{"_id":"d7103cda97f085f04f2bda94166feb48","slug":"meerut-news-hindi-news-50","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमडीए के डबल वसूली गेम में फंसे आवंटी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमडीए के डबल वसूली गेम में फंसे आवंटी
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 29 Jan 2016 02:09 AM IST
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आश्रय विहीन आवास बनाए नहीं और इस नाम पर अन्य आवंटियों से वसूली कर ली। एमडीए ने ईडब्लूएस यानी दुर्बल आय वर्ग के आवास बनाने में दोहरा खेल कर डाला। अन्य प्रतिकर पर भी 70 माह का अतिरिक्त ब्याज जोड़ दिया गया। ईडब्लूएस मकान जिनको दिए गए, उनसे अलग से वसूली कर डाली।
यह है पूरा प्रकरण
किसानों को किए अतिरिक्त प्रतिकर के भुगतान की वसूली एमडीए ने आवंटियों से की। उदाहरण के तौर पर कंकरखेड़ा क्षेत्र में एमडीए की आवासीय योजना श्रद्धापुरी में आवंटियों से 304 रुपये प्रति वर्ग मीटर अतिरिक्त प्रतिकर वसूला गया। इस रकम में अधिष्ठान एवं सामान्य व्यय के अलावा अन्य वसूली भी की गई। आश्रय विहीन व्यक्तियों के लिए आवास बनाने को 16 रुपये 95 पैसे की दर से वसूली हुई। ईडब्लूएस आवास बनाने के लिए 28. 48 रुपये की दर से व्यय लगाया गया।
ब्याज लगाकर खेल
आश्रयविहीन आवास बनाने के लिए 16.95 रुपये की दर पर 198 माह का ब्याज लगा दिया गया। कुल 42.06 रुपये की दर से वसूली की गई। ईडब्लूएस के लिए 28.48 रुपये पर भी इतनी ही अवधि का ब्याज लगा। नतीजा यह रकम बनी 70 रुपये 67 पैसे। कुल 158 रुपये 18 पैसे प्रति वर्ग मीटर की दर सभी आवंटियों पर थोप दी गई।
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एक योजना से वसूली 33 लाख
केवल श्रद्घापुरी योजना में ही 20.773 हजार वर्ग मीटर जमीन है। ऐसे में यहां के आवंटियों पर करीब 33 लाख रुपये का बोझ डाल दिया गया। पल्लवपुरम तथा अन्य योजनाओं पर इसी तरह को बोझ लगाकर सभी योजनाओं में दो करोड़ से ज्यादा की वसूली की गई। अहम यह कि अन्य प्रतिकर पर भी 70 माह का अतिरिक्त ब्याज जोड़ा गया। इस प्रकरण में शीर्ष कोर्ट ने 30 अप्रैल 1997 को आदेश दिया था कि एमडीए सही गणना कर काम करे। एमडीए ने इस गणना में 70 माह की देरी की और इस देरी का ब्याज थोपा आवंटियों पर। इसका ब्याज 80 रुपये 53 पैसे प्रति वर्ग मीटर की दर से अतिरिक्त लगा। और अतिरिक्त 1.66 करोड़ रुपये आवंटियों पर पड़ गया।
कहां हैं आश्रयविहीन आवास
रकम तो वसूली पर आश्रयविहीन लोगों के लिए आवास बनाए ही नहीं गए। आरटीआई में एमडीए अफसरों ने खुद माना कि इस वर्ग के लोगों के लिए आवास यहां नहीं बनाए जा सके हैं। वहीं, ईडब्लूएस आवासों में भी खेल हुआ। जो रकम आवंटियों से ली उतनी ही रकम यानी 28.48 पैसे मय ब्याज उन आवंटियों से भी ली। जिन्हें बाद में ईडब्लूएस के आवास बनाकर आवंटन किया गया। जब यह रकम पहले ले ली गई थी तो उनसे नियमानुसार यह नहीं ली जा सकती है।
शासन तक पहुंची गूंज
इसकी गूंज शासन तक पहुंच गई है। यहां के आवंटियों ने एमडीए वीसी और शासन से शिकायत में कहा है कि जो लोग यह रकम जमा कर चुके हैं, उन्हें वापस की जाए। जिन्हें इस बाबत अब नोटिस जारी किए गए हैं और वसूली की बात कही जा रही है उस पर रोक लगाई जाए। मामले पर समिति का भी गठन किया गया है। आवंटियों ने अपने सीए की गणना रिपोर्ट भी लगाई है।
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यह है पूरा प्रकरण
किसानों को किए अतिरिक्त प्रतिकर के भुगतान की वसूली एमडीए ने आवंटियों से की। उदाहरण के तौर पर कंकरखेड़ा क्षेत्र में एमडीए की आवासीय योजना श्रद्धापुरी में आवंटियों से 304 रुपये प्रति वर्ग मीटर अतिरिक्त प्रतिकर वसूला गया। इस रकम में अधिष्ठान एवं सामान्य व्यय के अलावा अन्य वसूली भी की गई। आश्रय विहीन व्यक्तियों के लिए आवास बनाने को 16 रुपये 95 पैसे की दर से वसूली हुई। ईडब्लूएस आवास बनाने के लिए 28. 48 रुपये की दर से व्यय लगाया गया।
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ब्याज लगाकर खेल
आश्रयविहीन आवास बनाने के लिए 16.95 रुपये की दर पर 198 माह का ब्याज लगा दिया गया। कुल 42.06 रुपये की दर से वसूली की गई। ईडब्लूएस के लिए 28.48 रुपये पर भी इतनी ही अवधि का ब्याज लगा। नतीजा यह रकम बनी 70 रुपये 67 पैसे। कुल 158 रुपये 18 पैसे प्रति वर्ग मीटर की दर सभी आवंटियों पर थोप दी गई।
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एक योजना से वसूली 33 लाख
केवल श्रद्घापुरी योजना में ही 20.773 हजार वर्ग मीटर जमीन है। ऐसे में यहां के आवंटियों पर करीब 33 लाख रुपये का बोझ डाल दिया गया। पल्लवपुरम तथा अन्य योजनाओं पर इसी तरह को बोझ लगाकर सभी योजनाओं में दो करोड़ से ज्यादा की वसूली की गई। अहम यह कि अन्य प्रतिकर पर भी 70 माह का अतिरिक्त ब्याज जोड़ा गया। इस प्रकरण में शीर्ष कोर्ट ने 30 अप्रैल 1997 को आदेश दिया था कि एमडीए सही गणना कर काम करे। एमडीए ने इस गणना में 70 माह की देरी की और इस देरी का ब्याज थोपा आवंटियों पर। इसका ब्याज 80 रुपये 53 पैसे प्रति वर्ग मीटर की दर से अतिरिक्त लगा। और अतिरिक्त 1.66 करोड़ रुपये आवंटियों पर पड़ गया।
कहां हैं आश्रयविहीन आवास
रकम तो वसूली पर आश्रयविहीन लोगों के लिए आवास बनाए ही नहीं गए। आरटीआई में एमडीए अफसरों ने खुद माना कि इस वर्ग के लोगों के लिए आवास यहां नहीं बनाए जा सके हैं। वहीं, ईडब्लूएस आवासों में भी खेल हुआ। जो रकम आवंटियों से ली उतनी ही रकम यानी 28.48 पैसे मय ब्याज उन आवंटियों से भी ली। जिन्हें बाद में ईडब्लूएस के आवास बनाकर आवंटन किया गया। जब यह रकम पहले ले ली गई थी तो उनसे नियमानुसार यह नहीं ली जा सकती है।
शासन तक पहुंची गूंज
इसकी गूंज शासन तक पहुंच गई है। यहां के आवंटियों ने एमडीए वीसी और शासन से शिकायत में कहा है कि जो लोग यह रकम जमा कर चुके हैं, उन्हें वापस की जाए। जिन्हें इस बाबत अब नोटिस जारी किए गए हैं और वसूली की बात कही जा रही है उस पर रोक लगाई जाए। मामले पर समिति का भी गठन किया गया है। आवंटियों ने अपने सीए की गणना रिपोर्ट भी लगाई है।