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मुन्ना बजरंगी हत्या: पुलिस थी नींद में, पहले व्हाट्सएप पर फैली सूचना, अब खुलने लगा राज

Tue, 17 Jul 2018 09:05 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत Updated Tue, 17 Jul 2018 09:05 PM IST
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Munna Bajrangi murder: Information on the Whatsapp Group arrived before police, secret will now open
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या में पुलिस को देरी से भनक लगी। जेल में चल रहे मोबाइलों के माध्यम से कई लोगों को पहले ही जानकारी मिल गई थी। पुलिस को देरी से जानकारी मिली। सर्विलांस से ऐसे नंबरों का भी खुलासा हो रहा है, जिन्हें हत्या के बाद से जेल से सूचनाएं दी। 

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मुन्ना बजरंगी की हत्या में पुलिस की रफ्तार बेहद धीमी रही। वारदात के बाद जेल प्रशासन की ओर से ही देरी से सूचना पुलिस तक पहुंची। पुलिस को जब तक भनक लगती है, उससे पहले ही व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों तक सूचना पहुंचनी शुरू हो गई थी। हत्या सवा छह बजे हुई और जेल से बाहर करीब साढे़ छह बजे ही सूचना पहुंचने लगी। जबकि खेकड़ा थाने को मामले की जानकारी साढे़ सात बजे मिली। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार और एसपी जयप्रकाश भी करीब आठ बजे जिला कारागार पहुंचे। जेल में बंद बंदी लगातार जेल से बाहर के परिचितों को हत्या की जानकारी दे रहे थे। 
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उधर, मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेल प्रशासन पूरी तरह गफलत में था। पुलिस का रिकॉर्ड बताता है कि हत्या सुबह सवा छह बजे हुई और खेकड़ा थाने में प्राथमिक सूचना साढे़ सात बजे दर्ज कराई गई। इसी बड़ी वारदात में आखिर संबंधित थाने में सूचना देर से क्यों दी। बागपत जेल में सुनील राठी के रहने के दौरान जेल प्रशासन पंगु हो जाता था। इसकी एक बानगी मुन्ना बजरंगी हत्याकांड भी है। निलंबित जेलर यूपी सिंह ने बजरंगी की हत्या का मुकदमा सुनील राठी के खिलाफ दर्ज कराया। सुबह सवा छह बजे हत्या हुई और थाने पर प्राथमिक सूचना देने का समय दर्शाया गया है साढे़ सात बजे।

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Munna Bajrangi murder: Information on the Whatsapp Group arrived before police, secret will now open
फाइल फोटो

इससे जाहिर है कि वारदात के बाद जेल प्रशासन किस तरह हड़बड़ाया हुआ था। जेल से थाने की दूरी करीब छह किलोमीटर है। पुलिस को सूचना देरी से देने को लेकर जेल प्रशासन भी जांच के दौरान निशाने पर आ सकता है।

मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं बंदी 
सुनील राठी के फतेहगढ़ जेल में शिफ्ट हो जाने के बाद भी बागपत जेल में बंदी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। अभी तक पुलिस एक सौ से ज्यादा बंदियों के बयान ले चुकी है। अधिकतर में सिर्फ यही जानकारी मिली है कि वह सो रहे थे और गोली चलने की आवाजें आई। कुछ बंदियों ने कहा कि वह नहाने की तैयारी कर रहे थे, कुछ का कहना है कि वह शौचालय में थे। वारदात कैसे हुई, इस गुत्थी में भी उलझी है।

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