मेरठ में चल रहा मीट का अवैध कारोबार, चीन से खाड़ी देशों तक एक्सपोर्ट, जल्द खुलेगा चिट्ठा
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मेरठ में सालाना एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के मीट एक्सपोर्ट का कारोबार फल-फूल रहा है। लेकिन बड़ा खेल यह है कि यहां की 18 मीट फैक्ट्रियों में से मात्र तीन ही वैध हैं। बाकी किसी फैक्ट्री का नक्शा एमडीए से मंजूर नहीं है। नई सरकार बनते ही ताबड़तोड़ ढंग से एक ही दिन में नौ फैक्ट्रियों सील की गई थीं। मगर उसके बाद इनकी कोई निगरानी नहीं हुई। अब फिर से एमडीए इनकी जांच कर कार्रवाई की बात कह रहा है।
चीन से लेकर खाड़ी देशों तक में मेरठ से मीट एक्सपोर्ट किया जा रहा है। यह यहां का तगड़ा कारोबार है। जैसे ही उत्तर प्रदेश में नई सरकार बनी थी, तत्काल मेरठ में मीट प्लांटों पर जबरदस्त एक्शन हुआ था। 22 मार्च 2017 को एडीएम, एसपी सिटी, एसपी देहात के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एमडीए, अग्निशमन, पशुपालन विभाग, खाद्य सुरक्षा, पावर कारपोरेशन के अधिकारियों के अलावा भारी पुलिस बल तथा एमडीए अधिकारियों ने मीट प्लांटों पर छापे मारे थे। छह घंटे की सघन चेकिंग के दौरान टीमों ने नौ बूचडखानों को सील किया गया था। इन सभी प्लांटों को संचालित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं मिले सके। अहम बात यह रही कि किसी भी फैक्ट्री का मानचित्र स्वीकृत ही नहीं था। ऐसे में मेरठ विकास प्राधिकरण अधिकारियों ने इन सभी पर सील लगा दी थी। सभी प्लांटों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हो गयी थी।
इतने दिन बाद भी तीन के ही नक्शे स्वीकृत
मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा जारी किए मानचित्रों के आधार पर पता चला है मेरठ में चल रहीं तीन फैक्ट्री अलसाकिब, अल यासिर और अल अक्शा ही ऐसी हैं जिनका मानचित्र स्वीकृत है। अल फहीम का नक्शा समायोजन में लगा है और मामला विचाराधीन चल रहा है। यहां लैंड यूज का पेंच अटका है। हालांकि इनमें भी केवल दो ही फैक्ट्रियों ऐसी हैं जिनके पास एपीडा और अन्य विभागों की एनओसी है।
कई फैक्ट्रियों में चल रहा कटान
इनमें से कई फैक्ट्रियों ऐसी हैं जो कागजों में तो सील हैं। लेकिन यहां कटान चल रहा है। इसके अलावा जो अभियान में सील ही नहीं हो पाई थी उनमें भी कटान हो रहा है। अहम बात यह है कि बड़ी-बड़ी फैक्ट्री बनीं। लेकिन एमडीए अधिकारियों ने इस तरफ देखा ही नहीं। पूरे निर्माण खड़े हो गए। सारी फैक्ट्रियों हापुड़ रोड अलीपुर क्षेत्र में हैं।
एक के नाम पर कई-कई का खेल
अलयासिर एक्सपोर्ट एमडीए अप्रूव्ड थी। लेकिन जब वहां तीन मजदूरों की हादसे में मौत हुई तो पता चला कि जिस भाग में हादसा हुआ है वह भाग एमडीए से अप्रूव्ड नहीं है। चूंकि वह बाद में बना है। प्लांट संचालक उसे मुख्य अल यासिर का ही रेडरिंग प्लांट बता रहे थे। तत्काल इस भाग को सील कर दिया गया था।
मुख्य रूप से ये खामियां हैं इन फैक्ट्रियों में
- एमडीए से नक्शा स्वीकृत नहीं है
- पशुपालन विभाग की एनओसी नहीं थी
- रेंडरिंग प्लांट पर किसी तरह का कोई लाइसेंस नहीं
- कच्चा माल लाने का कोई एग्रीमेंट नहीं
- बने माल पर किसी तरह की कोई मुहर नहीं
- प्रदूषण विभाग की एनओसी नहीं
- बिजली कनेक्शन के कागज नहीं
इन फैक्ट्रियों पर सवाल
1. अल रहीम फ्रोजन फूड्स
2. अल सावेज फ्रोज फूड्स
3. कोको टोको इंडिया प्रा लि.
4. अल हबीब फ्रोजन फूड्स
5. डिप्लोमेट इंडिया रेंडरिंग प्लांट
6. फीड पैक फूड रेंडरिंग प्लांट
7. अल जुनैद फ्रोजन फूड्स
8. अल कैफ इंडस्ट्री
9. अल लिमराह
10. एमआईक्यू फ्रोजन
11. तान्या मार्केटिंग
12. अल असमद प्रा.लि.
13. अल अय्यूब एक्सपोर्ट
14. अल अखलाक एक्सपोर्ट
15. अल यासिर रेंडरिंग एक्सटेंशन
वास्तविक स्थिति की जांच कराएंगे
बताया जा रहा है कि कुछ फैक्ट्रियां सील ही हैं और काम बंद हैं। लेकिन वास्तव में स्थिति क्या है इसकी जांच कराई जा रही है। एक-एक फैक्ट्री में जाकर जोनल अधिकारी जांच करेंगे। जिनका मानचित्र नहीं है उन पर एक्शन होगा। -साहब सिंह, वीसी एमडीए
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