{"_id":"5b0c4b6f4f1c1bae6e8b5107","slug":"nigam-ne-abhi-shuru-nahi-ki-aabu-naale-ki-safaai","type":"story","status":"publish","title_hn":"निगम ने अभी शुरू नहीं की आबू नाले की सफाई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम ने अभी शुरू नहीं की आबू नाले की सफाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 May 2018 12:03 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आबू नाला शहर का सबसे बड़ा नाला है, लेकिन इसकी अभी तक सफाई शुरू नहीं हुई है। जबकि अगले माह मानसून भी आने वाला है। यह नाला सिल्ट से भरा पड़ा है। कुछ स्थानों पर तो सिल्ट पर हरियाली उगने लगी है। वहीं नगर निगम का दावा है कि शहर के सभी नालों की सफाई की जा रही है।
आबू नाला लाला मोहम्मदपुर से निकलता है, जो बेगमपुल, कचहरी- फूलबाग कालोनी, शास्त्रीनगर होते हुए काली नदी तक पहुंचता है। शहर के एक बड़े हिस्से का पानी इस नाले में बहता है। इस नाले की लगभग दो किलोमीटर की सफाई छावनी परिषद् कराता है और करीब पांच किलो मीटर के नाले की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। कैंट बोर्ड का दावा है कि उसने अपने क्षेत्र में आबू नाले की सफाई शुरू करा दी है, लेकिन नगर निगम ने अभी तक आबू नाले की तरफ रुख नहीं किया है।
सोमवार को अमर उजाला ने बेगमपुल से कचहरी और फूलबाग कॉलोनी तक आबू नाले का जायजा लिया। नाले में अधिकतर पुलों के पास नाले में जमा सिल्ट पर पेड़ पौधे खड़े मिले। जिससे देखकर लगता है कि सात आठ माह से इस नाले से सिल्ट निकाली ही नहीं गई है। ऐसा ही हाल सुभाष नगर से पुरानी मोहनपुरी, फूल बाग कालोनी से होकर गुजरने वाले नाले का है। हालांकि इस नाले की पटरी पर पूरी तरह अतिक्रमण कर लिया गया है। जिसके कारण नाले की सफाई मशीन से किया जाना संभव ही नहीं है।
विज्ञापन
खानापूर्ति करने के बाद थमी कैंट बोर्ड की भी मशीन
आबूनाले की सफाई को लेकर कैंट बोर्ड की टीम भी सुस्त पड़ गई है। एक-दो दिन जेसीबी लगाए जाने के बाद अब नाला सफाई का काम बेहद धीमा चल रहा है। जबकि सीईओ प्रसाद चव्हाण ने तेजी से आबूनाले की सफाई करने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
आबू नाला लाला मोहम्मदपुर से निकलता है, जो बेगमपुल, कचहरी- फूलबाग कालोनी, शास्त्रीनगर होते हुए काली नदी तक पहुंचता है। शहर के एक बड़े हिस्से का पानी इस नाले में बहता है। इस नाले की लगभग दो किलोमीटर की सफाई छावनी परिषद् कराता है और करीब पांच किलो मीटर के नाले की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। कैंट बोर्ड का दावा है कि उसने अपने क्षेत्र में आबू नाले की सफाई शुरू करा दी है, लेकिन नगर निगम ने अभी तक आबू नाले की तरफ रुख नहीं किया है।
विज्ञापन
सोमवार को अमर उजाला ने बेगमपुल से कचहरी और फूलबाग कॉलोनी तक आबू नाले का जायजा लिया। नाले में अधिकतर पुलों के पास नाले में जमा सिल्ट पर पेड़ पौधे खड़े मिले। जिससे देखकर लगता है कि सात आठ माह से इस नाले से सिल्ट निकाली ही नहीं गई है। ऐसा ही हाल सुभाष नगर से पुरानी मोहनपुरी, फूल बाग कालोनी से होकर गुजरने वाले नाले का है। हालांकि इस नाले की पटरी पर पूरी तरह अतिक्रमण कर लिया गया है। जिसके कारण नाले की सफाई मशीन से किया जाना संभव ही नहीं है।
विज्ञापन
खानापूर्ति करने के बाद थमी कैंट बोर्ड की भी मशीन
आबूनाले की सफाई को लेकर कैंट बोर्ड की टीम भी सुस्त पड़ गई है। एक-दो दिन जेसीबी लगाए जाने के बाद अब नाला सफाई का काम बेहद धीमा चल रहा है। जबकि सीईओ प्रसाद चव्हाण ने तेजी से आबूनाले की सफाई करने के निर्देश दिए थे।