शहीद की पत्नी बोली, मुझे पाकिस्तान से बदला चाहिए... भाई बोला, सरकार इजाजत दे पाक में घुसकर मारेंगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जयद्रथ 6 जुलाई को अपनी पत्नी ममता को जयपुर में शिफ्ट करने के लिए लेकर गया था। शहीद जयद्रथ के भाई सहदेव ने बताया कि जिस यूनिट में जयद्रथ था, उस यूनिट का ट्रांसफर जयपुर हो गया था। इसलिए जयद्रथ पहले ही 20 दिन की छुट्टी लेकर आ गया था। जिससे जयपुर में वह क्वार्टर रिजर्व करा सके और सामान शिफ्ट कर सके। उसने 6 जुलाई को जयपुर में अपना क्वार्टर अलॉट करा लिया था। उसने अपनी पत्नी ममता को वहीं छोड़ दिया था। क्योंकि अमरनाथ यात्रियों पर हमला होने के बाद एक माह के लिए ही राजौरी में यूनिट को रोका गया था, सिर्फ 15 दिन शेष रह गए थे। इसलिए जयद्रथ ने अपनी पत्नी ममता के पास उसके भाई अरविंद और एक छोटी भांजी को छोड़ दिया था। ममता ने रोते हुए बताया कि उससे कह कर गए थे कि वह जल्दी ही लौट कर जयपुर आएंगे। उनका इंतजार करना, लेकिन अब कब तक वह उनका इंतजार करे, कह कर गए थे कि अब कुछ दिन की बात है फिर कोई टेंशन नहीं रहेगी। जयपुर में आराम से रहेंगे, अब तक तो समय नहीं मिल पाया था, लेकिन अब खूब एंजाय करेंगे, लेकिन सब कुछ खत्म हो गया। उसका अब दुनियां में कोई नहीं रहा। कहां जाएगी वह, अब उसका कौन सहारा है। वह तो बर्बाद हो गई। ममता का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। उसकी चचेरी बहनें पारुल और आरती तो रोते-राते बार-बार बेसुध हो रहीं थीं।
पत्नी से बोले डीएम, पूरा देश आपके साथ
जयद्रथ के शहीद होने की सूचना पर उसके पैतृक गांव भगवानपुर में शोक की लहर है। मौके पर जिलाधिकारी व एसएसपी भी गांव में पहुंच गए। जिलाधिकारी पीके पांडेय और एसएसपी बबलू कुमार शहीद जवान के परिजनों से सांत्वना देने लगे तो शहीद की पत्नी ममता ने कहा कि उसे कुछ और नहीं चाहिए उसके पति की शहादत का बदला चाहिए। जिलाधिकारी ने जयद्रथ की पत्नी ममता से कहा कि उनका पति देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ है जिसे हमेशा याद किया जाएगा। पूरा देश आपके इस दु:ख में साथ खड़ा है। पत्नी की आंखों के आंसू सूख चुके हैं, बस उसकी जुबान पर एक ही शब्द था कि उसके पति की शहादत का बदला लिया जाए।
जयद्रथ की पत्नी को गोली लगने की दी गई थी सूचना
परिजनों ने जयपुर में रह रही जयद्रथ की पत्नी ममता के भाई को फोन पर घटना की जानकारी दी। कुछ ही देर बाद जयपुर में क्वार्टर पर एक अधिकारी ने भी ममता के भाई को घटना की जानकारी दी। ममता के भाई अरविंद ने ममता को सिर्फ इतना बताया जयद्रथ को गोली लगी है और वह सहारनपुर के अस्पताल में भर्ती है। जिस कारण रात की बजाय ममता सुबह जयपुर से सहारनपुर के लिए रवाना हुई। गांव पहुंचकर ममता को जयद्रथ की शहादत का पता चला।
जयद्रथ की शहादत उसके भाई सहदेव को सालो-साल सालती रहेगी। एक ही मां की कोख से पैदा हुए दोनों लाल सेना की एक ही यूनिट में तैनात थे। संयोग रहा कि सहदेव छुट्टी पर घर आ गया था और अब भाई के शहीद होने के बाद उसका दिल फटा जा रहा है। भाई की शहादत पर उसे गर्व है, मगर वह देश के दुश्मनों के दांत खट्टे कर भाई की मौत का बदला भी लेना चाहता है। सहदेव का कहना है कि सरकार छूट दे तो पाक सीमा में घुसकर दुश्मनों को सबक सिखा देंगे। भाई की शहादत की खबर पर उसे बिलखते हुए देख पूरे गांव का कलेजा बैठा जा रहा है। बचपन में साथ-साथ खेले, पढ़े-लिखे और बड़े हुए तो सेना में भर्ती होकर एक ही यूनिट में तैनाती पाई। दो भाइयों में एक तो देश के लिए शहीद हो गया, दूसरा अब उसकी शहादत का बदला लेने के लिए सीमा पर पहुंचने को बेताब है। शहीद के भाई सहदेव का कहना है कि सीमा पर कब तक सैनिक इस तरह मरते रहेंगे। हम अपनी माटी की रक्षा को हर पल खड़े हैं मगर लाखों माओं के लाल की शहादत का बदला लिया जाना चाहिए। बिलखते हुए बोला, हमें बदला चाहिए। पाकिस्तान को अब करारा जवाब देने का समय है। सरकार कुछ देर के लिए छूट दे दे तो सेना धोखेबाज पाक को सबक सिखा देगी।
जयद्रथ का छोटा भाई भी आरआर में
जसवीर का बड़ा बेटा रामकरण उर्फ राहुल एक प्राइवेट शुगर मिल में कर्मचारी है। जयद्रथ 2008 में सहारनपुर में हुई भर्ती के दौरान राजपूत रायफल रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। तीसरा बेटा सहदेव भी दो साल बाद उसी यूनिट में भर्ती हो गया। वह 16 जुलाई को ही एक माह का अवकाश पर गांव आया हुआ है। उसे जब अपने भाई के शहीद होने की सूचना मिली तो वह बदहवास सा हो गया। उसे सूचना पर यकायक यकीन ही नहीं हुआ।
बेटे के शहीद होने की खबर सुनते ही बेहोश हो गए पिता
रात लगभग साढ़े 9 बजे जयद्रथ के पिता जसवीर टीवी देख रहे थे। इस बीच एक समाचार चैनल पर एक जवान की मौत की सूचना सुनी। फिर चैनल पर चल रही पट्टी पर बेटे के शहीद होने का समाचार पढ़ा तो उनकी चीख निकल गई और बेहोश हो गए। लोगों ने डाक्टर के पास ले जाकर तुरंत उपचार कराया।
शुक्रवार की रात लगभग साढ़े 9 बजे जसवीर अपने घर में बैठे टीवी देख रहे थे। अचानक जम्मू में भारतीय सेना पर पाकिस्तानी फौज द्वारा फायरिंग और एक भारतीय सैनिक के शहीद होने की खबर मिली तो बेचैन हो उठे। जब उनकी नजर समाचारों के नीचे चल रही पट्टी पर पड़ी तो चीख निकल गई। चैनल पर चल रही समाचार पट्टी पर सहारनपुर के गांव भगवानपुर निवासी जयद्रथ के शहीद होने की खबर पढ़ते ही उनकी हलत खराब होने लगी। उनकी चीख सुनकर परिवार के अन्य लोग उनके पास दौड़े। वह अपने बेटे के शहीद होने की बात कहते-कहते बेहोश हो गए। परिजन उन्हें लेकर डाक्टर के पास दौड़े। कुछ ही देर में पूरे घर में कोहराम मच गया। रात के सन्नाटे में रोने, चीखने की आवाज पूरे गांव में गूंज उठी और देखते ही देखते पूरा गांव जसबीर के घर की ओर दौड़ पड़ा। किसी को भी यकायक समाचार पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन टीवी पर लगातार आ रहे नाम के बाद पूरा गांव शोक में डूब गया।
बचपन से ही थी फौज में भर्ती होने की ललक
जयद्रथ बचपन से ही सेना में शामिल होकर मातृभूमि की रक्षा के लिए सीमा प्रहरी बनने का सपना देखता था और जब भी कोई दुश्मन भारतीय सेना पर हमला करता था तो उसका खून खौल उठता था। सहारनपुर में हुई पहली भर्ती में ही वह पढ़ाई छोड़कर शामिल होने के लिए पहुंच गया था।
जयद्रथ बचपन से ही होनहार था। गांव के ही उसके बचपन से सहपाठी रहे विपिन पुंडीर ने बताया कि पढ़ाई में वह औसत से ऊपर रहा। उसने अंबेहटा चांद स्थित जनता इंटर कॉलेज से 2006 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उसके बाद सहारनपुर के जैन डिग्री कॉलेज में स्नातक में एडमिशन ले लिया। पहले साल की ग्रेजुएशन का अभी परिणाम आया ही था कि वर्ष 2008 में सहारनपुर में सेना में भर्ती हुई और वह पढ़ाई छोड़कर सेना में शामिल होने के लिए टेस्ट देने पहुंच गया। उसकी इच्छा पूरी हो गई और वह राजपूत राइफल में भर्ती हो गया। 28 फरवरी 2008 को उसने ड्यूटी ज्वाइन की थी।
विपिन ने बताया कि वह कक्षा 6 से कक्षा 12 तक उसके साथ ही पढ़ा। एक सप्ताह पहले ही तो उसकी मुलाकात गांव में हुई थी। जयद्रथ की बचपन से ही इच्छा सेना में भर्ती होने की थी। जयद्रथ ने देशसेवा प्रेम के चलते दो साल बाद ही अपने छोटे भाई सहदेव को भी राजपूत रेजिमेंट में भर्ती करा दिया था।
शहीद जयद्रथ के गांव में गम और गुस्सा
जम्मू के राजौरी सेक्टर के सुंदरबनी पोस्ट पर शुक्रवार की शाम पाक सेना के अचानक गोलीबारी का जवाब देते हुए सहारनपुर के ग्राम भगवानपुर निवासी जयद्रथ सिंह (28 वर्ष) शहीद हो गए। सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। लोगों की भीड़ जयद्रथ के घर पर लगने लगी। पूरा गांव गम में डूब गया। गांव के लोग परिजनों को सांत्वना देने का प्रयास कर रहे हैं। गांव के लाल के सीमा पर शहीद होने की सूचना से हर कोई सकते में था। लोगों में पाकिस्तान की धोखे से की गई फायरिंग की नापाक हरकत को लेकर गुस्सा व्याप्त था। लोगों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। रोजाना ही देश के जवान सीमा पर धोखे से मारे जा रहे हैं। पाकिस्तान को जवाब दिया जाना जरूरी है। गांव में शाम तक लोगों की भारी भीड़ जमा हो चुकी थी। पिता जसवीर को जहां जहां बेटे के मातृभूमि पर शहीद होने पर फक्र है, वहीं बेटे के बिछड़ने के गम में रो रोकर बुरा हाल हैं। ग्रामीण पीड़ित पिता की सांत्वना देकर चुप कराते रहे।
मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग
शहीद जयद्रथ के चाचा कानसिंह ने कहा है कि प्रदेश के लाल ने अपने देश की खातिर जान दी है। पूरा देश इस शहादत को नमन कर रहा है। शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए मुख्यमंत्री को गांव में आना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से गांव में आने की मांग की साथ ही सरकार के अन्य प्रतिनिधियों को भी शहीद के परिजनों को सांत्वना देने के लिए पहुंचने की मांग की। परिजनों के मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग की खबर के बाद प्रदेश सरकार भी सक्रिय हो गई। आयुष मंत्री डा. धर्म सिंह सैनी को तत्काल परिजनों को सांत्वना देने का निर्देश लखनऊ से मिला। देर शाम आयुष मंत्री, विधायक देवेन्द्र निम भी पहुंचे। इसके अलावा गन्ना मंत्री सुरेश राणा भी गांव जाएंगे।
जुटा प्रशासनिक अमला, हेलीपैड भी बना
पास के गांव अंबेहटा चांद के जनता इंटर कालेज के ग्राउंड में हेलीपैड बनाया गया है। बताया गया है कि जम्मू कश्मीर में मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर सका है, जिससे शव को यहां लाया जाएगा। हालांकि सरसावा एयरफोर्स स्टेशन पर पार्थिव शरीर लाए जाने की सूचना है। मगर, प्रशासनिक अमला गांव में भी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा है।
गांव में पहुंचे अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि
शहीद के गांव भगवानपुर में देवबंद विधायक कुंवर ब्रजेश परिजनों को सांत्वना देने के लिए गांव में पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम रामपुर राकेश गुप्ता, नायब तहसीलदार चंद्रकांता व सीओ सिद्धार्थ थानाध्यक्ष मुनेंद्र सिंह शहीद भी गांव में पहुंच गए।
शाम छह बजे सरसावा पहुंचेगा शहीद का शव
सहारनपुर। जिलाधिकारी पीके पांडेय ने बताया कि शहीद जयद्रथ का शव सरसावा एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचेगा। उसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ गांव में ले जाया जाएगा।