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ढुलाई भाड़े के नाम पर किसानों से धोखा

Sat, 06 Feb 2016 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 06 Feb 2016 02:05 AM IST
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केंद्र व राज्य सरकार से करीब दो हजार करोड़ की रियायत झटकने के बावजूद शुगर इंडस्ट्री किसानों से धोखाधड़ी करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रही है।
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एसएपी की पहली किस्त 230 रुपये के हिसाब से भुगतान करने की सुविधा के बाद भी शुगर मिल इसी पार्ट पेमेंट से 8.75 रुपये प्रति कुंतल गन्ना ढुलाई भाड़ा काट रही हैं। मंडल की शुगर मिल अब तक किसानों का दस करोड़ रुपया ढुलाई भाड़े का काट चुकी हैं। मामले को लेकर किसान खफा हैं, इसके खिलाफ रालोद ने अधिकारियों का घेराव करने का एलान किया है।

चालू पेराई सत्र शुरू नहीं करने का दबाव बनाकर और चीनी रेट कम होने से हो रहे घाटे के नाम पर शुगर इंडस्ट्री केंद्र व प्रदेश सरकार से करीब दो हजार करोड़ रुपये की रियायत झटक चुकी हैं। चालू सत्र में सरकार ने बैक डोर से रंगराजन कमेटी की सिफारिश लागू करते हुए एफआरपी 230 रुपये से भुगतान करने की मिलों को सुविधा दी है।
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सरकार ने एसएपी का भुगतान दो किस्तों में करने की व्यवस्था कर किसानों को पहले ही झटका दे दिया है। अब शुगर मिल भी 230 रुपये प्रति कुंतल में से ही 8.75 रुपये प्रति कुंतल ढुलाई भाड़ा काट रही हैं। किसानों को 221.25 रुपये का ही भुगतान हो रहा है।  
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450 करोड़ रुपये कटता है ढुलाई भाड़ा  
प्रदेश की शुगर मिलें करीब 50 से 55 करोड़ कुंतल गन्ना सेंटरों के माध्यम से खरीदती हैं। गन्ने को सेंटर से मिलों तक ले जाने के लिए शुगर मिल किसानों से 8.75 रुपये प्रति कुंतल की दर से ढुलाई भाड़ा वसूलती हैं। प्रदेश में हर साल करीब 450 करोड़ रुपये ढुलाई भाड़े के रूप में वसूला जाता है।

काटा जा चुका 10 करोड़ रुपया
मंडल की मिलों ने 230 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से चालू सत्र का करीब 320 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया है। इसमें से करीब 10 करोड़ रुपया ढुलाई भाड़े का काटा जा चुका है।

लेट पेमेंट पर नहीं ढुलाई भाड़े का हक
गन्ना खरीद एवं आपूर्ति अधिनियम व जीएसआर के मुताबिक शुगर मिलों को खरीदे गए गन्ने का पेमेंट 14 दिन के अंदर करना होता है। अगर मिल ऐसा नहीं करती हैं तो उस पर 15 फीसदी की दर से देय गन्ना मूल्य भुगतान पर विलंब ब्याज लगाने व किसानों से ढुलाई भाड़ा नहीं काटने का प्रावधान है।


आंदोलन की चेतावनी
रालोद के वेस्ट यूपी संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार संागवान और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इसे किसानों के साथ धोखा बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की छाती पर पैर रखकर शुगर लॉबी का साथ दिया है। मिलों को तमाम रियायतें दे दीं, लेकिन किसानों को लुटने के लिए छोड़ दिया। अब किसान चुप नहीं बैठेंगे, गन्ना भुगतान, ब्याज और ढुलाई भाड़े को लेकर जल्द आंदोलन होगा।
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