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NRHM में खुलासे पर खुलासे: सीएमओ दफ्तर से लेकर दूर-दूर तक कनेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sat, 18 Mar 2017 06:37 PM IST
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में हर स्तर पर धांधली हुई। ज्यादा से ज्यादा कमीशन पाने के लिए हर जतन किए गए। अब ‘अमर उजाला’ के हाथ जो नए रिकॉर्ड लगे हैं, उससे सामने आया है कि सीएमओ दफ्तर से लेकर मवाना, दौराला और सरधना सीएचसी के ऑपरेशन थियेटर के लिए मनमाने तरीके से एयर कंडीशनर (एसी) खरीदे गए। यहां तक कि एसी टेंडर से न खरीदकर टुकड़ों में खरीदे गए, ताकि ज्यादा कमीशन मिल सके। इलेक्ट्रिकल सामान खरीदने से पहले क्रय समिति में कोई तकनीकी सदस्य नहीं रखा गया।
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रिकॉर्ड के अनुसार 24 फरवरी 2009 को मै. शुग्गु ट्रेडर्स को एसी खरीदने के लिए ऑर्डर दिया गया। आर्डर में जिला क्रय एवं टेंडर समिति के सात लोगों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें अध्यक्ष के अलावा छह सदस्य शामिल हैं। आर्डर की भाषा को पढ़कर ही सारा खेल समझ में आ जाएगा। जिसमें पहली ही लाइन में लिखा गया है कि कृपया आप अपनी कुटेशन दिनांक शून्य का अवलोकन ग्रहण करें। यानी बिना डेट का कोटेशन लिया गया, जिस पर एसी खरीद का ऑर्डर क्रय सीमित ने जारी कर दिया। ताकि आगे उसमें खेल किया जा सके। यहां पर कोटेशन तिथि शून्य दर्शाय जाने से साफ हो जाता है कि बाद में वह डेट डाली जा सके, जिस वक्त एसी के रेट बढ़े हों।
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यह कहता है सरकारी नियम
सरकारी नियम कहता है कि कोई भी दस्तावेज दिनांक और क्रमांक संख्या के बिना स्वीकार नहीं होगा। खासकर खरीद या कानूनी प्रक्रिया से जुड़े किसी भी दस्तावेज पर तिथि डालना अनिवार्य होता है। यह भी नियम है कि कोई भी ऑटोमोबाइल या इलेक्ट्रिकल सामान खरीदा जाता है तो क्रय समिति में आईटीआई से एक्सपर्ट सदस्य को लिया जाना चाहिए। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं किया गया।
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टेंडर से बचने के लिए टुकड़ों में खरीद
सरकारी नियम है कि एक लाख रुपये से अधिक की खरीद होने पर टेंडर जारी करना होगा। लेकिन उससे नीचे की खरीद कोटेशन के आधार पर की जा सकती है। साथ ही स्पष्ट है कि जब कोई एक ही सामान बड़ी मात्रा या संख्या में खरीदा जाना है तो उसे टुकड़ों में नहीं खरीदा जाये। लेकिन यहां पर सारे नियमों को तोड़ा गया। रिकॉर्ड बता रहा है कि फरवरी से लेकर मार्च 2009 के बीच तीन सीएचसी, सीएमओ और एसीएमओ आरसीएच के दफ्तर के लिए एसी की खरीद गई। जिनकी कीमत करीब 5 लाख से ऊपर बैठती है, जिनके लिए टेंडर जारी होने था। लेकिन खरीद टुकड़ों में की गई ताकि बिल एक लाख से नीचे का ही रहे।
कहां गए ये एसी
साल 2009 में खरीदे गए एसी अब कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। अगर वर्तमान में जांच होगी तो घोटाले का पूरा सच सामने आ जाएगा। टेंडर प्रक्रिया से लेकर बाद में खरीदे गए एसी को ठिकाने लगाने में स्वास्थ्य विभाग के कुछ लोगों का खासा हाथ रहा है। सूत्र कहते हैं कि एसी खरीदे गए। लेकिन कुछ दिनों के बाद चुनिंदा लोगों के आवास पर चले गए।