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कोरोना से मिलेंगी एमबीबीएस की सौ सीटें
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने का जरिया कोरोना बन सकता है। मेडिकल को न सिर्फ उसकी पुरानी 50 सीटें, बल्कि 50 और सीटें मिल सकती हैं। मेडिकल में इसकी कवायद की जा रही है। इसके लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल में आवेदन किया गया है।
मेडिकल कॉलेज कोविड के इलाज का मुख्य केंद्र है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों का इलाज यहां किया गया। कोरोना के कारण बेड ऑक्यूपेंसी (बेड के हिसाब से मरीजों की संख्या) कम रही। इस कारण बेड ऑक्यूपेंसी के सवाल के जवाब में कोरोना का तर्क दिया जाएगा। पिछली बार बेड ऑक्यूपेंसी के कारण ही 50 एमबीबीएस की सीटें कम कर दी गईं थीं। दो साल पहले तक यहां एमबीबीएस की 150 सीटें थीं, अब 100 हैं।
एमसीआई की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही थीं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती थीं। लिहाजा साल 2019 में एमसीआई (अब एनएमसी) के मानकों पर खरे न उतरने के कारण 50 सीटों को कम कर दिया गया था।
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मेडिकल प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी है। अगले साल के लिए आवेदन किया गया है। कोरोना काल मे बेड ऑक्यूपेंसी पूरी करना मुश्किल है, क्योंकि कोरोना इलाज का मुख्य केंद्र मेडिकल में ही है। जहां तक फैकल्टी की बात है तो उसे संविदा पर चिकित्सक रखकर पूरा किया जा रहा है। बड़ी लाइब्रेरी बन रही है।
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मेडिकल कॉलेज कोविड के इलाज का मुख्य केंद्र है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों का इलाज यहां किया गया। कोरोना के कारण बेड ऑक्यूपेंसी (बेड के हिसाब से मरीजों की संख्या) कम रही। इस कारण बेड ऑक्यूपेंसी के सवाल के जवाब में कोरोना का तर्क दिया जाएगा। पिछली बार बेड ऑक्यूपेंसी के कारण ही 50 एमबीबीएस की सीटें कम कर दी गईं थीं। दो साल पहले तक यहां एमबीबीएस की 150 सीटें थीं, अब 100 हैं।
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एमसीआई की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही थीं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती थीं। लिहाजा साल 2019 में एमसीआई (अब एनएमसी) के मानकों पर खरे न उतरने के कारण 50 सीटों को कम कर दिया गया था।
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मेडिकल प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी है। अगले साल के लिए आवेदन किया गया है। कोरोना काल मे बेड ऑक्यूपेंसी पूरी करना मुश्किल है, क्योंकि कोरोना इलाज का मुख्य केंद्र मेडिकल में ही है। जहां तक फैकल्टी की बात है तो उसे संविदा पर चिकित्सक रखकर पूरा किया जा रहा है। बड़ी लाइब्रेरी बन रही है।