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एमबीबीएस के मेधावी छात्र की सूचना पर फंसा कविराज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Mar 2018 02:14 AM IST
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मेरठ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सीसीएसयू में एमबीबीएस और अन्य परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के बदलने का खुलासा करने में एसटीएफ को करीब 25 दिन लगे।
पूरे केस का खुलासा भी रोचक है। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक मेधावी छात्र से संपर्क किया गया कि यदि परीक्षा अच्छी नहीं हुई तो चिंता मत करना। बस पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यह छात्र खुद टॉपर की श्रेणी का है। जिस पर छात्र हैरत में पड़ गया और कहा कि ऐसा कैसे संभव है। जिसके बाद आरोपी ने कहा कि उसने ऐसे छात्रों की कॉपी बदलवायी है। कई नाम बताने पर इस टॉपर छात्र के होश उड़ गए, जिसके बाद उसने संपर्क कर नंबर ले लिया। पूरे मामले से एसटीएफ मेरठ यूनिट के अधिकारियों को अवगत कराया गया।
जिसके बाद छात्र नेता कविराज का मोबाइल नंबर भी दिया गया। मेरठ में तैनात एसटीएफ के एक तेज तर्रार अधिकारी ने कविराज को विवि में बुलाया और कहा कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। कविराज ने एक सप्ताह तक घुमाया। जिसके बाद एसटीएफ अधिकारी ने एमबीबीएस के छात्र का नाम लिया तो कविराज तैयार हो गया। सरगना कविराज एसटीएफ के ट्रैप में फंस गया। जिसके बाद यह अफसर विवि कैंपस में कर्मचारी पवन से मिला तो यकीन हो गया कि वास्तव में ही एमबीबीएस की कॉपियां बदली जा सकती हैं। विवि के कर्मचारी पवन ने इन्हीं अफसर से कहा कि पूरा खेल सिर्फ एक मिनट का है। जिस दिन परीक्षा हो उसी दिन रोल नंबर बताकर एडमिट कार्ड दिखा देना। कॉपी घर ले जाने के लिए मिल जाएगी।
बेटी एमबीबीएस की छात्रा, पिता लाता था केस
सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह ने बताया कि हरियाणा के अंबाला निवासी संदीप की बेटी मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। संदीप ही मुजफ्फरनगर कॉलेज से एमबीबीएस के ऐसे छात्रों को तलाशता था जिन्हें फेल होने का डर था या फिर अच्छे नंबर लाने थे। मुजफ्फरनगर कॉलेज के जिस स्वर्णजीत और आयुष की कॉपी एसटीएफ ने कविराज से पकड़ी थी, उन कापियों को हरियाणा निवासी संदीप ने ही भिजवाया था। ये छात्र अपने कमरे पर ही कॉपी लिख रहे थे।
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पूरे केस का खुलासा भी रोचक है। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक मेधावी छात्र से संपर्क किया गया कि यदि परीक्षा अच्छी नहीं हुई तो चिंता मत करना। बस पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यह छात्र खुद टॉपर की श्रेणी का है। जिस पर छात्र हैरत में पड़ गया और कहा कि ऐसा कैसे संभव है। जिसके बाद आरोपी ने कहा कि उसने ऐसे छात्रों की कॉपी बदलवायी है। कई नाम बताने पर इस टॉपर छात्र के होश उड़ गए, जिसके बाद उसने संपर्क कर नंबर ले लिया। पूरे मामले से एसटीएफ मेरठ यूनिट के अधिकारियों को अवगत कराया गया।
जिसके बाद छात्र नेता कविराज का मोबाइल नंबर भी दिया गया। मेरठ में तैनात एसटीएफ के एक तेज तर्रार अधिकारी ने कविराज को विवि में बुलाया और कहा कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। कविराज ने एक सप्ताह तक घुमाया। जिसके बाद एसटीएफ अधिकारी ने एमबीबीएस के छात्र का नाम लिया तो कविराज तैयार हो गया। सरगना कविराज एसटीएफ के ट्रैप में फंस गया। जिसके बाद यह अफसर विवि कैंपस में कर्मचारी पवन से मिला तो यकीन हो गया कि वास्तव में ही एमबीबीएस की कॉपियां बदली जा सकती हैं। विवि के कर्मचारी पवन ने इन्हीं अफसर से कहा कि पूरा खेल सिर्फ एक मिनट का है। जिस दिन परीक्षा हो उसी दिन रोल नंबर बताकर एडमिट कार्ड दिखा देना। कॉपी घर ले जाने के लिए मिल जाएगी।
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बेटी एमबीबीएस की छात्रा, पिता लाता था केस
सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह ने बताया कि हरियाणा के अंबाला निवासी संदीप की बेटी मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। संदीप ही मुजफ्फरनगर कॉलेज से एमबीबीएस के ऐसे छात्रों को तलाशता था जिन्हें फेल होने का डर था या फिर अच्छे नंबर लाने थे। मुजफ्फरनगर कॉलेज के जिस स्वर्णजीत और आयुष की कॉपी एसटीएफ ने कविराज से पकड़ी थी, उन कापियों को हरियाणा निवासी संदीप ने ही भिजवाया था। ये छात्र अपने कमरे पर ही कॉपी लिख रहे थे।
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