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यूपी: मानकों के अनुरूप तैयार दवा ही आप खा रहे हैं, इसकी कोई गारंटी नहीं

Tue, 27 Nov 2018 07:17 PM IST
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 27 Nov 2018 07:17 PM IST
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Meerut, Drug department in UP is under pressure
फाइल फोटो

आप मानकों के अनुरूप तैयार की गई दवाइयां खा रहे हैं या नहीं, यह पता नहीं चल पा रहा है। औषधि विभाग के साथ ही लखनऊ की केंद्रीय प्रयोगशाला भी दबाव में है। यहां एफएसडीए की औषधि प्रशासन विंग जिन दवाओं के सैंपल ले रही है, उनकी जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार माह तक लग रहे हैं। पिछले तीन माह में यहां से दवाओं के करीब 200 सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे गए थे। लेकिन इनमें से एक भी सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है।

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दवा की असलियत जानने के लिए ऐसे तो कोई व्यवस्था नहीं है। ग्राहकों को दवा की गुणवत्ता की जांच करनी हो तो इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसकी वजह यह भी है कि यहां जांच के दौरान दवाओं के जो सैंपल लिए जाते हैं वह सेंट्रल लैब में भेजे जाते हैं, जहां दवा की जांच के बाद रिपोर्ट आती है। रिपोर्ट में देरी से ऐसे में दवा की गुणवत्ता की जांच जब तक की जाती है, तब तक बाजार में नया सैंपल आ जाता है। ऐसे में शहर के लोगों को कैसी दवाई मिल रही है, इसकी जांच नियमित और सही तरीके से नहीं हो पा रही है। 
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इतना ही नहीं, ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी होने की वजह से सभी दवा दुकानों की जांच नियमित रूप से संभव नहीं हो पाती है। जब कभी गलत या खराब दवा की सूचना मिलती है, तभी जांच की जाती है। दवा की दुकानों से सैंपल लेने के बाद आने वाली रिपोर्ट की जानकारी भी किसी को नहीं दी जाती है, ऐसे में फायदा दवा विक्रेता उठा रहे हैं और खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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मानकों से 19 ड्रग्स इंस्पेक्टरों हैं कम
विभाग का भी जैसे-तैसे कार्य चल रहा है, क्योंकि शहर में करीब चार हजार मेडिकल स्टोर हैं। मानकों के अनुसार 200 मेडिकल स्टोरों पर एक ड्रग्स इंस्पेक्टर होना चाहिए। लेकिन विभाग में सिर्फ एक ही इंस्पेक्टर है। लिहाजा 19 ड्रग्स इंस्पेक्टर कम हैं। तैनाती की भी बात करें तो दो ड्रग्स इंस्पेक्टरों की यहां तैनाती है। लेकिन इनमें से भी एक पद खाली चल रहा है। इससे दवाइयों की निगरानी नहीं हो रही है और लोगों को जैसी मिल रही है वैसी ही दवाइयां खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

10 लाइसेंस हो चुके सस्पेंड
औषधि प्रशासन के पास हर माह 30 से ज्यादा शिकायतें दवाओं की आती हैं, जिनमें से अधिकांश का निस्तारण भी नहीं हो पाता है। हालांकि तीन माह से पहले लिए गए सैंपलों की जो रिपोर्ट आई थी, उनके आधार पर 10 मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस भी सस्पेंड किए जा चुके हैं। इससे साफ कहा जा सकता है कि काफी दवाएं हैं, जो मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं।

औषधि विभाग का ढांचा है कमजोर
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण राज्य में औषधि विभाग का ढांचा कमजोर होना है। ड्रग इंस्पेक्टर के अलावा इससे ऊपर के पद भी बढ़ाए जाने हैं। लेकिन इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर का स्वास्थ्य विभाग में महत्वपूर्ण काम होता है। दवाओं की जानकारी रखने के साथ ही उनकी चेकिंग, ड्रग लाइसेंस बनाने, पुराने लाइसेंस को रिन्यू करने व सत्यापन आदि का काम ड्रग इंस्पेक्टर के कंधों पर रहता है। यह सारे कार्य प्रभावित होते हैं। दवा विक्रेता अपने लाइसेंस नवीनीकरण, सत्यापन आदि को लेकर भी परेशान रहते हैं। इन पदों को भरने के लिए कई बार पत्र लिखा गया। लेकिन अभी तक पोस्ट को भरने के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

लैब पर है दबाव
वेस्ट यूपी से जाने वाले दवाओं के सैंपलों की जांच लखनऊ की प्रयोगशाला में होती है। सैंपलों के दबाव के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। यही वजह है कि पिछले तीन माह से किसी दवा के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। -पवन शाक्य, ड्रग्स इंस्पेक्टर

इन दवाओं के लिए थे सैंपल
बुखार, खांसी, जुकाम, स्किन, कफ सीरप, पेट दर्द, एंटीबायोटिक आदि इन दवाओं में यह जांच की जाती है कि दवा के बारे में रेपर पर जो लिखा है, वह मानकों के अनुरूप है या नहीं। फिर दवा में संबंधित साल्ट की मात्रा ज्यादा या कम तो नहीं है। मसलन, बुखार में इस्तेमाल की जाने वाली दवा में पैरासिटामॉल की मात्रा 500 एमजी लिखी है, जांच में पैरासिटामॉल का कम या ज्यादा पाया जाना आदि। इसके अलावा यह भी जांचा जाता है कि ऐसा तो नहीं है कि जिस कंपनी की दवा है उसके पास इस दवा को बनाने का लाइसेंस है या नहीं।

हो रहा लैब का निर्माण, दबाव होगा कम
औषधि विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि एक और ड्रग्स इंस्पेक्टर की तैनाती होनी है। इस संबंध में शासन से पत्राचार चल रहा है। दवाओं के सैंपल लगातार लिए जा रहे हैं। केंद्रीय लैब पर दबाव होने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। मेडिकल कॉलेज मेरठ में भी लैब बनाने का कार्य चल रहा है। यह लैब तैयार होने पर जल्द रिपोर्ट मिलेगी।

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