MBBS परीक्षा की कॉपियां अदला-बदली में फंस गया ये कॉलेज
सीसीएसयू में कॉपियों की अदला-बदली के मामले में मुजफ्फरनगर का एसडी कॉलेज फंस गया है। एमबीबीएस की जो कॉपियां एसटीएफ ने बरामद की, वे एसडी कॉलेज को मुख्य परीक्षा के लिए भेजी गईं थी। विवि ने इसको लेकर एसटीएफ को रिपोर्ट दे दी है। बृहस्पतिवार को एसटीएफ की टीम ने कॉलेज पहुंचकर पूछताछ की।
बिजनौर निवासी छात्र नेता कविराज ने विश्वविद्यालय कर्मचारियों पवन, संदीप, कपिल कुमार, चंद्रप्रकाश सिंह, सलेकचंद आदि के साथ मिलकर एमबीबीएस की कॉपियां बदलने का ठेका लिया था। एसटीएफ की गिरफ्त में आने के बाद पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ था। सामने आया था कि एसटीएफ ने जो कापियां आरोपियों से बरामद की, उन्हें यूनिवर्सिटी ने मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज को भेजा था। कॉपियों के सीरियल नंबर से इसका खुलासा हुआ। यूनिवर्सिटी कॉपियों को बंडलों के सीरियल के हिसाब से कॉलेजों में भेजती है। ये कॉपियां मुख्य परीक्षा के लिए भेजी गईं थी। इन कॉपियों को कॉलेज से बाहर लाकर आरोपियों को किसने दिया, इसको लेकर एसटीएफ बृहस्पतिवार को कॉलेज पहुंचकर पूछताछ करेगी। इस मामले में एसडी कॉलेज के कई कर्मचारी भी फंस सकते हैं।
एसआईटी गठित, दो की गिरफ्तारी की चर्चा
सीसीएसयू में एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के मामले की जांच के लिए एसएसपी मंजिल सैनी ने बुधवार रात एसआईटी का गठन कर दिया। एसएसपी ने बताया कि स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) में सीओ संजीव देशवाल, एसओ मेडिकल सतीश कुमार और इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार शामिल किए गए हैं। एसटीएफ इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव इस केस में वादी हैं। जबकि छापा मारने में इंस्पेक्टर के साथ एसटीएफ के सात सिपाही भी गवाह रहेंगे। अन्य लोगों को भी गवाह बनाने की तैयारी है।
सीओ एसटीएफ बृजेश कुमार ने बताया कि विवि के कर्मचारी चंद्रप्रकाश निवासी शास्त्रीनगर, सलेखचंद निवासी सीसीएसयू कैंपस और संदीप निवासी अंबाला हरियाणा की तलाश में दबिश दी जा रही हैं। चंद्रप्रकाश की लोकेशन दिल्ली में बताई गई है। वहीं, एसपी एसटीएफ आलोक प्रियदर्शी के अनुसार इस प्रकरण की रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय को भेजी गई है, जो मुख्यालय से शासन को जाएगी। विवि के दो संदिग्ध कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर है। वहीं मेडिकल कॉलेज का एक कर्मचारी भी पांच दिनों से फरार है। देर रात चर्चा रही कि एसटीएफ ने दो अन्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
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कॉपियां वापस भेजने का कोई सिस्टम नहीं
यूनिवर्सिटी पेपर कराने के लिए सभी कॉलेजों को कॉपियों के बंडल भेजती है। पेपर होने के बाद जितनी कॉपियां बचती हैं, उनको वापस यूनिवर्सिटी में भेजने का कोई सिस्टम नहीं है। ऐसे में ये कॉपियां कॉलेजों के रूम में पड़ी रहती हैं। जिसके चलते कोई भी कर्मचारी इन कॉपियों को बाहर पहुंचा सकता है। इसके चलते इन कॉपियों के जरिए शिक्षा माफिया पूरा खेल कराते हैं। एसटीएफ इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि किन-किन कॉलेजों से कॉपियां बाहर भेजी जाती रही हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं है कि कॉपियों को
कर्मचारियों को करना पड़ेगा काम
कॉपियों का खेल सामने आने के बाद हटाए गए रिटायर कर्मचारी चंद्रप्रकाश की जगह दूसरे कर्मचारी काम करने में आनाकानी जता रहे हैं। ऐसे में कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने साफ कह दिया है कि जिस काम की जिम्मेदारी कर्मचारियों को दी जाएगी, वे उन्हें पूरे करने पड़ेंगे। अगर इसमें कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक नारायण प्रसाद से साफ कह दिया कि मौज की नौकरी किसी की नहीं चलेगी।
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