ईद पर खुले में नहीं... बकरों की कुर्बानी, पुलिस ने किए ये कड़े इंतजाम
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मेरठ में बकरीद पर खुले में पशुओं की कुर्बानी पर रोक रहेगी। साथ ही कुर्बानी के लिए ऊंट भी शहर और देहात में नहीं घुमाए जाएंगे। इस संबंध में शासन ने सभी जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को निर्देश जारी किए हैं। एसपी सिटी ने बताया कि दो सितंबर को बकरीद है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि कहीं भी सार्वजनिक स्थान या खुले में पशु की कुर्बानी नहीं दें। यदि ऐसा हुआ तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी। कुर्बानी से पहले एक मोहल्ले से दूसरे तक ऊंट घुमाए जाने पर पाबंदी लगा दी है। एसपी सिटी का कहना है कि मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।
ये रहेगी शहर की सुरक्षा व्यवस्था
शहर को चार जोन और दस जोन में बांटकर मजिस्ट्रेट के साथ सीओ और थाना प्रभारी तैनात रहेंगे। शहर को आरएएफ और पीएसी के हवाले कर दिया जाएगा। डीएम समीर वर्मा और एसएसपी ने शाम को ईदगाह पहुंचकर सुरक्षा का जायजा लिया। नगर आयुक्त को सफाई और पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। एसएसपी ने एसपी सिटी और सीओ को ईदगाह और नमाज के मुख्य स्थानों पर सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए। रात में एसपी सिटी मानसिंह चौहान ने सभी सीओ और थाना प्रभारियों की बैठक की। एसपी सिटी ने बताया कि ईद पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक कंपनी आईटीबीपी, एक कंपनी आरएएफ, दो कंपनी पीएसी/ आरआरएफ रहेगी। संवेदनशील स्थानों पर पैरामिलेट्री और पीएसी रहेगी। डॉग स्क्वाएड, बम निरोधक दस्ता, फायर ब्रिगेड तैनात रहेगा।
करीब सात हज़ार साल पहले शुरू हुई थी कुर्बानी की रिवायत
ईदुल-अज़हा त्योहार मुस्लिम वर्ग में खासे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस मुकद्दस त्योहार पर अल्लाह की राह में बकरों समेत कई जानवरों की कुर्बानी इस्लाम काअहम हिस्सा माना गया। कई हजार साल से यह रिवायत मुस्लिमों में चली आ रही है। अगर कुर्बानी के लिए अल्लाह जानवर को आगे नहीं करता तो आज ईदुल-अज़हा पर बेटों की कुर्बानी दी जाती।
शहरकाज़ी जैनुस साजिद्दीन ने बताया कि करीब सात हज़ार साल पहले पैगंबर हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के समय का किस्सा है। इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह के प्यारे और बहुत खास नुमाइंदे थे। करीब 85 साल की उम्र बीत जाने के बाद भी उन्हें औलाद नहीं हुई। उन्होेंने अल्लाह से दुआ में औलाद मांगी। 87 साल की उम्र में अल्लाह ने उनकी बीवी हाजरा को बेटा अता किया। जिसका नाम इस्माईल अलैहिस्सलाम रखा गया। उम्र के इस पड़ाव पर आकर औलाद की खुशी में बीवी हाजरा और इब्राहिम अलैहिस्सलाम का खुशी का ठिकाना न था। दोनों इस्माईल का बड़े चाव से पालन-पोषण में लगे थे। अल्लाह ने देखा कि इब्राहिम औलाद मिलने के बाद लगता है मुझे भूल गया है।
उनके पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम करीब 16वें साल में थे। तो पैगंबर इब्राहिम गहरी नींद में सो रहे थे। उन्हें लगा कोई कान में अल्लाह की राह में बेटे इस्माईल की कुर्बानी के लिए कह रहा है। दूसरे दिन भी उनके ख्वाब में आया कि वो अल्लाह की राह में बेटे को कुर्बान कर रहे हैं।
शैतान को भगा दिया
इब्राहिम समझ गए कि अल्लाह उनके बेटे की कुर्बानी चाहते हैं। अगले ही दिन बीवी हाजरा से बिना इजाज़त लिये इब्राहिम बेटे इस्माईल को लेकर दूर पहाड़ियों मेें जाने लगे। रास्ते में शैतान इंसान के रूप में आकर पूछने लगे कि इब्राहिम ये क्या करने जा रहा है। पागल हो गया है तू अपने जवान बच्चे की कुर्बानी देने जा रहा है। इब्राहिम समझ गये कि ये शैतान हैं। उन्होंने कंकड़ मारकर शैतान को भगा दिया। (हज के अरकान के दौरान आज भी शैतान को कंकड़ मारने की रस्म है) हजरत इब्राहिम के बाद शैतान उनकी बीवी हाजरा के पास शिकायत लेकर पहुंचे। इब्राहिम आज तुम्हारे लाड़ले बेटे इस्माईल को अल्लाह के रास्ते में जिबह करने जा रहे हैं। अल्लाह का ज़िक्र आने पर बीवी हाजरा ने भी कहा कि इब्राहिम ऐसा कर रहे हैं तो अल्लाह का ही हुक्म होगा। हजरत बेटे इब्राहिम को लेकर पहाड़ियों के बीच पहुंचे।
अल्लाह ने पेश किया दुंबा
उन्होंने बेटे से पूछा कि मैं तुम्हें अल्लाह की राह में कुर्बान करने जा रहा हूं। इस पर इस्माईल ने कहा कि अब्बू जब मेरी गर्दन पर छूरी रखो तो मुंह दूसरी ओर कर लेना। ऐसा न हो आपको मुझ पर रहम आ जाए। इसके बाद हजरत ने कलेजे के टुकड़े इस्माईल की गर्दन पर छुरी चला दी। छुरी ने काम नहीं किया। वे छुरी को गर्दन पर फेर रहे थे। हजरत इब्राहिम ने छुरी की धार पत्थर पर तेज़ की। इसके बाद भी छुरी नहीं चली। तभी अल्लाह ने इब्राहिम के सामने दुंबा पेश कर दिया। अल्लाह ने फरमाया कि औलाद पाकर तू मुझे भूल गया होगा। मैं तो बस तुझे आज़मा रहा था। मेरे लिए तू सबसे प्यारी चीज कुर्बान कर सकता है या नहीं। अल्लाह यदि सही समय पर जानवर नहीं भेजता तो आज बेटों की कुर्बानी दी जाती। तभी से ईदुल-अज़हा का त्योहार मनाया जाने लगा। इस त्योहार पर दुंबा, बकरा, भेड़, भैंसा आदि की कुर्बानी दी जाने लगी।
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