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जो माता-पिता से प्रेम नहीं कर सकता, वह परमात्मा को नहीं समझ सकता : शिवम शास्त्री
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सरधना। मोहल्ला छावनी में भागवत कथा सुनाते वाचक पंडित शिवम शास्त्री।
सरधना। विश्व भारती पब्लिक स्कूल छावनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक शिवम शास्त्री ने श्रद्धालुओं को गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान से परिचित कराते हुए कहा कि परम तत्व की प्राप्ति केवल साधनों से नहीं, बल्कि गहन साधना से संभव है। उन्होंने कहा कि साधना कोई बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रेम, श्रद्धा और विश्वास से ओतप्रोत आत्मिक यात्रा है। भागवत कथा में शिवम शास्त्री ने कहा कि साधना का मूल भाव है प्रेम। प्रेम के बिना कृपा नहीं मिलती, कृपा के बिना परम तत्व नहीं मिलता। यह प्रेम आता है निर्मल मन से, जो हरि कथा, सत्संग और भक्तों के चरित्रों के श्रवण से निर्मल होता है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि मनुष्य में मानवीय गुण नहीं हैं तो वह केवल शरीर से मनुष्य कहलाने योग्य है, भीतर से नहीं। माता-पिता के चरणों में प्रेम और श्रद्धा ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं। कथा के दौरान विदुर और श्रीकृष्ण के भावमय मिलन, कपिल संवाद, ध्रुव तपस्या, प्रह्लाद की भक्ति, तथा गजेंद्र मोक्ष जैसे प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया गया, जिसे सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे।
इस दौरान अनिता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, पायल, ज्योति, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित, जयपाल, विनोद, कमलेश, जयकरण, सुशील, सनी, सतीश, शिवम, राजा, हर्ष, राजेश, राजू, नंदकिशोर, बृजेन्द्र, बिनोद, सुबोध, अंकित, रवि, राजकुमार, जितेन्द्र, गोवर्धन मौजूद रहे।
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उन्होंने आगे कहा कि यदि मनुष्य में मानवीय गुण नहीं हैं तो वह केवल शरीर से मनुष्य कहलाने योग्य है, भीतर से नहीं। माता-पिता के चरणों में प्रेम और श्रद्धा ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं। कथा के दौरान विदुर और श्रीकृष्ण के भावमय मिलन, कपिल संवाद, ध्रुव तपस्या, प्रह्लाद की भक्ति, तथा गजेंद्र मोक्ष जैसे प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया गया, जिसे सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे।
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इस दौरान अनिता शर्मा, श्रद्धा, राजबाला, पायल, ज्योति, रिचा, राखी, बृजेश, सियानंद, राज नारायण, नरेंद्र पंडित, जयपाल, विनोद, कमलेश, जयकरण, सुशील, सनी, सतीश, शिवम, राजा, हर्ष, राजेश, राजू, नंदकिशोर, बृजेन्द्र, बिनोद, सुबोध, अंकित, रवि, राजकुमार, जितेन्द्र, गोवर्धन मौजूद रहे।
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