बीमारियों पर ये कैसा प्रहार, वजह पता नहीं और स्टडी रिपोर्ट तैयार, अब शासन लेगा निर्णय
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बीमारियों की रोकथाम कैसे होगी, जब वजह जाने बिना बीमारियों पर प्रहार की तैयारी है। चिकित्सा शिविर में गंभीर रोगों के मरीज मिले। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली। लेकिन बीमारियां फैलने की वजह गायब है।
हिंडन और काली नदी के आसपास के लोगों में खराब पानी से बीमारियों के खतरे के मद्देनजर एनजीटी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविर लगाए थे। चार दिन में ही 1481 मरीजों में 16 कैंसर, 130 डायरिया, सात पीलिया, 430 चर्म रोग और 256 श्वास रोग के मरीज थे। 186 बुखार और 456 अन्य बीमारियों के थे। जल निगम को जानना था कि इन क्षेत्रों के पानी की क्या स्थिति है, ताकि साफ हो कि ये बीमारियां यहां के पानी की वजह से हुई हैं या अन्य कारण हैं। मगर पानी की रिपोर्ट कराई ही नहीं गई।
इन गांवों में लगे शिविर
बपारसी, पांचली बुजुर्ग, पिठलोकर, कालंदी, कलीना, रजापुरा, नारंगपुर, कैथवाड़ी, जिटौला, किनौनी, रसूलपुर, उकसिया, कल्याणपुर और जखैड़ा। जानी, रोहटा और सरूरपुर सीएचसी के तहत यह स्वास्थ्य शिविर 27 मई से 30 जून तक लगाए गए थे।
शासन लेगा निर्णय
एसीएमओ डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को यह कह दिया कि उनके यहां लैब नहीं है। लैब गाजियाबाद में है, लिहाजा वहां का जल निगम पानी के सैंपल लेकर जांच कराए। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने बिना वजह जाने रिपोर्ट तैयार कर दी है। अब इस पर शासन निर्णय लेगा। बता दें कि बिजौली, बहरानपुर, सेतकुआं गांव में पांच साल में कैंसर से 28 लोगों की मौत हो चुकी है।
हैवी मैटल्स की रिपोर्ट नहीं मिली
एसीएमओ ने रिपोर्ट तैयार की। इन बीमारियों का कारण जल जनित हो सकता है या नहीं, यह जानना था। लेकिन जल में उपलब्ध हैवी मैटल्स की रिपोर्ट न मिलने के कारण यह राय देना संभव नहीं है। यह शासन को भेजा जा रहा है। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
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