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पार्षद बैठकों से दूर, जनता के सपने चूर
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sun, 27 Mar 2016 12:45 AM IST
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नगर निगम ऑफिस
- फोटो : फाइल फोटो
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नगर निगम के पार्षद अपने क्षेत्र के विकास के लिये कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा निगम की बैठकों में उनकी उपस्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। कई पार्षद तो ऐसे हैं, जो वार्डों के विकास का खाका तैयार करने के लिये होने वाली बोर्ड बैठकों में भी नहीं पहुंचते। नतीजतन, उनके क्षेत्र की समस्याओं और विकास के मुद्दों की जोरदार पैरवी नहीं हो पाती। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। बैठकों से दूरी बनाये रखने वाले ये पार्षद अपने निजी हितों के लिये निगम में हाजिरी लगाना नहीं भूलते।
नगर निगम में 80 निर्वाचित और नौ मनोनीत पार्षद हैं। जनता ने इन्हें विकास के लिए चुना है। लेकिन, अधिकांश पार्षद जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। चुनाव के दौरान अपने वादों से जीत दर्ज करने वाले इन पार्षदों को अब जन समस्याओं और जनता के ही दुख-दर्द से कोई वास्ता नहीं नजर आ रहा है। नगर निगम में इस बार कई पार्षद ऐसे हैं, जो बैठकों में शामिल होने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
सदन की बैठक में ही प्रतिवर्ष तीन सौ से चार सौ करोड़ रुपये की योजनाएं तैयार की जाती हैं। सदन से पार्षदों के अनुपस्थित रहने के कारण उनके क्षेत्रों की समस्याओं से निगम के अधिकारी अवगत नहीं हो पाते हैं। इस कारण कई बार बजट होने के बाद भी क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो पाते। हर बार बोर्ड बैठक में किसी न किसी कारण से 15 से 20 पार्षद अनुपस्थित रहते हैं। इनमें महिला और पुरुष दोनों ही पार्षद शामिल हैं। पार्षदों को 1500 रुपये मासिक भत्ते के रूप में मिलते हैं। इसे लेने के लिये वे नगर निगम पहुंचना नहीं भूलते।
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ये हैं अधिकतर अनुपस्थित रहने वाले पार्षद
ओमवीरी (वार्ड-4), प्रकाशी (वार्ड-7), राजेंद्र (वार्ड-13), ओमवती (वार्ड-16), सुशील सैनी (वार्ड-23), शायदा (वार्ड-37), ताहिरा (वार्ड-58), रुकसाना (वार्ड-67), नजमा (वार्ड-68), वहीदन (वार्ड-71), शबनम (वार्ड-73), रईसा (वार्ड-74), कमरुद्दीन (वार्ड-75) और आदिल अंसारी (वार्ड-80) शामिल हैं। इनके अलावा मनोनीत पार्षदों में आस मोहम्मद, मुस्तकीम मलिक, ज्योत्सना गुर्जर और सुनील कुमार शामिल हैं।
तीन अनुपस्थिति पर जा सकती है सदस्यता
नगर निगम एक्ट के मुताबिक, यदि कोई पार्षद लगातार तीन बोर्ड बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसकी सदस्यता स्वयं ही समाप्त मानी जाएगी। कई बार बोर्ड में इस मुद्दे पर चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन अनुपस्थित रहने वाले पार्षदों की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया है।
साढ़े तीन साल में 7-8 बार बोर्ड की बैठक में पहुंची हूं। वार्ड का विकास लगातार हो रहा है। हमारे शौहर निगम में पूरा समय देते हैं। सुबह से ही घर पर लोगों की समस्याएं सुनती हूं। अधिक से अधिक समस्याओं का समाधान कराया जाता है।- शबनम, पार्षद (वार्ड-73)
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- जो पार्षद सदन में नहीं जाते हैं, वह जनता के साथ छल कर रहे हैं। बगैर सदन में जाए क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। सदन की बैठक में उपस्थित रहने वाले पार्षदों के क्षेत्र में विकास अलग ही दिखता है। -दीवानजी शरीफ, पार्षद
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शासनादेश लागू होने के बाद से पार्षदों को उनका मासिक भत्ता 1500 रुपये दिया जा रहा है। सूची मिलते ही भत्ता जारी कर दिया जाता है। सभी का भत्ता दिया जा चुका है। -मोइनुद्दीन, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, नगर निगम
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नगर निगम में 80 निर्वाचित और नौ मनोनीत पार्षद हैं। जनता ने इन्हें विकास के लिए चुना है। लेकिन, अधिकांश पार्षद जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। चुनाव के दौरान अपने वादों से जीत दर्ज करने वाले इन पार्षदों को अब जन समस्याओं और जनता के ही दुख-दर्द से कोई वास्ता नहीं नजर आ रहा है। नगर निगम में इस बार कई पार्षद ऐसे हैं, जो बैठकों में शामिल होने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
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सदन की बैठक में ही प्रतिवर्ष तीन सौ से चार सौ करोड़ रुपये की योजनाएं तैयार की जाती हैं। सदन से पार्षदों के अनुपस्थित रहने के कारण उनके क्षेत्रों की समस्याओं से निगम के अधिकारी अवगत नहीं हो पाते हैं। इस कारण कई बार बजट होने के बाद भी क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो पाते। हर बार बोर्ड बैठक में किसी न किसी कारण से 15 से 20 पार्षद अनुपस्थित रहते हैं। इनमें महिला और पुरुष दोनों ही पार्षद शामिल हैं। पार्षदों को 1500 रुपये मासिक भत्ते के रूप में मिलते हैं। इसे लेने के लिये वे नगर निगम पहुंचना नहीं भूलते।
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ये हैं अधिकतर अनुपस्थित रहने वाले पार्षद
ओमवीरी (वार्ड-4), प्रकाशी (वार्ड-7), राजेंद्र (वार्ड-13), ओमवती (वार्ड-16), सुशील सैनी (वार्ड-23), शायदा (वार्ड-37), ताहिरा (वार्ड-58), रुकसाना (वार्ड-67), नजमा (वार्ड-68), वहीदन (वार्ड-71), शबनम (वार्ड-73), रईसा (वार्ड-74), कमरुद्दीन (वार्ड-75) और आदिल अंसारी (वार्ड-80) शामिल हैं। इनके अलावा मनोनीत पार्षदों में आस मोहम्मद, मुस्तकीम मलिक, ज्योत्सना गुर्जर और सुनील कुमार शामिल हैं।
तीन अनुपस्थिति पर जा सकती है सदस्यता
नगर निगम एक्ट के मुताबिक, यदि कोई पार्षद लगातार तीन बोर्ड बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसकी सदस्यता स्वयं ही समाप्त मानी जाएगी। कई बार बोर्ड में इस मुद्दे पर चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन अनुपस्थित रहने वाले पार्षदों की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया है।
साढ़े तीन साल में 7-8 बार बोर्ड की बैठक में पहुंची हूं। वार्ड का विकास लगातार हो रहा है। हमारे शौहर निगम में पूरा समय देते हैं। सुबह से ही घर पर लोगों की समस्याएं सुनती हूं। अधिक से अधिक समस्याओं का समाधान कराया जाता है।- शबनम, पार्षद (वार्ड-73)
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- जो पार्षद सदन में नहीं जाते हैं, वह जनता के साथ छल कर रहे हैं। बगैर सदन में जाए क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। सदन की बैठक में उपस्थित रहने वाले पार्षदों के क्षेत्र में विकास अलग ही दिखता है। -दीवानजी शरीफ, पार्षद
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शासनादेश लागू होने के बाद से पार्षदों को उनका मासिक भत्ता 1500 रुपये दिया जा रहा है। सूची मिलते ही भत्ता जारी कर दिया जाता है। सभी का भत्ता दिया जा चुका है। -मोइनुद्दीन, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, नगर निगम