दर्दनाक हादसा: नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से बाप-बेटे की मौत, परिजनों में मचा कोहराम
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मुजफ्फरनगर के गांव न्यामू में हिंडन नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। ट्राली के नीचे दबकर बाप और बेटे की मौत हो गई, जबकि एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। बाप-बेटे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। गांव में भी शोक व्याप्त है। पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। उधर, पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से जेसीबी लगवाकर नदी से ट्रैक्टर ट्रॉली को बाहर निकलवाया।
चरथावल थाना क्षेत्र के गांव न्यामू निवासी लीलू कश्यप (52) रविवार की सुबह अपने घेर में मिट्टी भराव का कार्य कर रहे थे। सुबह जल्दी ही वह दो चक्कर घेर में मिट्टी डाल चुके थे। इसके बाद वह दो पुत्रों को साथ लेकर ट्रैक्टर ट्रॉली से तीसरे चक्कर मिट्टी भरने के लिए खेत पर जा रहे थे। उनके साथ पुत्र विपिन और गोविंद भी थे। हिंडन नदी की रेतीली ढांग पर ट्रैक्टर चलाने में लीलू को दिक्कत आ रही थी। गांव से कुछ ही दूरी पर अचानक संतुलन बिगड़ा और खाली ट्रैक्टर ट्रॉली समेत नदी में पलट गया, जिससे आसपास काम करने वाले ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। ट्रैक्टर के नीचे लीलू और उसके पुत्र विपिन (20) और गोविंद (28) दब गए।
इसके बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और दोनों को मशक्कत के बाद बाहर निकाला। आनन-फानन में परिजन नाजुक हालत में लीलू को बाइक से लेकर ही चरथावल सीएचसी पहुंचे, जहां जांच के उपरांत डॉ. अतुल कुमार ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घायल विपिन कुमार को ट्रॉली के नीचे से निकालकर ग्रामीणों ने चरथावल में ही प्राइवेट चिकित्सक के यहां भर्ती कराया, लेकिन उसने भी उपचार के दौरान कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया। लीलू का दूसरा पुत्र गोविंद भी हादसे में गंभीर घायल हुआ, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित परिजन बिना पोस्टमार्टम के दोनों शवों को गांव ले आए।
सूचना पर कुटेसरा चौकी प्रभारी राजकुमार सिंह और हिंडन प्रभारी संजय त्यागी मौके पर पहुंचें। उन्होंने घटना के संबंध में जांच पड़ताल की। पुलिस ने बताया कि मृतक लीलू छोटा किसान था। परिजनों को पोस्टमार्टम कराने के लिए समझाया। उसके बाद परिजनों की सहमति से पंचनामा भरकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। एक साथ दो शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया।
पिता की जान बचाने के लिए घायल बेटा लेकर आया अस्पताल
हादसे में घायल बेटे गोविंद ने जब मरणासन्न पिता की हालत देखी तो वह अपना दर्द भूल गया। ग्रामीणों के सहयोग से ट्रैक्टर ट्रॉली के नीचे से पिता को निकालने के तुरंत बाद उसने उन्हें बाइक से सीएचसी पहुंचाने का काम किया। बाइक पर एक साथी उसके पिता को संभाल कर बैठा। घायल गोविंद ने बाइक चलाई। गोविंद ने कहा कि जब तक एंबुलेंस आएगी, तब तक हो सकता है अनहोनी हो जाए। सीएचसी पर जिंदगी की उम्मीदों के साथ पहुंचे बेटा गोविंद उस वक्त बेसुध हो गया, जब डॉक्टरों ने उसके पिता को मृत घोषित कर दिया।
परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय
लीलू के परिवार की हालत काफी दयनीय है। पति और बेटे को खोने पर मुनेश का रो-रोकर बुरा हाल था। सात भाई-बहनों में मृतक विपिन अविवाहित था। मृतक के सात संतानों में सिर्फ दो बेटी और एक बेटे गोविंद की शादी हुई है। सिर्फ दो बीघा जमीन है। वह ट्रैक्टर से किराये पर मिट्टी भराव और रेत ढुलाई कर जीवन यापन करता था। अक्सर उसका बेटा ट्रैक्टर चलाया करता था। रविवार को वह खुद ही दोनों बेटों को बैठाकर खुद ट्रैक्टर चला रहा था। परिजनों के मुताबिक नदी की ढांग किनारे लीलू के अचानक हाथ सुन्न होने से यह हादसा होने की आशंका है।
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