बड़ा खेल: हर रोज पांच लाख रुपये की लूट कर रहा ऊर्जा निगम, ऐसे खुली पोल, सामने आया सच
उर्जा निगम को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच पड़ताल में पाया गया कि उर्जा निगम हर रोज उपभोक्ताओं की जेब से पांच लाख रुपये की लूट कर रहा है।
विस्तार
उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देने का दावा करने वाला पीवीवीएनएल ही सुविधाओं पर डाका डालने में लगा हुआ है। सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं की जेब से रोजाना पांच लाख रुपये की लूट की जा रही है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को मिलने वाले अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आदेश का भी उल्लंघन हो रहा है।
महंगी बिजली दरों से उपभोक्ताओं की कमर तोड़ने वाले उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी करने के लिए देय तिथि से पहले बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को बिल पर एक फीसदी की छूट देने का प्रावधान किया हुआ है। पीवीवीएनएल के सॉफ्टवेयर में भी इसे अपडेट किया हुआ है। एसबीएम से बनने वाले बिल पर दो अमाउंट होते है। एक देय तिथि से पहले का अमाउंट और एक देय तिथि से बाद वाला। देय तिथि से पहले बिल जमा करने वाले उपभोक्ता को देय अमाउंट से एक फीसदी की छूट वाला बिल जमा करने पर भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जो छूट बिल पर दिखाई जाती है वह अगले बिल में एरियर के रूप में फिर से जुड़कर आ जाती है।
केस नंबर एक
कंकरखेड़ा निवासी वरुण सांगवान हर महीने देय तिथि से पहले अमाउंट पर बिल जमा करते हैं। वरुण ने बताया कि बिल पर मिली छूट अगले महीने के बिल में जुड़कर आ जाती है। ऐसा कई महीने से हो रहा है। अब उन्होंने देय तिथि पर ही बिल जमा करना शुरू कर दिया है।
केस नंबर दो
रोहटा रोड निवासी जयराज सिंह एडवोकेट ने बताया कि वे भी छूट के चक्कर में अपना बिल देय तिथि से पहले जमा कराते थे। लेकिन बिल पर ली गई छूट अगले बिल में एरियर के रूप में आ जाती थी। शिकायत करने पर सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी बताकर पल्ला झाड़ा जा रहा है।
30 फीसदी उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही छूट
पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले 70 लाख उपभोक्ताओं में से हर रोज करीब डेढ़ लाख उपभोक्ता अपना बिल जमा करते हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी उपभोक्ता यानि 45 हजार अपना बिल देय तिथि से पहले जमा करते हैं, लेकिन इन्हें छूट का लाभ नहीं मिल रहा है। दो किलोवाट भार वाले घरेलू उपभोक्ताओं का औसतन 1100 रुपये बिल आता है। एक फीसदी छूट के हिसाब से 11 रुपये की छूट बैठती है। 45 हजार उपभोक्ताओं पर छूट का अमाउंट करी पांच लाख होता है, जो उपभोक्ताओं की जेब की बजाय विभाग के खाते में जा रहा है।
सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी बताकर झाड़ रहे पल्ला
विभागीय अधिकारी इसे बिलिंग सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना हैं कि सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी से ऐसा होता रहता है। बिल संशोधन करके इसे ठीक कर दिया जाता है।
क्या बोले अधिकारी
उपभोक्ता को उसका अधिकार मिलना चाहिए। यदि बिल पर मिलने वाली छूट नहीं मिल पा रही है तो वे इसे दिखवाएंगे। अगर सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी है तो इसे भी ठीक कराया जाएगा। उपभोक्ताओं को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ