विकास की धार, सर्जिकल स्ट्राइक हथियार, प्रधानमंत्री मोदी ने रैली में स्पष्ट किया नया फॉर्मूला
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चुनावी रण में उतरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना फॉर्मूला पश्चिमी यूपी की पहली रैली में साफ कर दिया। इस चुनाव में वह विकास के नाम पर तो वोट मांगेंगे ही, साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक उनका मुख्य हथियार होगा। पार्टी ने दंगों का जिक्र कर स्पष्ट कर दिया कि पार्टी हिंदुत्व के ट्रैक से हटने वाली नहीं है। अहम यही कि मोदी ने तो अन्य सभी बिंदुओं को टच किया, पर टीम का फोकस मुख्य रूप से हिंदुत्व ही रहा।
यूं तो यह रैली मुख्य रूप से मेरठ और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के लिए की गई थी, पर यहां से संदेश पूरे पश्चिमी यूपी को जाना था। मोदी ने पिछले चुनाव में भी मेरठ से ही रैली का आगाज किया था। इसका उन्होंने जिक्र भी किया और कहा कि जैसे मेरठ से शुरू हुई आजादी की पहली क्रांति में राष्ट्रीयता के लिए कमल और रोटी को केन्द्र में रखकर आवाज उठाई थी, ऐसे ही इस चुनाव में भी भाजपा कर रही है। मोदी ने साफ कर दिया कि उनका इस चुनाव में क्या फॉर्मूला रहेगा।
उन्होंने शुरुआत विकास कार्यों से की। बताया कि केंद्र सरकार तो विकास करा ही रही है, प्रदेश में भी विकास हो रहा है। विकास के चक्रव्यूह में ही उन्होंने मायावती, अखिलेश यादव और अजित सिंह को भी यह कहकर फांसने की कोशिश की, उन्होंने कभी विकास के लिए मोदी से संपर्क नहीं किया। विकास से शुरू होकर मोदी सर्जिकल स्ट्राइक पर आ गए। बार-बार यह याद दिलाने की कोशिश की कि उन्होंने कई स्ट्राइक की, जिससे पाकिस्तान बुरी तरह से आहत हुआ। याद दिलाते रहे कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव भी नहीं मानेंगे। कहा कि 26 फरवरी को हमारे देश के वीर सैनिकों ने जो पराक्रम किया, वह पूरे विश्व ने देखा। विपक्षियों पर बोले कि यदि इस ऑपरेशन में कुछ गड़बड हो जाती, तो ये लोग मेरे साथ क्या सुलूक करते? मुझे नोच डालते, गालियां देते, काले झंडे दिखाते, पुतले फूंकते। सारा दोष मोदी का होता पर मैंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था। सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए इमोशनल टच देते हुए मोदी ने धीरे से फिर पासा फेंका। दंगों के बहाने और पलायन की बात कहकर उन्होंने अहम मुद्दों पर टारगेट कर दिया।
हालांकि यह बात दीगर रही कि इस पूरे भाषण में न तो एक बार भी राम मंदिर कर जिक्र आया। न लव जेहाद और न ही गोरक्षा जैसे मुद्दों का। नोटबंदी और जीएसटी जैसे मामलों को तो मोदी न किसी और रैली में छू रहे हैं न इसमें छुआ। हालांकि उनकी टीम चाहे वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या फिर प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडे, सभी ने हिंदुत्व पर फोकस किया। गुंडागर्दी के बहाने, बूचड़खानों को बंद करने की बात कहकर यह साफ किया कि पार्टी अपने पुराने एजेंडे को भी आसानी से छोड़ने वाली नहीं है।
दरअसल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, कैराना या अन्य सीटों पर भाजपा पिछले चुनाव में ध्रुवीकरण कार्ड खेल गई थी। निशाना इस बार भी यही है, पर इस बार पार्टी अपने पांच साल के कार्यों को लेकर भी बात करना चाह रही है। उधर, चूंकि सपा-बसपा का गठबंधन दलित-मुस्लिम वोटों में तगड़ी सेंधमारी कर रही है, तो यह गणित भाजपा के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
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