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पूर्व जिपं अध्यक्ष मनिंदरपाल ने छोड़ी सपा
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 06 Jun 2016 02:58 AM IST
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बैठक को संबोधित करते पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव से पूर्व सपा को बड़ा झटका लगा है। रविवार को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने कई पूर्व जिला पंचायत सदस्यों और सैकड़ों समर्थकाें सहित सपा छोड़ दी। बाईपास स्थित एक फार्म हाउस में आयोजित महापंचायत में मनिंदरपाल सिंह ने जिले भर से आए अपने समर्थकों के साथ आगे के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा की।
वक्ताओं ने सीधे आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव हराने में कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर और जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह ने खुलकर काम किया। हालांकि उन्हें हराने में अन्य पार्टियों के नेता और जनप्रतिनिधि भी लगे थे। लेकिन सपा से होने के कारण इन दोनों ने भीतरघात किया था। चुनाव के बाद सीमा प्रधान को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में मनिंदरपाल सिंह ने पार्टी के आदेश का पालन किया।
आरोप लगाया कि जिला पंचायत अध्यक्ष बनते ही उनके पति अतुल प्रधान ने पूर्व में हुए विकास कार्यों के शिलापट, जिन पर मनिंदरपाल सिंह का नाम लिखा था, उन्हें उखड़वाकर अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसी स्थिति में अब सपा में रहने का कोई आधार नहीं बनता है। करीब तीन घंटे तक चली पंचायत में सभी ने एक स्वर में सपा छोड़ने की बात मनिंदरपाल सिंह से कहते हुए उनके साथ रहने का आश्वासन दिया।
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पंचायत में मुख्य रूप से पूर्व जिपं सदस्य विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, प्रदीप त्यागी, योगेंद्र कुसैडी, रणपाल सिंह, विश्वराज सिंह, ठा. दिनेश, संजीव चिरौड़ी, सुखनंद, ठा. आनंद सिंह, रामवीर सिंह, मानवेंद्र वर्मा, सतीश चिंदौड़ी, सुबोध डायरेक्टर, नरेश चेयरमैन, मनोज बहसूमा, राजीव सिवाया, मनिंदर विहान, पीयूष गुप्ता, सतीश मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री को भेजा पार्टी छोड़ने का पत्र
मनिंदपाल सिंह ने रविवार को ही मुख्यमंत्री और सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को पार्टी छोड़ने का पत्र भेज दिया। जिसमें उन्होंने मुख्य रुप से कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह और अतुल प्रधान पर आरोप लगाये हैं। यह भी आरोप हैं कि जिपं चुनाव में शाहिद मंजूर ने उन्हें, उनकी पत्नी सिंपल सिंह, योगेंद्र कुसैड़ी, विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, विश्वराज, राकेश त्यागी, अनिता रानी, ठा. रामवीर सिह, ठा. आनंद सिंह, एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल के भतीजे अजय गुप्ता सहित पार्टी के दस प्रत्याशियों को हराने का काम किया।
भाजपा में जाने की चर्चा
मनिंदपाल सिंह किस पार्टी में जाएंगे, इस पर अभी चुप्पी है। चर्चा है कि वह भाजपा ज्वाइन करेंगे। इसके पीछे उनका सांसद राजेंद्र अग्रवाल से करीबी होना माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो उनका भाजपा में जाना पूरी तरह तय हो चुका है। 12 जून को दिल्ली में हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद कभी भी वह किसी बड़े नेता की रैली मेरठ में कराकर भाजपा में आने की घोषणा कर सकते हैं।
सिवाल में मची हलचल
राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी होने के बाद भी पिछले पांच सालों में लगातार पार्टी बदलना मनिंदरपाल सिंह को नुकसान पहुंचा सकता हॅै। बावजूद इसके सपा से अलविदा कहने और भाजपा में आने की चर्चा के बीच सिवाल खास विधानसभा में हलचल शुरू हो गयी है। जिससे भाजपा दावेदारों में बेचैनी है। मनिंदरपाल सिंह का जाट बिरादरी का होने के कारण उनकी इस बिरादरी में पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा दूसरे वर्गों में पकड़ भी रही है। सिवालखास विस जाट नेताओं के मुफीद मानी जाती है। ऐसे में भाजपा से जहां कई जाट दावेदारी कर रहे हैं तो अन्य दलों से भी जाट नेता मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
दल-बदल पड़ सकता है भारी
मनिंदपाल सिंह की भाजपा में वापसी तो आसान नजर आ रही है। लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनायेगी। इसे लेकर पार्टी नेता मुखर है। उनका कहना है कि पार्टी में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता लंबे समय से दावेदारी के बीच जनता के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में मनिंदरपाल सिंह जो पिछले पांच सालों में लगातार पार्टी बदलते रहे हैं। उनकी दावेदारी को नेतृत्व नकार सकता है।
मनिन्दर पाल तो सपा के थे ही नहीं। अपने फायदे के लिए पहले सपा से भाजपा और फिर बसपा में चले गए थे। अब तीन साल तक जिपं अध्यक्ष की कुर्सी बचाने के लिए सपा का चोला ओढ़े रहे। उन्होंने तो अपनी गाड़ी और घर पर सपा का झंडा तक नहीं लगाया। - जयवीर सिंह, जिलाध्यक्ष सपा
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मनिन्दर पाल साफ मन से सपा में नहीं रहे। उन्हें पार्टी के एजेंडे से नहीं भटकना चाहिए था। पार्टी हाईकमान की मर्जी से ही सब कुछ होता है। सब्र करना चाहिए था। उनसे यही उम्मीद है कि जहां भी रहें, पूरे भरोसे के साथ रहें। - शाहिद मंजूर, कैबिनेट मंत्री
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वक्ताओं ने सीधे आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव हराने में कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर और जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह ने खुलकर काम किया। हालांकि उन्हें हराने में अन्य पार्टियों के नेता और जनप्रतिनिधि भी लगे थे। लेकिन सपा से होने के कारण इन दोनों ने भीतरघात किया था। चुनाव के बाद सीमा प्रधान को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में मनिंदरपाल सिंह ने पार्टी के आदेश का पालन किया।
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आरोप लगाया कि जिला पंचायत अध्यक्ष बनते ही उनके पति अतुल प्रधान ने पूर्व में हुए विकास कार्यों के शिलापट, जिन पर मनिंदरपाल सिंह का नाम लिखा था, उन्हें उखड़वाकर अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसी स्थिति में अब सपा में रहने का कोई आधार नहीं बनता है। करीब तीन घंटे तक चली पंचायत में सभी ने एक स्वर में सपा छोड़ने की बात मनिंदरपाल सिंह से कहते हुए उनके साथ रहने का आश्वासन दिया।
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पंचायत में मुख्य रूप से पूर्व जिपं सदस्य विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, प्रदीप त्यागी, योगेंद्र कुसैडी, रणपाल सिंह, विश्वराज सिंह, ठा. दिनेश, संजीव चिरौड़ी, सुखनंद, ठा. आनंद सिंह, रामवीर सिंह, मानवेंद्र वर्मा, सतीश चिंदौड़ी, सुबोध डायरेक्टर, नरेश चेयरमैन, मनोज बहसूमा, राजीव सिवाया, मनिंदर विहान, पीयूष गुप्ता, सतीश मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री को भेजा पार्टी छोड़ने का पत्र
मनिंदपाल सिंह ने रविवार को ही मुख्यमंत्री और सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को पार्टी छोड़ने का पत्र भेज दिया। जिसमें उन्होंने मुख्य रुप से कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह और अतुल प्रधान पर आरोप लगाये हैं। यह भी आरोप हैं कि जिपं चुनाव में शाहिद मंजूर ने उन्हें, उनकी पत्नी सिंपल सिंह, योगेंद्र कुसैड़ी, विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, विश्वराज, राकेश त्यागी, अनिता रानी, ठा. रामवीर सिह, ठा. आनंद सिंह, एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल के भतीजे अजय गुप्ता सहित पार्टी के दस प्रत्याशियों को हराने का काम किया।
भाजपा में जाने की चर्चा
मनिंदपाल सिंह किस पार्टी में जाएंगे, इस पर अभी चुप्पी है। चर्चा है कि वह भाजपा ज्वाइन करेंगे। इसके पीछे उनका सांसद राजेंद्र अग्रवाल से करीबी होना माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो उनका भाजपा में जाना पूरी तरह तय हो चुका है। 12 जून को दिल्ली में हो रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद कभी भी वह किसी बड़े नेता की रैली मेरठ में कराकर भाजपा में आने की घोषणा कर सकते हैं।
सिवाल में मची हलचल
राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी होने के बाद भी पिछले पांच सालों में लगातार पार्टी बदलना मनिंदरपाल सिंह को नुकसान पहुंचा सकता हॅै। बावजूद इसके सपा से अलविदा कहने और भाजपा में आने की चर्चा के बीच सिवाल खास विधानसभा में हलचल शुरू हो गयी है। जिससे भाजपा दावेदारों में बेचैनी है। मनिंदरपाल सिंह का जाट बिरादरी का होने के कारण उनकी इस बिरादरी में पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा दूसरे वर्गों में पकड़ भी रही है। सिवालखास विस जाट नेताओं के मुफीद मानी जाती है। ऐसे में भाजपा से जहां कई जाट दावेदारी कर रहे हैं तो अन्य दलों से भी जाट नेता मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
दल-बदल पड़ सकता है भारी
मनिंदपाल सिंह की भाजपा में वापसी तो आसान नजर आ रही है। लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनायेगी। इसे लेकर पार्टी नेता मुखर है। उनका कहना है कि पार्टी में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता लंबे समय से दावेदारी के बीच जनता के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में मनिंदरपाल सिंह जो पिछले पांच सालों में लगातार पार्टी बदलते रहे हैं। उनकी दावेदारी को नेतृत्व नकार सकता है।
मनिन्दर पाल तो सपा के थे ही नहीं। अपने फायदे के लिए पहले सपा से भाजपा और फिर बसपा में चले गए थे। अब तीन साल तक जिपं अध्यक्ष की कुर्सी बचाने के लिए सपा का चोला ओढ़े रहे। उन्होंने तो अपनी गाड़ी और घर पर सपा का झंडा तक नहीं लगाया। - जयवीर सिंह, जिलाध्यक्ष सपा
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मनिन्दर पाल साफ मन से सपा में नहीं रहे। उन्हें पार्टी के एजेंडे से नहीं भटकना चाहिए था। पार्टी हाईकमान की मर्जी से ही सब कुछ होता है। सब्र करना चाहिए था। उनसे यही उम्मीद है कि जहां भी रहें, पूरे भरोसे के साथ रहें। - शाहिद मंजूर, कैबिनेट मंत्री