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डाटा अपलोड करने पर ही खुलेगा फॉर्म
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
Updated Mon, 08 Feb 2016 02:09 AM IST
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कई बार कहने के बावजूद डिग्री कॉलेज हायर एजूकेशन सर्वे के लिए डाटा पोर्टल पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। इससे विवि की छवि खराब हो रही है। शासन ने सख्ती का आदेश दिया है।
विवि ने भी अपने तेवर सख्त कर दिए हैं। रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों के एग्जाम फॉर्म तभी भरे जाएंगे जब कॉलेज अपना डाटा अपलोड कर देंगे। इस शर्त से छात्रों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
छात्रों के दबाव में कॉलेज जल्दी डाटा अपलोड कर देंगे, ऐसा विवि का मानना है। इसके अलावा मान्यता निरस्त करने की संस्तुति के चेतावनी भी दी गई है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर देशभर के कॉलेजों से उनके इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र और शिक्षकों की जानकारी ली जा रही है। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है, जिस पर हर कॉलेज को लॉगिन आईडी बनाकर अपना डाटा अपलोड करना है।
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मेरठ और सहारनपुर मंडल के 827 कॉलेज विवि से संबद्ध हैं। अभी तक सिर्फ करीब 300 कॉलेजों ने ही डाटा अपलोड किया है। रजिस्ट्रेशन करीब 500 करा चुके हैं। विवि ने डाटा नहीं देने वाले संस्थानों के लिए नया सर्कुलर निकाला है। जिसके मुताबिक जो कॉलेज डाटा नहीं अपलोड करेंगे, उनके एग्जाम फॉर्म ओपन नहीं होंगे।
साथ ही शासन से मान्यता निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी। रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों के एग्जाम फार्म 15 फरवरी के बाद भरे जाने की संभावना है। अभी सेमेस्टर एग्जाम फार्म का काम चल रहा है। दरअसल बहुत से कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने कागजों में तो नॉर्म पूरे करने का दावा कर रखा है, लेकिन असलियत में फर्जीवाड़ा करके चल रहे हैं। फैकल्टी नहीं रखी हैं।
एक शिक्षक के कागज कई-कई जगह लगे हैं। हायर एजुकेशन के सर्वे को सरकार गंभीरता से ले रही है। शासन का रुख डाटा नहीं देने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का है। विवि तीन चार बार कॉलेजों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बता चुका है। वर्कशॉप कराई जा चुकी है। लेकिन वह नहीं सुधर रहे।
छात्रों का क्या कसूर
विवि ने कॉलेजों पर सख्ती करने के लिए छात्रों का सहारा लिया है। एग्जाम फॉर्म नहीं खुलने पर छात्रों को परेशानी होगी, जबकि मामले में छात्रों का कोई दोष नहीं है।
12 फरवरी तक डाटा अपलोड करने को कहा है। इस चेतावनी पर भी कॉलेज नहीं सुधरते तो विवि मान्यता निरस्त करने की संस्तुति करेगा।
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विवि ने भी अपने तेवर सख्त कर दिए हैं। रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों के एग्जाम फॉर्म तभी भरे जाएंगे जब कॉलेज अपना डाटा अपलोड कर देंगे। इस शर्त से छात्रों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
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छात्रों के दबाव में कॉलेज जल्दी डाटा अपलोड कर देंगे, ऐसा विवि का मानना है। इसके अलावा मान्यता निरस्त करने की संस्तुति के चेतावनी भी दी गई है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर देशभर के कॉलेजों से उनके इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र और शिक्षकों की जानकारी ली जा रही है। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है, जिस पर हर कॉलेज को लॉगिन आईडी बनाकर अपना डाटा अपलोड करना है।
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मेरठ और सहारनपुर मंडल के 827 कॉलेज विवि से संबद्ध हैं। अभी तक सिर्फ करीब 300 कॉलेजों ने ही डाटा अपलोड किया है। रजिस्ट्रेशन करीब 500 करा चुके हैं। विवि ने डाटा नहीं देने वाले संस्थानों के लिए नया सर्कुलर निकाला है। जिसके मुताबिक जो कॉलेज डाटा नहीं अपलोड करेंगे, उनके एग्जाम फॉर्म ओपन नहीं होंगे।
साथ ही शासन से मान्यता निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी। रेग्युलर और प्राइवेट छात्रों के एग्जाम फार्म 15 फरवरी के बाद भरे जाने की संभावना है। अभी सेमेस्टर एग्जाम फार्म का काम चल रहा है। दरअसल बहुत से कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने कागजों में तो नॉर्म पूरे करने का दावा कर रखा है, लेकिन असलियत में फर्जीवाड़ा करके चल रहे हैं। फैकल्टी नहीं रखी हैं।
एक शिक्षक के कागज कई-कई जगह लगे हैं। हायर एजुकेशन के सर्वे को सरकार गंभीरता से ले रही है। शासन का रुख डाटा नहीं देने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का है। विवि तीन चार बार कॉलेजों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बता चुका है। वर्कशॉप कराई जा चुकी है। लेकिन वह नहीं सुधर रहे।
छात्रों का क्या कसूर
विवि ने कॉलेजों पर सख्ती करने के लिए छात्रों का सहारा लिया है। एग्जाम फॉर्म नहीं खुलने पर छात्रों को परेशानी होगी, जबकि मामले में छात्रों का कोई दोष नहीं है।
12 फरवरी तक डाटा अपलोड करने को कहा है। इस चेतावनी पर भी कॉलेज नहीं सुधरते तो विवि मान्यता निरस्त करने की संस्तुति करेगा।