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पंचायत चुनाव: आरक्षण की घोषणा का इंतजार
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पंचायत चुनाव: आरक्षण की घोषणा का इंतजार
माछरा। पंचायत चुनाव का शंखनाद बजते ही गांवों में ग्राम पंचायतों के चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। प्रधान पद के संभावित प्रत्याशियों ने गुपचुप ढंग से दावतों का दौर भी शुरू कर दिया है। परंतु आरक्षण अभी तक घोषित न होने के कारण कुछ संभावित प्रत्याशियों के चेहरे लटके हुए हैं।
क्षेत्र के गांवों में चौपाल, चाय की दुकान आदि पर बैठक कर लोगों में ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य तथा जिला पंचायत चुनाव की चर्चा होनी शुरू हो गई है। जिला पंचायत के संभावित प्रत्याशियों में वार्डों निर्धारण में उनके प्रभावशाली गांव कटने के कारण मायूसी है। वहीं, उन्होंने अपने समर्थकों के साथ गांवों में पहुंचकर प्रचार-प्रसार शुरू दिया है। जातिवाद एवं राजनैतिक पार्टियों की दुहाई दी जा रही है।
उधर, ग्राम प्रधान के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों ने धन खर्च करना शुरू कर दिया है। चुनाव प्रचार केे पोस्टर आदि छपवाकर दीवारों पर चस्पा भी कर दिए हैं। वर्तमान प्रधान चुनाव मैदान में दोबारा से उतरने के लिए ताल ठोक रहे हैं और उनको चुनौती देने के लिए अन्य प्रत्याशी रणनीति बना रहे हैं। पद पर रहते हुए अकड़ में रहने वाले ग्राम प्रधानों के तेवर अब ठंडे पड़ गए हैं। अब वह जनता के साथ नरमी से पेश आ रहे हैं।
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जिला पंचायत सदस्य एवं ग्राम प्रधान पद के संभावित प्रत्याशी चुनाव प्रचार करने के साथ ही आरक्षण को लेकर परेशान हो जाते हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनकी सीट या गांव आरक्षित न हो जाए। सभी आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो आरक्षण घोषित होने के बाद ही अपनी दावेदारी जताएंगे।
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माछरा। पंचायत चुनाव का शंखनाद बजते ही गांवों में ग्राम पंचायतों के चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। प्रधान पद के संभावित प्रत्याशियों ने गुपचुप ढंग से दावतों का दौर भी शुरू कर दिया है। परंतु आरक्षण अभी तक घोषित न होने के कारण कुछ संभावित प्रत्याशियों के चेहरे लटके हुए हैं।
क्षेत्र के गांवों में चौपाल, चाय की दुकान आदि पर बैठक कर लोगों में ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य तथा जिला पंचायत चुनाव की चर्चा होनी शुरू हो गई है। जिला पंचायत के संभावित प्रत्याशियों में वार्डों निर्धारण में उनके प्रभावशाली गांव कटने के कारण मायूसी है। वहीं, उन्होंने अपने समर्थकों के साथ गांवों में पहुंचकर प्रचार-प्रसार शुरू दिया है। जातिवाद एवं राजनैतिक पार्टियों की दुहाई दी जा रही है।
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उधर, ग्राम प्रधान के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों ने धन खर्च करना शुरू कर दिया है। चुनाव प्रचार केे पोस्टर आदि छपवाकर दीवारों पर चस्पा भी कर दिए हैं। वर्तमान प्रधान चुनाव मैदान में दोबारा से उतरने के लिए ताल ठोक रहे हैं और उनको चुनौती देने के लिए अन्य प्रत्याशी रणनीति बना रहे हैं। पद पर रहते हुए अकड़ में रहने वाले ग्राम प्रधानों के तेवर अब ठंडे पड़ गए हैं। अब वह जनता के साथ नरमी से पेश आ रहे हैं।
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जिला पंचायत सदस्य एवं ग्राम प्रधान पद के संभावित प्रत्याशी चुनाव प्रचार करने के साथ ही आरक्षण को लेकर परेशान हो जाते हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनकी सीट या गांव आरक्षित न हो जाए। सभी आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो आरक्षण घोषित होने के बाद ही अपनी दावेदारी जताएंगे।