क्लिक के काले कारोबार का क्रिमिनल कनेक्शन, हुए चौंकाने वाले खुलासे
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अनुराग गर्ग की कंपनी वेबवर्क ट्रेड लिंक लिमिटेड और दूसरी कंपनी की हो रही जांच पड़ताल चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। जांच एजेंसियों की मानें तो ऑनलाइन ट्रेडिंग से जुड़े कुछ लोगों का क्रिमिनल कनेक्शन भी सामने आ रहा है। जांच में मुजफ्फरनगर के पुरकाजी ब्लॉक से जुड़े दंपति का कनेक्शन पकड़ में आया है। जिसमें राजनीति में सक्रिय बताई गई पत्नी को 12 दिसंबर 2016 को कंपनी में बतौर बोर्ड डायरेक्टर शामिल किया गया। जबकि उसके कुख्यात पति को भी हर माह उतना ही हिस्सा दिया गया। साथ ही कुछ और अपराधियों का पैसा कंपनी में लगे होने के साक्ष्य एजेंसियों को मिले हैं।
जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि 18 अक्तूबर 2016 को ऐडबुक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना हुई। उस वक्त अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा को कंपनी का डायरेक्टर दिखाया गया था। लेकिन उसके दो महीने बाद 12 दिसंबर को पुरकाजी से जुड़ी एक महिला को कंपनी में बोर्ड डायरेक्टर बना दिया गया। इसके बाद हर माह बतौर निदेशक, इस महिला के पर्सनल एकाउंट में दो लाख रुपये प्रतिमाह सैलरी दी जाने लगी। साथ ही पति के खाते में भी करीब इतनी ही रकम हर माह कंपनी की तरफ से भेजी गई। सूत्रों ने इस महिला के पति का आपराधिक रिकॉर्ड बताया। कंपनी का आपराधिक कनेक्शन सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग में दूसरे अपराधियों द्वारा पैसा लगाने के भी साक्ष्य मिले हैं। ऐसे में मामला कहीं ज्यादा पेचीदा होता जा रहा है।
क्रिमिनल कनेक्शन के बीच धमकी
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार कुछ दिनों पहले ही अनुराग गर्ग की एक ऑडियो क्लिप सामने आई है। जिसमें वह मेरठ शहर के एक रत्न विक्रेता को जान से मारने की धमकी दे रहा है। इस ऑडियो टेप में अनुराग कहता सुनाई पड़ रहा है कि तुम मुझे नहीं जानते हो कि मैं क्या चीज हूं। ऐसे में अब कंपनी का क्रिमिनल कनेक्शन भी साफ होता दिख रहा है, जिसके जरिये पैसा लगाने वालों को धमकी तक दी जा रही थी।
एक लाख की कंपनी पांच करोड़ प्रचार पर खर्च
ऐडबुक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड का पंजीकरण कानपुर से कराया गया। उस वक्त कंपनी की मार्केट वेल्यू सिर्फ एक लाख रुपये दिखाई गई। जबकि कंपनी ने करीब पांच करोड़ रुपये अकेले मार्केटिंग पर खर्च किए। इसमें से एक करोड़ रुपये नवाजुद्दीन सिद्दीकी को दिए गए। वहीं, कंपनी में रखे गए लोगों को हाई सैलरी दी गई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक लाख रुपये की वेल्यू पर पंजीकृत होने वाली कंपनी ने इतनी मोटी रकम कहां खर्च की।
कैसे हो गई कंपनी 260 करोड़ की
शिकायतकर्ता अमित किशोर जैन का दावा है कि अनुराग की दोनों कंपनियों ने 500 करोड़ से ऊपर का घोटाला किया। लेकिन अब नोएडा पुलिस अनुराग के बयान को ही सही मानकर सारा घोटाला 260 करोड़ रुपये का मान रही है। जबकि बड़ी रकम ऐडबुक मार्केटिंग के नाम पर ठिकाने लगाई गई।
फाइल लीक, घेरे में जांच अधिकारी
अनुराग गर्ग की कंपनी की जांच से जुड़े अहम कागजात लीक हो गए है। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ है, जब जांच में शामिल आरोपियों की सूची गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ के कुछ लोगों के पास पहुंच गई है। ये ऐसे लोग बताए गए, जिन्हें जांच एजेंसियां कंपनी का हिडन पार्टनर मान रही हैं। लिस्ट में 55 लोगों से अधिक के नाम हैं, जिनमें मेरठ के ही करीब 20 लोग हैं। इनमें से बेगमपुल (मेरठ) से जुड़े एक सोना कारोबारी के साथ ही दो लोग शास्त्रीनगर (मेरठ) के हैं। यह वही लिस्ट है, जिसे जांच एजेंसियों ने कंपनी की फाइल खंगालने और शिकायतकर्ता की निशानदेही पर तैयार किया था। इन लोगों से जल्द ही पूछताछ की जानी है। हालांकि इसके अतिरिक्त 500 लोगों की अगली सूची भी तैयार की गई है। जिसमें मेरठ के करीब 150 लोगों को रखा गया। ऐसे में पहली सूची लीक होने पर जांच अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
गेम होने का अंदेशा
सूत्रों का कहना है कि इस सूची के आधार पर पुलिस गेम करने में लगी है। इसलिए बाकी एजेंसियों की तरफ से बनाई सूची लीक गई है, ताकि सूची में शामिल लोगों को साधा जा सके।
शिकायतकर्ता ने मांगी सुरक्षा
लिस्ट लीक होने के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी जान का खतरा जताया है। अमित किशोर जैन का कहना है कि जब पुलिस ही जांच के गोपनीय दस्तावेज लीक कर रही है, तो ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने डीआईजी रेंज मेरठ को पत्र लिखकर इसकी जांच एसआईटी (विशेष जांच दल) को सौंपने की मांग की है। साथ ही सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई है।