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नफरत फैलाने वाले जीत जाते हैं : वसीम बरेलवी 

Sun, 14 Aug 2016 01:59 AM IST
अमर उजाला/मेरठ
अमर उजाला/मेरठ Updated Sun, 14 Aug 2016 01:59 AM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में बोलते मशहूर शायर वसीम बरेलवी। - फोटो : अमर उजाला
जहनों में जहर बोने वाले नेता बन रहे हैं। भड़काऊ बयान देकर और नफरत फैलाकर लोग जीत जाते हैं। जरूरी यह है कि पहले समाज संगठित हो, कुर्सी बाद में आती है। समाज संगठित नहीं रहेगा तो हमारी संस्कृति और परंपरा नहीं बचेगी। लोगों को स्वार्थों से ऊपर उठकर सोचना चाहिए, तभी हमारी संस्कृति का भला होगा और भविष्य का ख्वाब देख पाएंगे। मौलिकता को कायम रखना और बुनियाद से जुड़े रहना बेहद जरूरी है। यह कहना है मशहूर शायर वसीम बरेलवी का। अमर उजाला के कार्यक्रम में आए शायर ने आज के समय पर दुख जताया।
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अदब के शायर वसीम बरेलवी ने समाज के हाल और मौजूदा राजनीति पर सिर्फ अपना एक शेर पढ़ा... ‘वो मेरे  चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था, मैंने उसके हाथ चूमे और बेबस कर दिया’। नफरत के लिए एक शेर पढ़ा.... ‘नफरत के साथ भीड़ है, नारा है, जोश है, मैं बात कर रहा हूं अमन की, तन्हा हूं, जिंदा हूं, हैरत की बात है’।
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उन्होंने कहा अमन के लिए मोहब्बत और तहजीब की जरूरत है। नई जेनरेशन को लेकर वसीम साहब का कहना है वह उनके शौक की कद्र करते हैं। रात के दो बजे तक सुनने के लिए वह ठहरते हैं। सेल्फी लेते हैं। सोशल साइट्स ने शायरी को सुनसान सड़कों से भीड़ के शोर तक पहुंचाने का काम किया है। बस युवाओं के साथ दिक्कत यह है कि उनकी एप्रोच शॉटकट है। उन्होंने कहा 55 साल गंवाने के बाद शायर बने। इतने सोए नहीं कि जितने जागे हैं। शायरी जल्दबाजी का काम नहीं है। युवाओं से निवेदन है वह मेहनत, लगन और पूरी परंपरा के साथ शायरी को सीखें।
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यह साधना है। अगर ऐसा किया तो शोहरत खुद चौखट पर आएगी। उर्दू की हालत पर वसीम बरेलवी ने कहा यह हिंदुस्तान की अमानत है। सरकार को इसे रोजगार से जोड़कर बढ़ाना चाहिए। जुबानों का कोई मजहब नहीं होता। मेरठ से ऐतिहासिक क्रांति पर उन्होंने कहा क्रांति की चिंगारी यहां शोला बनी थी। अंग्रेज समझ गए थे, लोग अब कुछ भी कुर्बान करने के लिए तैयार हैं। क्रांति में मेरठ के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है। 


आयोजन का वक्त बदले 
वसीम
बरेलवी का कहना है कवि सम्मेलन और मुशायरों का वक्त बदलने का दौर आ गया है। वह इस बात राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहे हैं। उन्होंने कहा आयोजन प्राइम टाइम में होने चाहिए। देर रात तक लोगों को जगाने की परंपरा बदलनी चाहिए।
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