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मेडिकल कॉलेज की बदहाली पर भड़के मंत्री

Fri, 20 May 2016 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 20 May 2016 02:32 AM IST
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medical college me nirikshan
मेडिकल में बदहाली पर भड़के मंत्री शाहिद मंजूर - फोटो : अमर उजाला
 घायल सपा कार्यकर्ता का हाल जानने के लिये मेडिकल कॉलेज पहुंचे कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर वहां अव्यवस्थाएं देखकर भड़क गए। उन्होंने तत्काल प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को फोन लगाकर कहा कि जब यहां पार्टी पदाधिकारियों को ही इलाज नहीं मिल रहा है तो आम आदमी का क्या हाल होगा।
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उन्होंने कहा कि अगर सरकार से बजट चाहिये तो हमें बताएं। बजट की स्वीकृति दिलाई जाएगी। लेकिन, इस तरह से मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिये। इस दौरान उन्होंने पूरे मामले को मुख्यमंत्री के सामने रखने की भी बात कही।
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बुधवार को सपा की साइकिल रैली में जा रहे सपा कार्यकर्ता हादसे घायल हो गए थे। उनका हालचाल जानने के लिये कैबिनेट मंत्री बृहस्पतिवार रात मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इस दौरान वार्डों के अंदर गैलरी की लाइटें बंद थीं और कूड़ेदान से कूड़ा बाहर बिखरा था।
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यह देख सब देखने के बाद उन्होंने प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता और सीएमएस डॉ. सुभाष सिंह को अपने मेडिकल कालेज पहुंचने की सूचना दी। जब तक प्राचार्य और सीएमएस मेडिकल पहुंचे, तब तक मंत्री आईसीयू में दाखिल हो चुके थे। इस दौरान आईसीयू के एसी खराब होने पर मंत्री भड़क गए। उन्होंने कहा, इस तरह आईसीयू चलाने का क्या फायदा, जिसमें मरीज सांस भी न ले सके।
इतने बड़े मेडिकल कॉलेज में एक ठीक वेंटिलेटर भी नहीं है। इसके चलते एक मरीज की जान चली गई। यह कहते हुये उन्होंने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को फोन लगा दिया और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुये मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था सुधारने को कहा। उन्होंने कहा कि आईसीयू तो छोड़िये, बाहर गैलरी में भी लाइटें बंद पड़ी हैं। फोन पर बात करने के बाद मंत्री इमरजेंसी पहुंचे, वहां भी आक्सीजन की उचित व्यवस्था न होने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई।
दरअसल, कैबिनेट मंत्री आईसीयू में भर्ती उन मरीजों का हालचाल जानने के लिए पहुंचे थे, जो बुधवार को भटीपुरा में कार एक्सीडेंट में घायल हो गए थे। इस हादसे में घायल फैजान पुत्र अब्दुल सत्तार निवासी खैरनगर की इलाज के दौरान आनंद अस्पताल में मौत हो गई थी। उसे पहले मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। वहां वेंटिलेटर की न होने पर उसे रेफर कर दिया गया था। हालांकि,, दो अन्य घायल शावेज और फरमान निवासी छतरी वाला पीर का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।

एक मरीज पर मिलते हैं 126 रुपये
मेडिकल कॉलेज कहने को वेस्ट यूपी का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है। इसे सालाना करीब आठ करोड़ रुपये का बजट मिलता है। इसमें दवा से लेकर सारा सामान भी खरीदना होता है।
अब मोटे तौर पर देखा जाए मेडिकल कॉलेज में हर साल करीब 6.30 लाख मरीज देखे जाते हैं। इस हिसाब से प्रति मरीज 126 रुपये का खर्च आता है। जबकि, लखनऊ स्थित केजीएमयू के एक विभाग का सालाना का बजट आठ करोड़ रुपये से अधिक है। यही नहीं, मेडिकल कॉलेज में लगातार पांच साल से स्टाफ बढ़ाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ है। आज भी कालेज के पास उतने ही पद स्वीकृत हैं, जितने 500 बेड का अस्पताल बनाते वक्त थे। जबकि, अब बेड की संख्या बढ़कर 1040 पहुंच गई है।


यह है स्टाफ की स्थिति
पद                             तैनात              जरूरत            
स्टाफ नर्स                    123                  827
वार्ड ब्वाय एवं आया         105                 200
स्वीपर                           85                  285


हड़ताल की सुगबुगाहट
खबर है कि बुधवार को मेडिकल कॉलेज के एक चिकित्सक ने इमरजेंसी में पहुंचकर स्टाफ नर्स और फार्मासिस्टों के साथ अभद्रता की थी। इसके विरोध में मेडिकल के फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स शुक्रवार से हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। इसमें संबंधित चिकित्सक को हटाने जाने की मांग भी की जाएगी। यह खबर फैलते ही मेडिकल कॉलेज की अंदरूनी राजनीति भी तेज हो गई है।
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