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जांच न नोटिस, 36 ठेकेदार ब्लैक लिस्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Mon, 01 Feb 2016 02:13 AM IST
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जिला पंचायत के नवनिर्वाचित बोर्ड के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही 36 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। खास बात यह है कि ठेकेदारों पर इस संबंध में कोई नोटिस या जांच के बिना ही सीधे कार्रवाई कर दी गई।
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बोर्ड ने 14 जनवरी को शपथ ली थी। इसके ठीक दो दिन बाद ही कार्यवाहक अपर मुख्य अधिकारी प्रदीप कुमार ने इन ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट कर दिया। आरोप है कि 13वें वित्त आयोग के 118 कार्य तय समय में पूरे नहीं हुए। इसके चलते 4.5 करोड़ रुपये की धनराशि रुकी है। इन ठेकेदारों से एएमए ने बात करने से ही इंकार कर दिया।
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ठेकेदारों का कहना है कि अधिकांश के काम या तो पूरे होने वाले हैं या आधे से अधिक हो चुके हैं। इसके अलावा ठेकेदार की प्रतिभूति के रूप में धनराशि भी जिला पंचायत में बंधक है। अब ऐसे में जहां पूरे हो चुके काम का भुगतान फंस गया है, वहीं बंधक धनराशि भी अवमुक्त होना मुश्किल नजर आ रहा है।
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हवाई कार्रवाई
ठेकेदारों का आरोप है कि नियमानुसार उन्हें पहले अधूरे या काम में देरी को लेकर नोटिस जारी होना था। इसके बाद आगे की कार्रवाई होती। यदि किसी की गुणवत्ता खराब है तो उसकी किसी तकनीकी समिति से जांच होनी चाहिए थी, लेकिन वह भी नहीं हुई।
काली सूची के पीछे सियासी चर्चा
जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान पर ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट कराने का आरोप लग रहा है। वजह यह कि एक तरफ जहां ब्लैक लिस्ट जारी हुई, वहीं ठेकेदारों से नये पंजीकरण के आवेदन मांग लिए गए। ब्लैक लिस्ट ये ठेकेदार इसमें आवेदन कर नहीं सकते हैं। ऐसे में अपने चहेते ठेकेदारों से काम कराने के पीछे यह कार्रवाई होना बताया जा रहा है।