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MDA ने ही सरकारी जमीन कब्जा कर कौड़ियों के भाव में बेच डाले फ्लैट  

Wed, 28 Jun 2017 02:24 AM IST
अनुज मित्तल/ मेरठ
अनुज मित्तल/ मेरठ Updated Wed, 28 Jun 2017 02:24 AM IST
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MDA is the only government land occupied by the sale of flat
बिल्डिंग की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

सरकारी जमीनों पर जहां जिसका जोर चला, उसने वहीं कब्जा कर लिया। इसमें आम जनता तो दूर सरकारी विभाग भी पीछे नहीं रहे। एमडीए ने बेगमबाग में करोड़ों की सरकारी जमीन को नियम विरुद्ध बिना फ्री होल्ड कराए कब्जा कर उस पर 72 फ्लैट बनाकर कौड़ियों के भाव बेच दिए। राजस्व विभाग की हद दर्जे की लापरवाही ये रही कि उसे शहर के बीचों बीच ही अपनी जमीन पर कब्जा होता नजर नहीं आया। 

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ये है मामला 
अंग्रेजी हुकूमत में बेगमबाग के आसपास बड़ी कोठियां हुआ करती थी। आजादी के बाद इस तरह की जमीनों को सरकार ने अपने में निहित कर लिया। जिन्हें नजूल की भूमि कहा जाता है। बेगमबाग की ये कोठियां समय के साथ खंडहर होती गईं और जमीन ही रह गईं। राजस्व अभिलेखों में इन जमीनों के खसरा नंबर कोठियाल के नाम से दर्ज हैं। बेगमबाग में कोठियाल नाम से कई रकबे हैं। 
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एमडीए ने क्या खेल किया
बेगमबाग की इसी खाली पड़ी जमीन पर एमडीए ने बेगमबाग आवासीय योजना 2007-08 शुरू की और चार मंजिला टॉवर खड़ा करते हुए इसमें उच्च आय वर्ग के 72 फ्लैट तैयार किए। लेकिन जमीन पर फ्लैट बनाने से पहले इसकी कीमत का भुगतान कर फ्री होल्ड कराते हुए अपने नाम कराने की कार्रवाई एमडीए ने नहीं की। 
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12.50 लाख तक में बेचे फ्लैट 
एमडीए ने इन फ्लैटों में तीन बेडरूम, ड्राइंग, डाइनिंग रूम, रसोई, दो स्नानघर और शौचालय का निर्माण कराकर दिया। भूतल का फ्लैट 12.50 लाख रुपये, प्रथम तल का 12 लाख, द्वितीय तल का 11.50 लाख और तृतीय तल का 11 लाख रुपये की दर से बेचा। 

जमीन के रेट तब और अब
बेगमबाग क्षेत्र शहर के पॉश और महंगे क्षेत्रों में शुमार है। वर्तमान में यहां का सर्किल रेट करीब 60 हजार रुपये है, जबकि 2008 में इसका सर्किल रेट करीब 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर था। ऐसे में कुल 7922.63 वर्ग गज जमीन पर एमडीए ने यह आवासीय योजना तैयार की। इस जमीन की वर्तमान में कीमत करीब 47.50 करोड़ बैठती है, जबकि 2008 के सर्किल रेट से भी इसकी कीमत करीब 16 करोड़ बैठती है। लेकिन एमडीए ने इन फ्लैटों को मात्र 8.50 करोड़ रुपये में बेच दिया।   

जांच में खुला मामला 
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का अभियान छेड़ा तो राजस्व विभाग ने अपने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। एंटी भूमाफिया अभियान के तहत सामने आया कि इस जमीन पर एमडीए ने ही खेल कर दिया। मामला सरकारी विभाग का होने के कारण दबा दिया गया। लेकिन आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने इस मामले में सूचना के अधिकार में जानकारी मांगी। जिस पर राजस्व विभाग से जो खतौनी मिली, उसमें यह जमीन आज भी कोठियाल दर्ज है। वहीं, एमडीए ने फ्लैट निर्माण संबंधी जानकारी तो उपलब्ध करा दी। लेकिन जमीन संबंधी दस्तावेज या जानकारी होने से इंकार कर दिया। 


एसडीएम मेरठ कुमार भूपेंद्र ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। उच्चाधिकारियाें के संज्ञान में मामला लाकर नियमानुसार कार्रवाई तय होगी।

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