नगीना लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष में अंतर्कलह से निपटना भाजपा के लिए बनेगा बड़ी चुनौती
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पश्चिमी यूपी की नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय संघर्ष है। 2014 में मुस्लिम मतों के बिखराव और मोदी लहर के चलते भाजपा ने यह सीट जीती थी। इस बार आपसी अंतर्कलह ही भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है।
नाराज भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं को मनाने में भाजपा प्रत्याशी डाक्टर यशवंत सिंह जुटे हैं। यहां उनका मुकाबला बसपा प्रत्याशी गिरीशचंद व कांग्रेस प्रत्याशी ओमवती से है। ओमवती कुछ समय पहले ही भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई है। बसपा प्रत्याशी गिरीश चंद भी दूसरी बार चुनाव मैदान में है। वे पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे।
इस बार सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन होने के कारण भी उनके समीकरण मजबूत हुए हैं। ओमवती पूर्व में चार बार विधायक, बसपा सरकार में मंत्री व बिजनौर से सांसद रही है और उनकी क्षेत्र में पकड़ है।
नगीना सीट पर अनुसूचित जाति के तीन लाख से ज्यादा, व मुस्लिम छह लाख से ज्यादा हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा स्वर्ण जाति के वोटर हैं। बदले समीकरणों में अति पिछड़ों का रुख काफी अहम हो गया है।
भाजपा
| भाजपा | बसपा | कांग्रेस |
| ताकत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एयर स्ट्राइक व हिंदुत्व के मुद्दे भाजपा की ताकत हैं। | ताकत: सपा व बसपा का वोट बैंक है। गठबंधन रालोद के परंपरागत वोट मिलने की उम्मीद। | ताकत: प्रियंका गांधी के प्रचार में उतरने से कार्यकर्ताओं में उत्साह है और क्षेत्र के लोगों के बीच पकड़। |
| कमजोरी: भाजपा प्रत्याशी का आरएसएस व भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच विरोध है। | कमजोरी: गिरीशचंद की जनता में ज्यादा पकड़ नहीं है। अनुसूचित समाज के वोटर भी नाराज हैं। | कमजोरी: बार-बार दल बदल से धूमिल हुई छवि, पार्टी का कमजोर संगठन, सवर्णें के बीच कमजोर पकड़ |
साल 2014 में इस तरह मिले थे वोट: डा.यशवंत सिंह (भाजपा): 367825, यशवीर सिंह (सपा): 275435, गिरीशचंद (बसपा): 245685। बसपा व सपा को मिलाकर 521120 वोट मिले थे।