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फैशन का ट्रेंड : युवाओं की दीवानगी से चमकी गांधी की खादी, पेश है अमर उजाला की खास रिपोर्ट

Fri, 18 Feb 2022 05:13 PM IST
कपिल kapil आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 18 Feb 2022 05:13 PM IST
सार

एक बार फिर से खादी के कपड़ों का ट्रेंड छा गया है। मेरठ में युवा खादी के कपड़ों को बेहद पसंद कर रहे हैं। पढ़िए अमर उजाला की खास रिपोर्ट।

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Meerut Amar Ujala Special News: youth are liking khadi clothes read full story
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ जंग का अस्त्र बनी खादी के लिए अब एक बार फिर शहर के युवाओं में दीवानगी है। युवाओं की पसंद कॉटन और लिनन है तो लड़कियों को सिल्क खादी भा रही है। मन को भाने वाले रंगों के साथ शाही और कूल लुक के साथ अब खादी डिजाइनर आउटफिट्स की तरह छाई है। इससे खादी के कारोबार और खंदक बाजार में नई जान आई है। 

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गांधी की खादी अब मेरठ शहर के युवाओं को खूब भा रही है। यहां स्थानीय इकाइयों में बनी खादी के साथ मधुबनी और टसर खादी विशेष पसंद है। खादी अब स्टेट्स सिंबल बन रही है। हर वर्ग खादी को पसंद कर रहा है। करीब 700 दुकानों वाले खंदक बाजार की पहचान खादी से ही है। 
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शहर में रशीद नगर, इस्माईल नगर, तारापुरी जैसे कुछ इलाकों में खादी बनाने के लिए पावरलूम के बाद अब कारीगरों ने शटरलेस मशीनें लगा ली हैं। यहां बड़ी संख्या में अपंजीकृत इकाइयां भी हैं। इस वजह से इन्हें बैंकों से कर्ज और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। शहर के 80 फीसदी खादी निर्माता स्थानीय बाजार के साथ दिल्ली और सूरत में भी सीमित मुनाफे के साथ माल सप्लाई करते हैं। सूरत और दिल्ली से मधुबनी, भागलपुरी, टसर सहित अन्य प्रदेशों की खादी को शहर के रिटेलर्स बेचते हैं। 
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भागलपुरी खादी युवाओं की पहली पसंद
ब्राइट रंगों के साथ लिनन खादी युवा सर्वाधिक पसंद कर रहे हैं। मधुबनी, भागलपुरी, आसम, खादी मिक्स, मटका, मूंगा, टसर सभी तरह की खादी को युवा वर्ग को पसंद आ रही हैं। शहर में सुभाष बाजार, आबूलेन, बेगमपुल, घंटाघर और सेंट्रल मार्केट सहित लगभग 800 काउंटर पर खादी की बिक्री होती हैं। शहर में प्रतिदिन का रिटेल कारोबार 8 से 10 लाख के बीच है।

काउंटर पर युवाओं की अच्छी संख्या 
युवा वर्ग खादी पसंद कर रहा है। काउंटर पर युवा वर्ग ही ज्यादा दिखता है। शहर में बनने वाला खादी आज भी परंपरागत स्टाइल में कार्य कर रहा है। सूरत और दिल्ली के साथ दूसरे देशों से भी माल मंगवाया जाता है। हमारे ब्रांड के मुंबई में भी दो स्टोर हैं। - वैभव शर्मा, विद्यार्थी खादी भंडार, बुढ़ाना गेट
 
कारोबारियों की दुश्वारियां भी कम नहीं
रजिस्ट्रेशन और जीएसटी प्रक्रिया जटिल है। 
विभिन्न एनएओसी लेने मिलने में समस्या है।
धागे पर 12 फीसदी तो कपड़े पर पांच फीसदी टैक्स।
टैक्सटाइल क्लस्टर का नहीं हुआ निर्माण।
टैक्सटाइन हब बनाने के लिए जमीन नहीं मिली। 

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कारोबारियों का दर्द सुनो सरकार
धागे पर घटाएं टैक्स
हैंडलूम उद्योग को बढ़ाने के लिए कोई सुविधा सरकार की तरफ से नहीं मिली है। ओडीओपी में भी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को शामिल किया गया है। धागे पर लगने वाले टैक्स को घटाकर पांच प्रतिशत किया जाना चाहिए। - पंकज बंसल, पशुपति टेक्सटाइल, मेरठ

खंदक के विकास के लिए बने योजना 
सूरत और दिल्ली की तर्ज पर प्रदेश सरकार को आगे आकर मेरठ के खंदक बाजार का विकास करना चाहिए। भाजपा विधायक और मंत्रियों ने इस विषय में आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक जमीन भी नहीं मिली है। ऐसे में उद्योग पिछड़ रहा है। - अनुज गोयल, हैंडलूम अनुज फैक्टरी
 
सुविधाएं मिलतीं तो सूरत की तरह होती पहचान

शहर मेरठ की खादी का देश भर में नाम है। सूरत तेजी से आगे बढ़ी और हमें पीछे छोड़ते हुए देश भर में आज सूरत का नाम है। हैंडलूम इंडस्ट्री को जरूरत के अनुसार सुविधाएं नहीं मिली हैं। - विपुल जैन, वीतराग फैब्रिक, मेरठ 

इसलिए युवाओं को भाई खादी
खादी में है आकर्षण 

खादी में आकर्षण है। दिल को भाने वाले रंग आसानी से मिल जाते हैं। खिलाड़ियों, बड़े नेता-अभिनेता से कॉलेज गोइंग यूथ तक क्रेज बढ़ा है। - प्राची निवासी शास्त्रीनगर

मोदी को देख बढ़ी दिलचस्पी
प्रधानमंत्री मोदी का ड्रेस का अंदाज जुदा है। उनके स्टाइल वाली जैकेट और कुर्ता-पायजामे का चलन भी बढ़ा है। इससे खादी को ताकत मिली है। - एश्वर्या शर्मा, नेहरू नगर

पार्टी से पर्यटन तक खादी 
पहले दीपावली और होली पर विशेष पर्व में ही खादी पहनने का चलन था पर अब पार्टी और घूमने आने जाने में भी खादी पसंद करते हैं। - श्रेयांश गोयल, निवासी चित्रकूट कॉलोनी

लिनन पहली पसंद 
मेरे आसपास के दायरे में सभी लिनन पहनना पसंद करते हैं। यह कपड़ा बहुत अच्छा लुक देता है। सिलाई के बाद भी शानदार फिनिशिंग आती है। - असीम निवासी शास्त्रीनगर

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