस साल में सिर्फ दिल्ली रोड पर अतुल माहेश्वरी सेतु और रोहटा रोड पर फ्लाईओवर का निर्माण हुआ है। इन दोनों फ्लाईओवर के अलावा शहर में किसी भी सड़क का चौड़ीकरण या चौराहों पर काम नहीं हुआ। मुख्य चौराहों में जीरो माइल, बेगमपुल, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा तिराहा, हापुड़ अड्डा, एल ब्लॉक तिराहा, तेजगढ़ी चौराहा, जेलचुंगी चौराहा और कमिश्नरी आवास चौराहे पर सबसे ज्यादा जाम की समस्या रहती है।
शहर में यातायात की समस्या को लेकर यातायात निदेशालय को रिपोर्ट भेजी गई है। वाहनों की बढ़ती संख्या से जाम की समस्या पैदा हो रही है। ट्रैफिक पुलिस में मैनपावर बढ़ाई गई, लेकिन वाहनों की अधिकता होने से जाम की समस्या बनी रहती है। - संजीव बाजपेयी, एसपी ट्रैफिक
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