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फंसी 300 करोड़ की जमीन बनेगी संजीवनी
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 13 Feb 2016 01:24 AM IST
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मेरठ विकास प्राधिकरण की लगभग तीन लाख वर्ग मीटर जमीन ऐसी सामने आई है, जो उसके हाथ में आने पर शहर की सूरत बदल जाएगी। तीन योजनाओं में एमडीए ने चिन्हीकरण कर लिया है। लगभग चार लाख वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे हैं। किसानों को प्रतिकर के बदले लगभग एक लाख वर्ग मीटर जमीन पर भूखंड काटे जाएंगे। बाकी बची लगभग तीन लाख वर्ग मीटर जमीन पर एमडीए मॉडर्न टाउनशिप विकसित करने का प्लान बना रहा है।
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आवासीय योजना सैनिक विहार, शताब्दीनगर, लोहियानगर, डिफेंस एन्क्लेव, वेदव्यासपुरी में विभिन्न गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई थी। एमडीए ने यहां कब्जा लेने की कोशिश की, तो पाया कि यहां अवैध निर्माण कर रखा है। 2004 में ऐसे कब्जेधारकों की सूची बननी शुरू हुई थी, पर बीच में इसे रोक दिया गया।
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अब नई आवास नीति के तहत योजनाओं में जमीन देखने के लिए लेखपालों को लगाकर इस सूची को दुरुस्त किया गया, तो यह देखकर एमडीए अधिकारी अचंभित रह गए कि तीन योजनाओं में 68 हेक्टेयर जमीन यानी छह लाख 80 हजार वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे हैं। यहां पक्के मकान, धार्मिक स्थल, संस्थाएं, व्यवसायिक भवन आदि खड़े कर लिए हैं। यदि दस हजार रुपये का भी रेट लगाया जाए, तो यह जमीन 680 करोड़ रुपये की है।
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तीन योजनाओं का गणित निकाला
लोहियानगर, गंगानगर और वेदव्यासपुरी के किसानों को अब प्रतिकर के बदले भूखंडों का आवंटन होना है। ऐसे में फिर से रिकार्ड दुरुस्त किया गया। लगभग 35 हजार वर्ग मीटर यानी साढे़ तीन हेक्टेयर जमीन गंगानगर के किसानों को बतौर भूखंड देनी होगी। लोहिया नगर में कब्जे 15 हेक्टेयर जमीन पर हैं, जबकि देनी होगी पांच हेक्टेयर जमीन। वेदव्यासपुरी में कब्जे 14 हेक्टेयर पर हैं और देनी होगी दो हेक्टेयर जमीन। कुल मिलाकर लगभग एक लाख वर्ग मीटर जमीन का वितरण होगा और बचेगी लगभग तीस हेक्टेयर जमीन। जिसकी कीमत करीब 300 करोड़ आंकी जा रही है।
300 करोड़ की जमीन बदलेगी सूरत
यदि दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का औसत रेट लगाया जाए तो बाकी बची लगभग तीस हेक्टेयर यानी तीन लाख वर्ग मीटर जमीन के दाम 300 करोड़ होंगे। ऐसे में एमडीए की निगाह इस पर है। यह तो केवल इन तीन योजनाओं का गणित है। बाकी योजनाओं मेें भी काफी जमीन ऐसी है, जिस पर अवैध कब्जे हैं।
यह तय माना जा रहा है कि एमडीए अब कब्जा मुक्त कराकर अपनी जमीन पर विकास करेगा। इन तीनों योजनाओं में ही टाउनशिप डेवलप करने का प्लान है। अवैध कब्जों के अलावा खाली पड़ी एमडीए की अपनी जमीन भी है। वहां निर्माण होगा और भूखंड तथा आवासीय दोनों योजनाएं लांच की जाएगी।