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फेसबुक ने 28 साल बाद दिलाई घर की याद
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 16 Jan 2016 02:17 AM IST
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भाभी से मामूली कहासुनी के बाद बड़ा आदमी बनने का सपना संजोकर 28 साल पहले घर छोड़ने वाला छुर का जमील गहलौत घर लौट गया। मुंबई में रहने के दौरान जमील की परिवार के ही सदस्य से फेसबुक पर पहले दोस्ती हुई और फिर बातचीत। यहीं से उसने घर लौटने का फैसला किया। परिवार में खुशी का माहौल है।
छुर गांव निवासी शाहबुदीन के दस बच्चों में दूसरे नंबर पर जमील है। फरवरी 1987 में जमील को उसकी भाभी खुर्शीदा ने किसी बात को लेकर डांट दिया था। भाभी की डांट से दुखी जमील ने बड़ा आदमी बनने का संकल्प लेते हुए घर छोड़ दिया था। काम की तलाश में वह मुंबई जा पहुंचा। उसने पहले मजदूरी की और फिर वहीं पर मालार्ड ईस्ट में काम सीखकर मेडिकल स्टोर खोल लिया। धीरे-धीरे वह अपने गांव छुर और परिवार को भूल गया।
इधर, परिजन भी उसे तलाश कर थक गए। जमील ने वर्ष 2011 में निशा शेख के साथ निकाह कर लिया। उसके दो बच्चे भी हैं। लेकिन इसी बीच उसकी जिंदगी में फेसबुक ने फिर बदलाव किया। शुक्रवार को जमील अपने परिवार के साथ छुर पहुंचा तो घर में खुशियां छा गई। लड्डू बांटे गए। ग्रामीण और रिश्तेदार जमा हो गए। मीडिया के लोग पहुंचे तो जमील ने बताया कि एक दिन उसे फेसबुक पर साजिद गहलौत के नाम से एकाउंट मिला।
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पड़ताल की तो पता चला कि साजिद उसके ही परिवार से है। रिश्ते में वह उसका भतीजा लगता है। पहले दोस्ती हुई और फिर फोन पर बातचीत। फेसबुक ने परिवार के लोगों से मिलाया तो उसने छुर आने का मन बनाया। शुक्रवार को वह गांव पहुंच गया। जमील के चाचा याकूब गहलौत प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। गांव लौटने पर ही उसे पता चला कि उसके पिता का निधन हो चुका है। जिसका उसे गम है।
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छुर गांव निवासी शाहबुदीन के दस बच्चों में दूसरे नंबर पर जमील है। फरवरी 1987 में जमील को उसकी भाभी खुर्शीदा ने किसी बात को लेकर डांट दिया था। भाभी की डांट से दुखी जमील ने बड़ा आदमी बनने का संकल्प लेते हुए घर छोड़ दिया था। काम की तलाश में वह मुंबई जा पहुंचा। उसने पहले मजदूरी की और फिर वहीं पर मालार्ड ईस्ट में काम सीखकर मेडिकल स्टोर खोल लिया। धीरे-धीरे वह अपने गांव छुर और परिवार को भूल गया।
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इधर, परिजन भी उसे तलाश कर थक गए। जमील ने वर्ष 2011 में निशा शेख के साथ निकाह कर लिया। उसके दो बच्चे भी हैं। लेकिन इसी बीच उसकी जिंदगी में फेसबुक ने फिर बदलाव किया। शुक्रवार को जमील अपने परिवार के साथ छुर पहुंचा तो घर में खुशियां छा गई। लड्डू बांटे गए। ग्रामीण और रिश्तेदार जमा हो गए। मीडिया के लोग पहुंचे तो जमील ने बताया कि एक दिन उसे फेसबुक पर साजिद गहलौत के नाम से एकाउंट मिला।
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पड़ताल की तो पता चला कि साजिद उसके ही परिवार से है। रिश्ते में वह उसका भतीजा लगता है। पहले दोस्ती हुई और फिर फोन पर बातचीत। फेसबुक ने परिवार के लोगों से मिलाया तो उसने छुर आने का मन बनाया। शुक्रवार को वह गांव पहुंच गया। जमील के चाचा याकूब गहलौत प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। गांव लौटने पर ही उसे पता चला कि उसके पिता का निधन हो चुका है। जिसका उसे गम है।