नौकरी जरूरी, पर इबादत करतीं हैं पूरी, रमजान में जॉब के साथ रोजे भी रख रहीं कामकाजी महिलाएं
स्कूल में गुजर जाता है टाइम
ब्लॉसम्स स्कूल में शिक्षिका एलिज़ा रेहान कहती हैं स्कूल में वक्त ऐसे निकल जाता है कि भूख, प्यास महसूस ही नहीं होती। जब घर जाती हूं तो थकान और भूख लगती है। उसके बाद नमाज़ की तैयारी करते हैं। बच्चों को पढ़ाने से भी अच्छा लगता है और वक्त भी कट जाता है।
पता नहीं चलता कब दिन गुजर गया
इरम जहां इस्माईल नेशनल महिला डिग्री कॉलेज में शिक्षिका हैं। बताया कि स्कूल में समय का पता ही नहीं चलता कि वक्त कब कट जाता है। शाम को थकान महसूस होती है। लेकिन इबादत के आगे सारी थकन मिट जाती है। अच्छा लगता है कि अपने काम के साथ हम थोड़ी सी इबादत भी कर लेते हैं।
खुशी का अहसास होता है
जैनब नकवी पेशे से वकील हैं। कहा कि हौसले के आगे सारी मुश्किलें ढेर हो जाती हैं। कचहरी के लिए निकलती हूं तो थोड़ा भूख महसूस होती है। लेकिन इसके बाद सारा दिन काम में व्यस्त रहने के कारण निकल जाता है। इसी बहाने थोड़ी सी डाइटिंग भी हो जाती है।
आराम से निकल जाता है दिन
काम में सारा दिन कैसे निकल जाता है, पता ही नहीं चलता। सुबह ऑफिस के बाद रोज के काम में वक्त निकल जाता है। रोजे में भूखे रहने के बाद भी थकान या भूख का अहसास नहीं होता। सहरी के लिए कुछ अच्छा पकाना आनंद की अनुभूति देता है। -समीना अली खान, कर्मचारी, आयकर विभाग