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‘धैर्य’ गया तो उजड़ गई सुरेश की दुनिया, भाई का बेटा लिया था गोद
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Thu, 28 Dec 2017 05:38 PM IST
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मासूम की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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‘धैर्य’ गया तो सुरेश और बीना की दुनिया ही उजड़ गई। अब उन्हें चारों ओर अंधेरा ही दिखाई दे रहा है। चंद घंटे पहले इनका आंगन खुशियों से भरा था। बच्चे के हंसने की आवाज से दंपति के सारे दुख दूर हो जाते थे। जब वह खेलता था तो दोनों उसके साथ बच्चे बन जाते थे, लेकिन हादसे ने दंपति को बुरी तरह तोड़ दिया है।
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सुरेश ने बताया कि बीना उसकी दूसरी पत्नी है। कई साल पहले उसने शादी की थी। लेकिन बच्चा नहीं हुआ। कई चिकित्सकों से उसका उपचार कराया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। बीना दिन रात बच्चे के लिए तड़पती थी। उसका दुख देखकर सुरेश के भाई ने अपना बेटा उन्हें गोद दे दिया। बच्चे के आने से मानो दंपति की दुनिया रोशन सी हो गई थी। बीना बेटे धैर्य को अपने बच्चे से भी ज्यादा प्यार करती थी।
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एक बार आंख खोल दे बेटा
धैर्य के शव से लिपटकर दंपति दहाड़ मारकर रो रहा था। पिता बार-बार एक ही बात कह रहा था कि बेटा एक बार आंख खोल दे, अब कैसे जीऊंगा में तेरे बिना। बेटे मैं तो तेरे लिए कार लेने जा रहा था। आज ही तू कार मांग रहा था। अब किसके साथ खिलौनों से खेलूंगा। दंपति का दुख देकर सांत्वना देने पहुंचे रिश्तेदार भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
कॉलोनी में जगह-जगह खुले हैं गटर
मोदी प्रबंधन ने अपनी कंपनी को जापान की कंपनी कोंटीनेंटल को दे दिया है। लेकिन कॉलोनी अभी भी उनके पास है। कॉलोनी में कुछ लोग रह रहे हैं। कॉलोनी के रखरखाव के लिए एक सुपरवाइजर भी छोड़ रखा है। कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि जगह-जगह गटर खुले पड़े हैं। खुले गटर से बच्चों को खतरा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। सवाल उठता है कि मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन है। भाजपा नेता संजय गुप्ता का कहना है कि मोदी प्रबंधन ने रखरखाव की जिम्मेदारी सुपरवाइजर को सौंप रखी है। इसके बावजूद भी वहां पर काम अधूरा है। कॉलोनी के अलावा मोदीपुरम क्षेत्र में कई जगह पर गटर खुले पड़े हैं, वहां भी हादसे का खतरा है।
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