मूकदर्शक सिस्टम, मालिक ने खुद ही गिराया होटल अलकरीम
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अलकरीम होटल ध्वस्त करने मंगलवार को पहुंची सरकारी मशीनरी पहली मंजिल के मलबे के सामने ही हांफ गई। सरकारी तामझाम और संसाधन होटल की एक ईंट तक नहीं हटवा पाए। जितने सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस फोर्स मौके पर थी, उतनी संख्या में ईंट भी होटल की पहली मंजिल से नहीं हट पाईं। अधिकारियों के निर्देशन में होटल की पहली मंजिल का मलबा होटल मालिक के मजदूरों ने ही हटाया। साथ ही निगम की चार दुकानों को खाली कराया गया। करीब नौ घंटे की नोकझोंक और बहस के बाद होटल मालिक द्वारा बाकी बचे निर्माण को स्वयं ही तोड़ने की मांग से संतुष्ट होकर पूरा सरकारी अमला वापस हो गया।
शहर घंटाघर पर नगर निगम की खसरा नं. 542 पर चार दुकानों का स्वरूप बदलकर अलकरीम होटल संचालित है। जिसको अलकरीम होटल मालिक नासिर इलाही के चाचा हाजी नूर इलाही ने सिविल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ी। सरकारी पक्ष ने होटल की बिल्डिंग को अवैध साबित करने के लिए हाईकोर्ट में सभी सुबूत प्रस्तुत किए। जिस पर हाईकोर्ट ने पिछले साल नगर निगम, एमडीए, जिला प्रशासन और एसपी सिटी को तत्काल प्रभाव से अवैध निर्माण तोड़ने के निर्देश दिए थे। निगम प्रशासन रहा हो या फिर एमडीए अधिकारी सभी हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करते रहे। जब हाईकोर्ट ने अपने आदेश की अवमानना में डीएम, एमडीए वीसी और नगरायुक्त को तलब कर लिया। अब न्यायालय ने दो फरवरी को जिला प्रशासन से कार्रवाई पर जवाब मांगा है। जिसके लिए प्रशासन ने संयुक्त रूप से मंगलवार को कार्यवाही शुरू की।
सस्ते में सिमटा अभियान
नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा के निर्देश पर ध्यान दें तो निगम की दुकान संख्या 420, 421, 422, 423 को तोड़कर अवैध निर्माण करके दोमंजिला होटल का रूप दे दिया गया। अवैधानिक रूप से निर्मित होटल अलकरीम को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इस निर्देश पर मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार, डीडीओ अतुल मिश्र, एमडीए के अपर सचिव बैजनाथ, जोनल प्रभारी अजीत त्यागी, एपी सिंह अधिशासी अभियंता, पीएस मिश्रा, नगर निगम के अपर नगरायुक्त रामभरत तिवारी, किराया प्रभारी दिनेश यादव, संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार पूरे अमले और जेसीबी के साथ सुबह दस बजे से अलकरीम होटल पर पहुंचने शुरू हो गए। सबसे पहले सीओ रणविजय सिंह, सीओ बीएस वीर कुमार फोर्स के साथ पहुंचे। निगम और एमडीए अधिकारियों के निर्देश पर दुकानों के ऊपर से मलबा हटाने का काम 10:30 बजे शुरू कर दिया गया। लेकिन अपर नगरायुक्त रामभरत तिवारी सुबह करीब 11:45 बजे मौके पर पहुंचे। उसके बाद ही मलबा हटाने का कार्य गति पकड़ सका।
बेकार खड़ी रही सरकारी मशीनरी
खास बात यह रही कि नगर निगम और एमडीए के अधिकारियों ने निर्माण तोड़ने के लिए न तो अपने कर्मचारी लगाए और न ही मशीनरी। होटल मालिक ने ही अपने मजदूरों से मलबा हटवाया। शाम करीब 5:15 बजे तक दुकानों की छत ही साफ हो पायी। हालांकि नगर निगम अधिकारियों ने होटल मालिक से लिखित में सहमति ली है कि वह बाकी अवैध निर्माण को भी स्वयं ही हटवाएंगे। नगरायुक्त ने चारों दुकानों को जमीदोज करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
मैंने मुकदमा लिया वापस
अलकरीम होटल के खिलाफ सिविल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ने वाले हाजी नूर इलाही मंगलवार को अलग अंदाज में नजर आए। जहां उन्होंने एक दिन पहले ही हाईकोर्ट में दाखिल किए वह दस्तावेज दिखाए जो शपथ पत्र के रूप में थे। जिसमें उन्होंने अपनी पीआईएल वापस लेने की बात भी कही और होटल की इमारत को भी वैध बताया। साथ ही कहा कि मेरे भतीजे नासिर इलाही को बेवजह परेशान किया जा रहा है। आरोप लगाया कि निगम अधिकारियों ने नासिर को लूटा है। पीआईएल वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में दाखिल किए गए शपथ पत्र की कॉपी भी नगर निगम अधिकारियों ने रिसीव करने से इंकार कर दिया। ऐसी स्थिति में निगम प्रशासन को अलकरीम होटल को नहीं तोड़ना चाहिए।
महिलाओं ने डाला छत पर डेरा
अलकरीम होटल को तोड़े जाने की तैयारी की सूचना पर होटल मालिक के परिवार की महिलाएं और बच्चे सुबह से ही होटल की छत पर पहुंच गए। जहां महिलाएं मदद की भीख मांगती रही तो वहीं बच्चे हाथ जोड़कर होटल न तोड़ने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाते रहे। होटल तोड़े जाने की सूचना से होटल मालिक की पत्नी बेहोश हो गई। जिसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जनता रही हलकान
होटल ध्वस्त करने के लिए जब फोर्स पहुंची तो घंटाघर के आसपास ट्रैफिक डायवर्जन कर दिया गया। अलकरीम होटल पर कार्रवाई की सूचना पर संयुक्त व्यापार संघ और मेरठ व्यापार मंडल के पदाधिकारी अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंच गए। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने कई बार लाठी फटकारी। कई बार होटल मालिक पक्ष और पुलिस अधिकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। इस दौरान घंटाघर ही नहीं बल्कि आसपास के सभी मार्ग जाम से जूझते रहे।
होटल मालिक का यह दावा
नासिर अली का दावा है कि हमने नगर निगम की दुकानों से कोई छेड़छाड़ नहीं की थी। हमें केवल दुकानों में शीशे आदि लगाए थे। हमारे रिश्तेदार ने ही रंजिशन गलत शिकायतें की थीं। जिसके कारण मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। अब हमारे उस रिश्तेदार ने भी हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर पीआईएल वापस ले ली है। निगम और एमडीए के अधिकारियों के निर्देश पर हमने दुकानों के ऊपर बनायी गई बिल्डिंग से पूरा मलबा स्वयं ही हटा लिया है। दुकानों से भी शीशा आदि सामान हटवा लिया है। हम पूरी तरह कानून पर अमल कर रहे हैं। न्यायालय और प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की पूरी उम्मीद है।
चारों दुकानें तोड़ीं जाएंगी
नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा का होटल मालिक के इस कथन पर कहना है कि निगम की दुकानों को तोड़कर अवैध निर्माण किया गया है। निगम की चारों दुकानें तोड़ीं जाएंगी। अगर आदेश का पालन नहीं होता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। न्यायालय के आदेश का पालन किया जाना अनिवार्य है।