फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Meerut Amar Ujala Special Report: Know these important things related to Muharram

Meerut: इंसानियत के रहनुमा हुसैन ने सिखाया उसूलों पर कायम रहना, पढ़िए अमर उजाला की खास रिपोर्ट

Sat, 29 Jul 2023 04:21 PM IST
कपिल kapil शाह आलम त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
शाह आलम त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 29 Jul 2023 04:21 PM IST
सार

Meerut News: इस्लाम को मानने वाले विभिन्न समुदाय के लोग अलग-अलग तरीकों से इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं, जो दूसरों की खिदमत व भलाई करते हुए बुराई के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए।

विज्ञापन
Meerut Amar Ujala Special Report: Know these important things related to Muharram
मुहर्रम - फोटो : amar ujala

विस्तार

इस्लाम में रमजान की तरह मुहर्रम भी खुदा की इबादत के लिए बहुत खास माना जाता है। इस्लामी कैलेंडर यानि हिजरी संवत में मुहर्रम के महीने से ही साल की शुरुआत होती है। मुस्लिम समुदाय के लोग इस महीने हजरत मुहम्मद सल. के नवासे इमाम हुसैन और उनके साथियों की इस्लाम को जिंदा रखने के लिए कुरबानी को याद करते हैं।

विज्ञापन


मुहर्रम नेकी और कुर्बानी का पैगाम देता है। इस्लाम को मानने वाले विभिन्न समुदाय के लोग अलग-अलग तरीकों से इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं, जो दूसरों की खिदमत व भलाई करते हुए बुराई के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए। शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने बताया कि मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार, पहला महीना है। 1430 साल पहले इसी महीने की दस तारीख को पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन को यजीद की फौज ने तीन दिन तक भूखा प्यासा रख शहीद कर दिया था। इसीलिए इस महीने की खास अहमियत है। हजरत इमाम हुसैन ने सच्चाई की खातिर अपनी और अपने बच्चों की कुर्बानी को अहमियत दी।

विज्ञापन

उन्होंने बताया कि 680 ईसवी में माविया के मरने के बाद उसका बेटा यजीद शाम के तख्त पर बादशाह बना, जो बहुत ही जालिम था। यजीद ने बादशाह बनते ही इमाम हुसैन के सामने अपनी फर्माबरदारी करने का सवाल रखा। मगर हजरत हुसैन ने साफ इंकार कर दिया। जिसके चलते हजरत इमाम हुसैन ने मदीना छोड़ दिया और हज करने के इरादे मक्का पहुंचे, मगर वहां भी हाजियों के रूप धारण करते हुए यजीद के सिपाही पहुंचे। जो कि काबे में ही हजरत इमाम हुसैन का कत्ल कर देना चाहते थे। लेकिन हजरत इमाम हुसैन ने काबे शरीफ की अहमियत का ख्याल करते हुए मक्का से हज के एक दिन पहले ही वहां से आगे के लिए ओर रवाना हो गए। 

हजरत इमाम हुसैन का काफिला मुहर्रम की दो तारीख को करबला पहुंचा, जहां यजीद की फौज ने इमाम हुसैन को घेर लिया। हजरत इमाम हुसैन के साथ काफिले में औरतें और बच्चें भी थे। जिनमें छह महीने का बच्चा अली असगर और 10 साल के हबीब इब्रे मजाहिर भी थे, जो कुल 72 आदमी थे, जबकि यजीद की फौज में हजारों आदमी थे।

विज्ञापन

जब हजरत इमाम हुसैन करबला में जाकर रुके तो अपने खेमे नहरे फुरात के किनारे लगा लिए, मगर यजीदी फौज ने वहां से खेमे हटवा दिए। यजीदी फौज ने सातवीं मुहर्रम से हजरत हुसैन और उनके परिवार का पानी बंद कर दिया, लेकिन फिर भी हजरत इमाम हुसैन ने यजीद की फरमाबरदारी कुबूल नहीं की। मुहर्रम की दसवीं तारीख की सुबह से हजरत इमाम हुसैन के साथियों की शहादत होने लगी। दोपहर तक हजरत इमाम हुसैन के बेटे, भतीजे, भांजे व दोस्त शहीद हो चुके थे। सिर्फ छह महीने के अली असगर ही बचे थे। लेकिन यजीदी फौज ने उसका भी कत्ल कर दिया।

यह भी पढ़ें: मणिपुर जैसी घटना: किशोरी को निर्वस्त्र दौड़ाने के मामले में एक्शन, अहम सुराग से सामने आएंगे दरिंदों के चेहरे

मौलाना यूसुफ कासमी ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम को खून देकर सींचा है। वहीं, हजरत इमाम हुसैन ने तीरों की बौछारों में भी नमाज कायम रखी और यादे इलाही में मशगूल रहे। मुहर्रम की दसवीं तारीख जिसको आशूरा कहते हैं यह मुहर्रम की पहली कड़ी है, दूसरी चेहल्लुम, तीसरी कड़ी चुप ताजिया है। हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी हर कोई मानता है। जो कि हमें बुराई से लड़ने की तालीम देती है। खुद अल्लाह के पाक रसूल हजरत मोहम्मद सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने भी खुद इस महीने में रोजे रखे और अपने साथियों को भी इबादत करने की नसीहत दी।

यह भी पढ़ें: एक साथ उठीं तीन अर्थियां: मुखाग्नि देते हुए बिलख पड़े पिता, खुशियों से भरा था परिवार, अब पसरा मातम

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed