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मुस्लिम राजनीति की धुरी रही है पश्चिमी यूपी की यह महत्वपूर्ण सीट, सात बार जीते बड़े नेता

Thu, 14 Mar 2019 01:56 PM IST
Dimple Sirohi रणवीर सैनी अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
रणवीर सैनी अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 14 Mar 2019 01:56 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Muzaffarnagar seat is the center to the Muslim politics  in western UP
प्रतीकात्मक तस्वीर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीति को ऊंचाइयां देने का काम मुजफ्फरनगर ने किया। बिना भेदभाव के यहां की जनता ने सात बार मुस्लिम नेताओं के सिर पर जीत का सेहरा बांधा। पश्चिम के अधिकतर बड़े मुस्लिम नेता जिनमें गय्यूर अली खां, मुनव्वर हसन, सईदुज्जमा, कादिर राना यहां से सांसद रहे। यहां की जनता ने कश्मीर के रहने वाले मुफ्ती मोहम्मद सईद तक को सांसद बनाया। 

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रियासत रामपुर को छोड़कर मुजफ्फरनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐसी लोकसभा सीट हैं, जहां से मुस्लिम सबसे ज्यादा सांसद रहे हैं। रामपुर में केवल एक परिवार का ही कब्जा रहा। लेकिन यहां मुस्लिमों के अपने दौर के सभी बड़े नेता चुनाव जीतते रहे। मुस्लिम राजनीति की शुरुआत यहां 1967 में सीपीआई के टिकट पर लताफत अली खां ने सांसद बनकर की। 

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उन्होंने कांग्रेस के ब्रह्म स्वरूप को हराया। 1977 में लोकदल के सईद मुर्तजा ने कांग्रेस के वरुण सिंह को पराजित किया। 1980 में जनता दल (एस) के गय्यूर अली खां ने कांग्रेस के नजर मोहम्मद को हराया। 1989 में कश्मीर से आए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जनता दल के टिकट पर कांग्रेस के आनंद प्रकाश त्यागी को हराया। सईद केंद्र की वीपी सिंह सरकार में गृह मंत्री बने। 

साल 1999 में कांग्रेस के सईदुज्जमां ने भाजपा के सोहनवीर सिंह को हराया। 2004 में सपा के मुनव्वर हसन ने भाजपा के ठाकुर अमरपाल सिंह को हराया। 2009 में बसपा के कादिर राना ने रालोद की अनुराधा चौधरी को हराया। यह सीट मुस्लिम राजनीति के लिए इतनी मुफीद साबित हुई कि 1999 से 2014 तक लगातार 15 साल तक यहां मुस्लिम सांसद रहे।

तीन बार दो जगह जीत
यहां मुस्लिम राजनीति इतनी हावी रही कि तीन बार दोनों लोकसभा सीटों मुजफ्फरनगर और कैराना पर मुस्लिम नेता चुनाव जीते। पहली बार 1967 में मुजफ्फरनगर से लताफत अली खां और कैराना से गय्यूर अली खां चुनाव जीते। दोनों मामा-भांजे थे। 1999 में मुजफ्फरनगर से सईदुज्जमा और कैराना से अमीर आलम खां चुनाव जीते। 2009 में मुजफ्फरनगर से कादिर राना और कैराना से तबस्सुम हसन चुनाव जीतीं।

बड़े घरों से नहीं निकली राजनीति
मुस्लिम राजनीति में यहां खास बात यह रही कि गरीब और सामान्य परिवार का कोई मुसलमान सांसद नहीं बना। रियासती परिवारों और जमींदार घरानों के मुस्लिम ही राजनीति करते रहे। चुनाव जीतने वाले मुस्लिम नेताओं में लताफत अली खां मुथरा गांव के बड़े जमींदारों में शुमार रहे। 

जलालाबाद निवासी गय्यूर अली खां किला परिवार के मुखिया थे। सईदमुर्तजा और सईदुज्जमा पिता-पुत्र हैं, जो पुरकाजी के बड़े जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मुनव्वर हसन कैराना के बड़े जमींदार परिवार से हैं, उनके पिता अख्तर हसन और उनकी पत्नी तबस्सुम हसन भी कैराना से सांसद रहे हैं। कादिर राना भी आर्थिक रूप से संपन्न राणा परिवार के हैं। 

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