दरोगा पिटाई प्रकरण में होटल मालिक के साले और अन्य कर्मचारी अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े। पुलिस ने होटल में दरोगा की पिटाई करने वाले पार्षद के अलावा उसके सालों व उसके कर्मचारियों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। भाजपा पार्षद मनीष पंवार को जेल भेजने के दौरान जिन लोगों ने हंगामा किया। पुलिस की जीप रोकने का प्रयास किया। पुलिस के साथ हाथापाई व धक्कामुक्की की थी और पथराव किया, उन सब पर पुलिस की पैनी नजर है।
दरोगा पिटाई मामला: अभी भी अनसुलझे हैं ये 6 सवाल, भाजपा पार्षद के होटल पर जड़ा ताला
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वहीं पार्षद के जेल जाने के बाद कंकरखेड़ा की सियासी गलियों में सन्नाटा पसरा है। हंगामा करने वाले अधिकतर लोग फरार हैं। वे नजर नहीं आ रहे। हाईवे पर पार्षद के होटल ब्लैक पेर पर भी सन्नाटा पसरा है। भाजपा पार्षद के होटल पर ताला लग गया है। क्योंकि सोमवार को जब पुलिस होटल में जांच करने पहुंची तो वहां कोई भी कर्मचारी नहीं था और ताला लगा था। पुलिस ने ताला खुलवाकर घटनास्थल की जांच की। अभी भी अनसुलझे ये 6 सवाल:-
अभी भी अनसुलझे ये 6 सवाल-
- ऐसे हालात क्यों पैदा हुए कि होटल में परिस्थितियां नियंत्रण के बाहर हो गईं और दरोगा की पिटाई कर दी गई?
- क्या विवेचक को यह अधिकार है कि किसी भी वादी के साथ वह व्यक्तिगत रूप से किसी होटल में जाकर बात करे वह भी महिला से?
- सूर्यास्त के बाद क्या किसी महिला से विवेचना संबंधी बातचीत थी या आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी?
- परिस्थिति चाहे कोई भी हो, गलती चाहे किसी की भी हो, पर क्या किसी महिला के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?
- जब खुद होटल मालिक ने पुलिस को सूचना देकर बुलाया तो यह डकैती कैसे हो गई?
- आखिर कैसे निकल गई पिस्टल, वीडियो में तीनों ही पिस्टल थामे हैं?
मोबाइल छीनने से बढ़ा विवाद
दरोगा को पीटने के बाद होटल कर्मियों द्वारा महिला का मोबाइल छीनने से स्थिति बिगड़ गई। मोबाइल फोन छीनने के बाद महिला का गुस्सा बढ़ गया। यही कारण रहा कि महिला ने प्लेटें फेंककर तोड़ डालीं और बार-बार चिल्लाई। वीडियो क्लिप में भी स्पष्ट है कि महिला बार-बार चीख चीखकर होटलकर्मी से अपना मोबाइल वापस मांग रही है।
ये था मामला
शुक्रवार को नेशनल हाईवे स्थित होटल ब्लैक पेपर में होटल के मालिक व भाजपा पार्षद मुनीष पंवार उर्फ मिंटू, उसके रिश्तेदारों व कर्मचारियों ने मामूली विवाद को लेकर मोहद्दीनपुर चौकी इंचार्ज सुखपाल पंवार के साथ बुरी तरह से मारपीट की थी। उनके एक केस की वादिनी महिला अधिवक्ता के साथ भी छेड़छाड़ व अभद्रता की थी। पार्षद के दो सालों व कर्मचारियों ने भी दरोगा के साथ बदसलूकी की थी और चौतरफा से घेरे हुए था। पुलिस का फोकस अब उन बलवाइयों की ओर अधिक है, जिन्होंने थाने में पार्षद के जेल जाने के दौरान उसे रोकने के लिए भरपूरा प्रयास किया।