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एमबीबीएस काउंसिलिंग में रोष, हंगामा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 24 Sep 2016 02:05 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) को क्वालीफाई कर एमबीबीएस में दाखिला लेने के लिए लाइन में खड़े हजारों अभ्यर्थियों में रोष है। निजी कॉलेजों में पूर्व में निर्धारित सरकारी फीस पर दाखिला ना दिये जाने से नाराज छात्रों ने शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज स्थित काउंसिलिंग सेंटर पर जमकर नारेबाजी की। नाराज अभ्यर्थियों के साथ उनके अभिभावक भी भारी विरोध के बीच धरने पर बैठ गए। जिसके चलते काफी देर तक काउंसिलिंग प्रभावित रही। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। अभ्यर्थियों ने पुलिस पर गालीगलौज करने का आरोप लगाया।
कोर्ट के आदेश पर एमबीबीएस में दाखिले के लिए दोबारा से काउंसिलिंग की जा रही है। अभ्यर्थियों का रोष दोबारा की जा रही काउंसिलिंग को लेकर नहीं, बल्कि निजी कॉलेजों में सरकारी फीस पर दाखिला नहीं है जो पहली काउंसिलिंग में 36 हजार रुपये की सालाना फीस पर मिली थी। अब दूसरी काउंसिलिंग के दौरान छात्रों को मोटी फीस अदा करनी होगी। क्योंकि सरकार ने एमबीबीएस फीस बढ़ाकर 11.30 लाख रुपये सालाना कर दी है। जबकि बीडीएस (डेंटल) की फीस को बढ़ाकर 3.25 लाख रुपये सालाना कर दी है।
इससे नाराज अभ्यर्थी बृहस्पतिवार से विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को स्थिति बिगड़ती नजर आई। पूर्व की सरकारी फीस पर निजी कालेजों में दाखिला ना मिलने से नाराज अभ्यर्थियों व उनके अभिभावकों ने सेंटर के बाहर प्रदर्शन किया। सैकड़ों अभ्यर्थी व उनके अभिभावक सड़क पर जाम लगाने के लिए पहुंचे तो पुलिस से नोकझोंक हुई। एमबीबीएस काउंसिलिंग कराने के लिए पहुंची अभिज्ञा और मीनल शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ गालीगलौज की है। उधर, जाम लगाने से असफल रहे अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग सेंटर के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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निशाने पर सरकार और कॉलेज
प्रदर्शन के बीच अभ्यर्थियों के निशाने पर सरकार और निजी मेडिकल कॉलेज रहे। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार लैपटॉप और छात्रवृत्ति बांट रही है, लेकिन उसका क्या फायदा। जब हम जैसे अभ्यर्थियों को पढ़ाई से महरूम कर रही है, क्योंकि हम लोग 11.30 लाख रुपये की सालाना फीस नहीं दे सकते हैं। ऐसे में जाहिर है कि अमीर लोग ही पढ़ेंगे और निजी कॉलेज उनके पैसे पर पनपते रहेंगे। उधर, अभ्यर्थियों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए मेडिकल कालेज में भारी पुलिस फोर्स तैनात रही।
नीट काउंसलिंग में फीस पर रार, हंगामा, तोड़फोड़
शासन के निर्णय पर निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश शुल्क बढ़ाए जाने से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय स्थित टेलीमेडिसिन सेंटर पर जमकर हंगामा किया। काउंटरों पर तोड़फोड़ कर वहां लगे टेंट भी गिरा दिए। हंगामे के कारण काउंसलिंग ढाई घंटे तक रोक दिया गया। सेंटर पर पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद मामला शांत हुआ तो फिर से काउंसलिंग शुरू हो सकी।
टेलीमेडिसिन सेंटर पर चार दिन से नीट (मेडिकल प्रवेश के लिए) काउंसलिंग हो रही है। तीन दिन तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग हुई। इसके बाद शुक्रवार से निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए काउंसलिंग शुरू की गई तो छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब एक बार काउंसलिंग हो गई तो दोबारा क्यों की जा रही है। काउंसलिंग के बाद उन्हें निजी मेडिकल कॉलेज में सीट भी एलाट हो चुकी है, लेकिन वे प्रवेश नहीं ले रहे हैं। निजी मेडिकल कॉलेज छात्रों को भगा दे रहे हैं।
काउंसलिंग प्रभारी डॉ. देवाशीष शर्मा ने बताया कि शासन ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद एमबीबीएस की फीस 11.30 लाख रुपये और बीडीएस की 3.25 लाख रुपये निर्धारित की है। इसके अलावा अभ्यर्थियों को डेवलपमेंट चार्ज एवं हॉस्टल खर्चा भी देना होगा। उसके लिए शासन स्तर पर वार्ता चल रही है। शासन की ओर से कोई आदेश आने के बाद ही डेवलपमेंट एवं हॉस्टल खर्च के बारे में सूचना दी जाएगी। इसके बाद छात्र शांत हो गए और ढाई घंटे बाद दोबारा काउंसलिंग शुरू हुई। चौथे दिन प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए 15 हजार रैंक तक पाने वाले अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए बुलाया गया था जबकि सीट आवंटन पांच हजार रैंक तक के अभ्यर्थियों की हुई।
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कोर्ट के आदेश पर एमबीबीएस में दाखिले के लिए दोबारा से काउंसिलिंग की जा रही है। अभ्यर्थियों का रोष दोबारा की जा रही काउंसिलिंग को लेकर नहीं, बल्कि निजी कॉलेजों में सरकारी फीस पर दाखिला नहीं है जो पहली काउंसिलिंग में 36 हजार रुपये की सालाना फीस पर मिली थी। अब दूसरी काउंसिलिंग के दौरान छात्रों को मोटी फीस अदा करनी होगी। क्योंकि सरकार ने एमबीबीएस फीस बढ़ाकर 11.30 लाख रुपये सालाना कर दी है। जबकि बीडीएस (डेंटल) की फीस को बढ़ाकर 3.25 लाख रुपये सालाना कर दी है।
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इससे नाराज अभ्यर्थी बृहस्पतिवार से विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को स्थिति बिगड़ती नजर आई। पूर्व की सरकारी फीस पर निजी कालेजों में दाखिला ना मिलने से नाराज अभ्यर्थियों व उनके अभिभावकों ने सेंटर के बाहर प्रदर्शन किया। सैकड़ों अभ्यर्थी व उनके अभिभावक सड़क पर जाम लगाने के लिए पहुंचे तो पुलिस से नोकझोंक हुई। एमबीबीएस काउंसिलिंग कराने के लिए पहुंची अभिज्ञा और मीनल शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ गालीगलौज की है। उधर, जाम लगाने से असफल रहे अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग सेंटर के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
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निशाने पर सरकार और कॉलेज
प्रदर्शन के बीच अभ्यर्थियों के निशाने पर सरकार और निजी मेडिकल कॉलेज रहे। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार लैपटॉप और छात्रवृत्ति बांट रही है, लेकिन उसका क्या फायदा। जब हम जैसे अभ्यर्थियों को पढ़ाई से महरूम कर रही है, क्योंकि हम लोग 11.30 लाख रुपये की सालाना फीस नहीं दे सकते हैं। ऐसे में जाहिर है कि अमीर लोग ही पढ़ेंगे और निजी कॉलेज उनके पैसे पर पनपते रहेंगे। उधर, अभ्यर्थियों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए मेडिकल कालेज में भारी पुलिस फोर्स तैनात रही।
नीट काउंसलिंग में फीस पर रार, हंगामा, तोड़फोड़
शासन के निर्णय पर निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश शुल्क बढ़ाए जाने से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय स्थित टेलीमेडिसिन सेंटर पर जमकर हंगामा किया। काउंटरों पर तोड़फोड़ कर वहां लगे टेंट भी गिरा दिए। हंगामे के कारण काउंसलिंग ढाई घंटे तक रोक दिया गया। सेंटर पर पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद मामला शांत हुआ तो फिर से काउंसलिंग शुरू हो सकी।
टेलीमेडिसिन सेंटर पर चार दिन से नीट (मेडिकल प्रवेश के लिए) काउंसलिंग हो रही है। तीन दिन तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग हुई। इसके बाद शुक्रवार से निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए काउंसलिंग शुरू की गई तो छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब एक बार काउंसलिंग हो गई तो दोबारा क्यों की जा रही है। काउंसलिंग के बाद उन्हें निजी मेडिकल कॉलेज में सीट भी एलाट हो चुकी है, लेकिन वे प्रवेश नहीं ले रहे हैं। निजी मेडिकल कॉलेज छात्रों को भगा दे रहे हैं।
काउंसलिंग प्रभारी डॉ. देवाशीष शर्मा ने बताया कि शासन ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद एमबीबीएस की फीस 11.30 लाख रुपये और बीडीएस की 3.25 लाख रुपये निर्धारित की है। इसके अलावा अभ्यर्थियों को डेवलपमेंट चार्ज एवं हॉस्टल खर्चा भी देना होगा। उसके लिए शासन स्तर पर वार्ता चल रही है। शासन की ओर से कोई आदेश आने के बाद ही डेवलपमेंट एवं हॉस्टल खर्च के बारे में सूचना दी जाएगी। इसके बाद छात्र शांत हो गए और ढाई घंटे बाद दोबारा काउंसलिंग शुरू हुई। चौथे दिन प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए 15 हजार रैंक तक पाने वाले अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए बुलाया गया था जबकि सीट आवंटन पांच हजार रैंक तक के अभ्यर्थियों की हुई।