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देश का इतिहास नेशनल सेंट्रिंक करें : प्रो. सतीश
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 07 Feb 2016 01:41 AM IST
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भारतीय इतिहास संकलन समिति और सीसीएसयू के इतिहास विभाग ने शनिवार को दो दिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजन किया। मुख्य अतिथि विख्यात इतिहासकार और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. सतीश चंद्र मित्तल ने कहा देश का इतिहास यूरो सेंट्रिक लिखा गया। इसे इंडो सेंट्रिक या नेशनल सेंट्रिक बनाने की जरूरत है। 1857 की क्रांति को बगावत कहना, राष्ट्रीय आंदोलन को जानवरों की लड़ाई कहना, षड़यंत्र का हिस्सा है।
उन्होंने सवाल खड़ा किया भारतीय इतिहास अंग्रेज चिंतन की दासता से कब मुक्त होगा? पूर्वजों से नाता तोड़कर इतिहास नहीं खोज सकते। प्रो. सतीश ने कहा आजाद के बाद सही और तथ्य परख इतिहास लिखने की आवश्यकता थी। स्वतंत्र भारत की नई पीढ़ी को जो इतिहास पढ़ने को मिला उसमें पक्षपात भरा हुआ था।
अब इसे सुधारे जाने की जरूरत है। अंग्रेजी इतिहासकार और चिंतकों का असर हमारे इतिहास में देखने को मिलता है। इतिहास की समस्याओं और पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासतों का आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनका विश्लेषण करने की आवश्यकता है।
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विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा इतिहास सिर्फ घटनाओं का वर्जन मात्र नहीं है। भावी पीढ़ी सही इतिहास से परिचित हो, इस दृष्टि से सेमिनार का आयोजन सार्थक है। देश के गौरवशाली अतीत को पाठ्यक्रमों में जगह देकर युवाओं को बताने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया। इस दौरान डॉ. जया शर्मा, प्रो. आराधना, डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा, आलोक कुमार, अजय मित्तल मौजूद रहे।
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उन्होंने सवाल खड़ा किया भारतीय इतिहास अंग्रेज चिंतन की दासता से कब मुक्त होगा? पूर्वजों से नाता तोड़कर इतिहास नहीं खोज सकते। प्रो. सतीश ने कहा आजाद के बाद सही और तथ्य परख इतिहास लिखने की आवश्यकता थी। स्वतंत्र भारत की नई पीढ़ी को जो इतिहास पढ़ने को मिला उसमें पक्षपात भरा हुआ था।
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अब इसे सुधारे जाने की जरूरत है। अंग्रेजी इतिहासकार और चिंतकों का असर हमारे इतिहास में देखने को मिलता है। इतिहास की समस्याओं और पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासतों का आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनका विश्लेषण करने की आवश्यकता है।
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विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा इतिहास सिर्फ घटनाओं का वर्जन मात्र नहीं है। भावी पीढ़ी सही इतिहास से परिचित हो, इस दृष्टि से सेमिनार का आयोजन सार्थक है। देश के गौरवशाली अतीत को पाठ्यक्रमों में जगह देकर युवाओं को बताने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया। इस दौरान डॉ. जया शर्मा, प्रो. आराधना, डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा, आलोक कुमार, अजय मित्तल मौजूद रहे।