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Meerut News: ठंड में लकवे का वार, मेडिकल में 8 दिन में आए 250 से ज्यादा बीमार

Fri, 09 Dec 2022 09:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2022 09:00 AM IST
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Paralysis attack in cold, 8 in medical
ठंड में लकवे का वार, मेडिकल में 8 दिनों में आए 250 से ज्यादा बीमार
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मेरठ। ठंड बढ़ने से लकवा (पक्षाघात) के मरीजों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में पिछले आठ दिनों में ही 250 से ज्यादा मरीज न्यूरोलॉजी (तंत्रिका विज्ञान) की ओपीडी में आए हैं। इनमें से 25 को भर्ती करना पड़ा है। यह बीमारी गंभीर है और जान के खतरे के साथ जीवन भर की अपंगता भी इससे हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. दीपिका सागर ने बताया कि करीब 70 प्रतिशत मरीजों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान व तंबाकू का सेवन, हृदय रोग, मानसिक तनाव, व्यायाम की कमी, महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन आदि लकवे का कारण होते हैं, जबकि 30 फीसदी में लकवे का कोई निश्चित कारण नहीं होता है। उन्होंने बताया कि सर्दी में रक्त का संचार सही से नहीं हो पाता है। इससे दिमाग की नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त के संचार में बाधा बनने के कारण लकवे का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना ओपीडी और इमरजेंसी में 30 से 35 मरीज आ रहे हैं। इन दोनों लोगों को ठंड से बचाव करना चाहिए। इसके अलावा रक्तचाप और शुगर को नियंत्रण में रखना चाहिए।
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वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा ने बताया कि हृदय रोग की तरह लकवे के इलाज में भी समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर मरीज की रक्त नलिका में थक्का जमने के कारण लकवा हुआ और उसे तीन से चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो रोगी को थक्का घोलने वाली दवा दी जाती है, जिससे मरीज ठीक हो सकता है। ज्यादातर मरीजों में लकवे का बढ़ना रुक जाता है।
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30 फीसदी रोगियों को एक माह पहले मिल जाते हैं संकेत
करीब 30 फीसदी रोगियों को अगले कुछ महीने में लकवे की आशंका का संकेत मिल जाता है। चिकित्सकों के मुताबिक, अगर आधे अंग में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो रहा है, थोड़ी देर के लिए नजर की रोशनी कम हो जाना, कुछ वक्त के लिए समझने में तकलीफ होना, चक्कर, सिरदर्द, धुंधला दिखना, उल्टी आना आदि लकवे के संकेत हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
-संतुलित आहार लें, ठंड से बचें।
-रोज 40-45 मिनट पैदल चलें।
-नियमित व्यायाम करें।
-तंबाकू, धूम्रपान न करें।
-मानसिक तनाव कम लें।
-बीपी, डायबिटीज हो तो नियंत्रण में रखें।
-पानी ज्यादा पिएं।
-समय-समय पर चेकअप कराते रहें।
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