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निकाय चुनावी मोड़ में आई जनता
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 May 2017 02:36 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर निगम चुनाव का बिगुल फुंक चुका है। शहर की जनता भी निकाय चुनावी मोड़ में आ गई है। चुनावी मैदान में कूदने वालों ने दाव पेंच भिड़ाने शुरू कर दिए हैं वहीं जनता भी अपने अपने प्रत्याशी का चयन कर रही है। सभी वार्डों के प्रमुख स्थानों पर चुनाव की चर्चाएं हो रही हैं। जिसका दबाव नगर निगम पर भी दिख रहा है। संभावित प्रत्याशियों ने जनता के मुद्दे भी उठाने शुरू कर दिए हैं।
एक-दो दिन में जारी होगा गजट
नगर निगम चुनाव के लिए किए गए परिसीमन और जनगणना के आधार पर आरक्षण का निर्धारण हो चुका है। वह अलग है कि शासन ने आरक्षण सूची को स्वीकृत करने के बाद भी गजट जारी नहीं किया है। चुनाव में पार्षद प्रत्याशी के रूप में आने वाले लोगों ने तो जुगाड़ से अपने वार्डों के आरक्षण की जानकारी की भी लगभग ले ली है। माना जा रहा है कि शासन एक-दो दिन में वार्ड आरक्षण गजट जारी करेगा।
निगम के 90 वार्ड इस प्रकार हुआ आरक्षण
नए परिसीमन के आधार पर नगर निगम 90 वार्डों में परिवर्तित हो गया है। अब से पहले निगम के 80 वार्ड होते थे। जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन ने आरक्षण नीति के तहत नगर निगम के सभी वार्डों का आरक्षण फाइनल कर दिया है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। निगम के 90 वार्डों में किए गए आरक्षण पर गौर करें तो 90 वार्डों में से 24 वार्ड ओबीसी कोटे में चले गए हैं। 15 वार्ड एससी जातियों के लिए आरक्षित हैं। सामान्य जाति के लिए 51 वार्ड रखे गए हैं। इन वार्डों में सामान्य, ओबीसी और अनुसूचित जातियों के लोग भी चुनाव लड़ सकेंगे।
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महापौर सीट के आरक्षण पर अभी मोहर नहीं
शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर की सीट के आरक्षण पर शासन अभी मोहर नहीं लगा पाया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मेरठ नगर निगम की सीट आरक्षण के चक्रानुक्रम में सामान्य या फिर एससी के खाते में जाएगी। कुछ लोगों का मानना है कि मेरठ महापौर की सीट ओबीसी महिला के लिए भी आरक्षित होने की पूरी संभावना है। महापौर की कुर्सी पर सामान्य या एससी जाति का कब्जा होगा या फिर फिर पिछड़ी जाति का। यह तो आरक्षण तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन फिलहाल महापौर की सीट को लेकर भी गुणा भाग चल रहा है।
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एक-दो दिन में जारी होगा गजट
नगर निगम चुनाव के लिए किए गए परिसीमन और जनगणना के आधार पर आरक्षण का निर्धारण हो चुका है। वह अलग है कि शासन ने आरक्षण सूची को स्वीकृत करने के बाद भी गजट जारी नहीं किया है। चुनाव में पार्षद प्रत्याशी के रूप में आने वाले लोगों ने तो जुगाड़ से अपने वार्डों के आरक्षण की जानकारी की भी लगभग ले ली है। माना जा रहा है कि शासन एक-दो दिन में वार्ड आरक्षण गजट जारी करेगा।
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निगम के 90 वार्ड इस प्रकार हुआ आरक्षण
नए परिसीमन के आधार पर नगर निगम 90 वार्डों में परिवर्तित हो गया है। अब से पहले निगम के 80 वार्ड होते थे। जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन ने आरक्षण नीति के तहत नगर निगम के सभी वार्डों का आरक्षण फाइनल कर दिया है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। निगम के 90 वार्डों में किए गए आरक्षण पर गौर करें तो 90 वार्डों में से 24 वार्ड ओबीसी कोटे में चले गए हैं। 15 वार्ड एससी जातियों के लिए आरक्षित हैं। सामान्य जाति के लिए 51 वार्ड रखे गए हैं। इन वार्डों में सामान्य, ओबीसी और अनुसूचित जातियों के लोग भी चुनाव लड़ सकेंगे।
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महापौर सीट के आरक्षण पर अभी मोहर नहीं
शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर की सीट के आरक्षण पर शासन अभी मोहर नहीं लगा पाया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मेरठ नगर निगम की सीट आरक्षण के चक्रानुक्रम में सामान्य या फिर एससी के खाते में जाएगी। कुछ लोगों का मानना है कि मेरठ महापौर की सीट ओबीसी महिला के लिए भी आरक्षित होने की पूरी संभावना है। महापौर की कुर्सी पर सामान्य या एससी जाति का कब्जा होगा या फिर फिर पिछड़ी जाति का। यह तो आरक्षण तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन फिलहाल महापौर की सीट को लेकर भी गुणा भाग चल रहा है।