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सपाइयों ने हाईकमान की नजर में बढ़ाया कद
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 19 Feb 2016 02:10 AM IST
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एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी राकेश यादव को जिताने के साथ-साथ पार्टी नेताओं की मंशा हाईकमान तक संदेश पहुंचाने की रही। प्रो. रामगोपाल का करीबी होने के कारण राकेश यादव को प्रत्याशी बनाया गया था।
राकेश यादव को मजबूती देने के लिए ही नामांकन के दिन प्रो. रामगोपाल यादव खुद मेरठ पहुंचे थे। चुनाव प्रभारी सुरेंद्र नागर के साथ-साथ स्थानीय बड़े नेता और सपा जिलाध्यक्ष इसीलिए इस टेस्ट में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे थे।
दरअसल पार्टी में स्थानीय संगठन और चुनाव प्रभारी पर यह जिम्मेदारी थी कि वे बेहतर चुनाव प्रबंधन से पार्टी के आला नेताओं तक संदेश पहुंचाएं। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में चुनाव प्रभारी रहे सुरेंद्र नागर ने इस बार भी शुरू से ही कमान संभाले रखी।
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खास बात यह रही कि जहां जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में नागर ने पर्दे के सामने आकर रणनीति बनाई थी, तो इस बार स्थानीय नेताओं और संगठन को आगे रखा। इसी रणनीति का हिस्सा यह रहा कि नागर नाम वापसी कराने जाते समय नहीं दिखाई दिए। शाम को प्रमाण पत्र लेने के दौरान वह राकेश यादव के साथ अवश्य दिखे।
फलावदा में हुई मुख्यमंत्री की रैली के दौरान सुरेंद्र नागर को लेकर मुख्यमंत्री काफी खुश दिखे थे। दो चुनावी सफलताओं के बाद नागर भी खुद को पश्चिम के एक बड़े नेता के तौर पर स्थापित करने में लगे हुए हैं। गौतमबुद्धनगर के सांसद रहे सुरेंद्र नागर पिछले कुछ समय से लगातार मेरठ और आसपास के जिलों में सक्रिय हैं।
वहीं पार्टी जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह ने प्रत्याशियों की नाम वापसी में अहम भूमिका निभाई। जयवीर ने स्थानीय स्तर पर पर्चा भरने वाले प्रत्याशियों से संपर्क साधने और उन्हें अपने पाले में लाने के लिए लगातार रणनीति बनाई।
दरअसल जिलाध्यक्ष बनने के बाद कई बार जयवीर सिंह की कुर्सी पर संकट आया, लेकिन हाईकमान तक मजबूत संदेश पहुंचाने में इस बार जयवीर ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसी प्रयास में विधायक गुलाम मोहम्मद, प्रभुदयाल वाल्मीकि, एमएलसी डा. सरोजिनी अग्रवाल, अतुल प्रधान सहित दूसरे नेता भी लगे रहे।
प्रोफेसर लेते रहे पल-पल की जानकारी
जिस समय नामांकन पत्रों की वापसी का क्रम चल रहा था। उस समय प्रो. रामगोपाल यादव लगातार अपडेट लेते रहे। स्थानीय नेताओं के पास रामगोपाल का फोन आता रहा और कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर से उनकी बात होती रही। जब अनिता पहाड़पुरिया का नामांकन वापस हो गया, तो तुरंत रामगोपाल को बता दिया गया कि काम पूरा हो गया है।
प्रशासन को राहत
राकेश यादव के निर्विरोध निर्वाचन से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। उसके दो मकसद एक साथ हल हो गये। निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही आगे की पूरी चुनावी प्रक्रिया बंद हो गयी है। यदि निर्विरोध निर्वाचन नहीं होता तो निर्वाचन अधिकारी को चारों जनपदों में मतदान केंद्रों की व्यवस्था के साथ ही मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती।
इस दौरान वोटरों को उठाने और अपने प्रभाव में करने की तमाम शिकायतों और बवाल को भी पुलिस-प्रशासन को झेलना पड़ता। इसके साथ ही मतगणना की भी बड़ी व्यवस्था करनी पड़ती।
सोशल मीडिया पर वाजपेयी की फजीहत
एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की सोशल मीडिया पर खासी फजीहत हो रही है। इस मामले में उन पर साठगांठ ही नहीं, पार्टी को रसातल में पहुंचाने के आरोप भी लग रहे हैं।
यही वजह है कि लगातार यह मामला तूल पकड़ रहा है। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि शीघ्र ही कुछ बड़ी कार्रवाई भाजपा हाईकमान स्तर से देखने को मिल जाए।
अपनी सोच और नीति के कारण हारी भाजपा : शाहिद मंजूर
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर ने कहा कि भाजपा एमएलसी चुनाव में मेरठ सीट अपनी सोच और नीति के कारण हारी है। कलक्ट्रेट पर नाम वापसी के दौरान मंजूर ने कहा कि सपा के कार्यकर्ता को तोड़कर सपा से ही भिड़ाने का प्रयास किया गया।
वीरेंद्र यादव को तोड़कर भाजपा ने भारी भूल की। यदि वह इस सीट पर अपने मूल कैडर प्रत्याशी को चुनाव लड़ाती तो इतनी दुर्गति न होती। भाजपा की हालत का पता इसी बात से चलता है कि उनके पास चुनाव के लिए प्रत्याशी तक नहीं था।
पंचायत चुनाव रहे हों या एमएलसी चुनाव, भाजपा की हार उसकी गलत सोच और नीति के कारण हुई है। सपा का विजयी अभियान विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की हार : सुरेंद्र नागर
गौतमबुद्धनगर के पूर्व सांसद और सपा के चुनाव प्रभारी सुरेंद्र नागर ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अपने गृहजनपद में ही न तो जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जितवा पाए और न ही एमएलसी के लिए पार्टी प्रत्याशी उतार पाए। पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की नीतियों के कारण लगातार विकास हुआ है और पश्चिम के विकास के लिए आगे भी कार्य जारी रहेगा।
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राकेश यादव को मजबूती देने के लिए ही नामांकन के दिन प्रो. रामगोपाल यादव खुद मेरठ पहुंचे थे। चुनाव प्रभारी सुरेंद्र नागर के साथ-साथ स्थानीय बड़े नेता और सपा जिलाध्यक्ष इसीलिए इस टेस्ट में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे थे।
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दरअसल पार्टी में स्थानीय संगठन और चुनाव प्रभारी पर यह जिम्मेदारी थी कि वे बेहतर चुनाव प्रबंधन से पार्टी के आला नेताओं तक संदेश पहुंचाएं। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में चुनाव प्रभारी रहे सुरेंद्र नागर ने इस बार भी शुरू से ही कमान संभाले रखी।
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खास बात यह रही कि जहां जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में नागर ने पर्दे के सामने आकर रणनीति बनाई थी, तो इस बार स्थानीय नेताओं और संगठन को आगे रखा। इसी रणनीति का हिस्सा यह रहा कि नागर नाम वापसी कराने जाते समय नहीं दिखाई दिए। शाम को प्रमाण पत्र लेने के दौरान वह राकेश यादव के साथ अवश्य दिखे।
फलावदा में हुई मुख्यमंत्री की रैली के दौरान सुरेंद्र नागर को लेकर मुख्यमंत्री काफी खुश दिखे थे। दो चुनावी सफलताओं के बाद नागर भी खुद को पश्चिम के एक बड़े नेता के तौर पर स्थापित करने में लगे हुए हैं। गौतमबुद्धनगर के सांसद रहे सुरेंद्र नागर पिछले कुछ समय से लगातार मेरठ और आसपास के जिलों में सक्रिय हैं।
वहीं पार्टी जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह ने प्रत्याशियों की नाम वापसी में अहम भूमिका निभाई। जयवीर ने स्थानीय स्तर पर पर्चा भरने वाले प्रत्याशियों से संपर्क साधने और उन्हें अपने पाले में लाने के लिए लगातार रणनीति बनाई।
दरअसल जिलाध्यक्ष बनने के बाद कई बार जयवीर सिंह की कुर्सी पर संकट आया, लेकिन हाईकमान तक मजबूत संदेश पहुंचाने में इस बार जयवीर ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसी प्रयास में विधायक गुलाम मोहम्मद, प्रभुदयाल वाल्मीकि, एमएलसी डा. सरोजिनी अग्रवाल, अतुल प्रधान सहित दूसरे नेता भी लगे रहे।
प्रोफेसर लेते रहे पल-पल की जानकारी
जिस समय नामांकन पत्रों की वापसी का क्रम चल रहा था। उस समय प्रो. रामगोपाल यादव लगातार अपडेट लेते रहे। स्थानीय नेताओं के पास रामगोपाल का फोन आता रहा और कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर से उनकी बात होती रही। जब अनिता पहाड़पुरिया का नामांकन वापस हो गया, तो तुरंत रामगोपाल को बता दिया गया कि काम पूरा हो गया है।
प्रशासन को राहत
राकेश यादव के निर्विरोध निर्वाचन से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। उसके दो मकसद एक साथ हल हो गये। निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही आगे की पूरी चुनावी प्रक्रिया बंद हो गयी है। यदि निर्विरोध निर्वाचन नहीं होता तो निर्वाचन अधिकारी को चारों जनपदों में मतदान केंद्रों की व्यवस्था के साथ ही मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती।
इस दौरान वोटरों को उठाने और अपने प्रभाव में करने की तमाम शिकायतों और बवाल को भी पुलिस-प्रशासन को झेलना पड़ता। इसके साथ ही मतगणना की भी बड़ी व्यवस्था करनी पड़ती।
सोशल मीडिया पर वाजपेयी की फजीहत
एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की सोशल मीडिया पर खासी फजीहत हो रही है। इस मामले में उन पर साठगांठ ही नहीं, पार्टी को रसातल में पहुंचाने के आरोप भी लग रहे हैं।
यही वजह है कि लगातार यह मामला तूल पकड़ रहा है। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि शीघ्र ही कुछ बड़ी कार्रवाई भाजपा हाईकमान स्तर से देखने को मिल जाए।
अपनी सोच और नीति के कारण हारी भाजपा : शाहिद मंजूर
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर ने कहा कि भाजपा एमएलसी चुनाव में मेरठ सीट अपनी सोच और नीति के कारण हारी है। कलक्ट्रेट पर नाम वापसी के दौरान मंजूर ने कहा कि सपा के कार्यकर्ता को तोड़कर सपा से ही भिड़ाने का प्रयास किया गया।
वीरेंद्र यादव को तोड़कर भाजपा ने भारी भूल की। यदि वह इस सीट पर अपने मूल कैडर प्रत्याशी को चुनाव लड़ाती तो इतनी दुर्गति न होती। भाजपा की हालत का पता इसी बात से चलता है कि उनके पास चुनाव के लिए प्रत्याशी तक नहीं था।
पंचायत चुनाव रहे हों या एमएलसी चुनाव, भाजपा की हार उसकी गलत सोच और नीति के कारण हुई है। सपा का विजयी अभियान विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की हार : सुरेंद्र नागर
गौतमबुद्धनगर के पूर्व सांसद और सपा के चुनाव प्रभारी सुरेंद्र नागर ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अपने गृहजनपद में ही न तो जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जितवा पाए और न ही एमएलसी के लिए पार्टी प्रत्याशी उतार पाए। पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की नीतियों के कारण लगातार विकास हुआ है और पश्चिम के विकास के लिए आगे भी कार्य जारी रहेगा।