लोकसभा चुनाव 2019: सपा के बाद बसपा भी छोड़ सकती है रालोद के लिए एक सीट
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लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में बने गठबंधन की मजबूती के लिए बसपा भी सपा की तरह रालोद के लिए एक सीट छोड़ सकती है। बसपा की इस पहल से न केवल रालोद के बेस वोटरों में सकारात्मक संदेश जाएगा, बल्कि गठबंधन की विश्वसनीयता का भी आधार बनेगा। बताया जा रहा है कि बसपा रणनीतिकारों ने पार्टी सुप्रीमो तक क्षेत्र से उठ रही मांग का फीडबैक पहुंचा दिया है।
सपा और बसपा ने लोकसभा चुनाव के लिए गत 12 जनवरी को साझा प्रेस कांफ्रेंस कर गठबंधन की घोषणा की थी। इसमें सपा और बसपा ने 80 सीटों में से 38-38 सीटों पर लड़ने के अलावा दो सीटें अन्य दलों को देने और दो सीटों रायबरेली, अमेठी पर प्रत्याशी नहीं उतारने की बात कही थी। प्रेस कांफ्रेंस में रालोद का नाम नहीं लेने पर गठबंधन में उसके रहने या नहीं रहने के सवाल उठने लगे थे। लेकिन बाद में बताया गया कि छोड़ी गई दो सीटें रालोद की है, जबकि रालोद ने पांच सीटों की मांग कर गठबंधन में पेंच फंसा रखा है।
पार्टी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और सपा मुखिया अखिलेश यादव के बीच हुई बातचीत के बाद सपा अपने कोटे की मथुरा सीट देने को राजी हो गई है, लेकिन तीन सीट बागपत, मथुरा और मुजफ्फरनगर के साथ ही रालोद हाथरस और बुलंदशहर रिजर्व सीट में से एक और सीट की मांग रहा है। इस पर सपा और बसपा की चुप्पी से रालोद के बेस वोटरों में नाराजगी देखी जा रही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि इसे समय रहते ठीक नहीं किया गया तो यह नाराजगी उन सीटों पर भारी पड़ सकती है जिन सीटों पर रालोद प्रत्याशी नहीं होगा। ऐसी स्थिति में रालोद का बेस वोटर बाकी सीटों पर स्वतंत्र रूप से किसी भी दल को वोट कर सकता है।
बताया जा रहा है कि जमीनी हकीकत से मिल रहे इन रुझानों को बसपा रणनीतिकारों ने गंभीरता से लिया है और इस फीडबैक को पार्टी सुप्रीमो तक पहुंचा दिया है। सूत्रों का कहना है कि गठबंधन में जान डालने और इसकी विश्वसनीयता कायम करने के लिए बसपा भी अपने कोटे की एक सीट रालोद के लिए छोड़ सकती है। पांच सीटों की मांग कर रहे रलोद को चार सीट देकर मनाया जा सकता है।
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