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Meerut News: रिश्वतखोरी के मामले में लेखपाल को छह वर्ष की सजा
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नोट-सहारनपुर के लिए ध्यानार्थ
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- दस साल पहले 10 हजार की रिश्वत लेेते हुए पकड़ा गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ अजय कुमार प्रथम ने लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता को रिश्वत लेने के आरोप में दोषी ठहराया है। लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता को छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। वह सहारनपुर के शंकरपुरी का निवासी है।
यह मामला 5 अगस्त 2016 को शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता नकुड़ थाना क्षेत्र के गांव जगोता सहारनपुर निवासी इकलाख ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन पुलिस मेरठ में शिकायत दर्ज कराई थी। इकलाख की जमीन राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई थी। लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता ने उसकी कम जमीन का मुआवजा दिलवाने की रिपोर्ट दी थी। इकलाख अपनी तीन बीघा कृषि भूमि का मुआवजा चाहता था। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट लगाने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।
सरकारी वकील ने इस मामले में आठ गवाह पेश किए। आरोपी के अधिवक्ता ने उसे झूठा फंसाने का दावा किया था। सरकारी वकील ने इस दावे का कड़ा विरोध किया। शनिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लेखपाल को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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- दस साल पहले 10 हजार की रिश्वत लेेते हुए पकड़ा गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ अजय कुमार प्रथम ने लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता को रिश्वत लेने के आरोप में दोषी ठहराया है। लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता को छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। वह सहारनपुर के शंकरपुरी का निवासी है।
यह मामला 5 अगस्त 2016 को शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता नकुड़ थाना क्षेत्र के गांव जगोता सहारनपुर निवासी इकलाख ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन पुलिस मेरठ में शिकायत दर्ज कराई थी। इकलाख की जमीन राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई थी। लेखपाल निर्मल कुमार गुप्ता ने उसकी कम जमीन का मुआवजा दिलवाने की रिपोर्ट दी थी। इकलाख अपनी तीन बीघा कृषि भूमि का मुआवजा चाहता था। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट लगाने के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।
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सरकारी वकील ने इस मामले में आठ गवाह पेश किए। आरोपी के अधिवक्ता ने उसे झूठा फंसाने का दावा किया था। सरकारी वकील ने इस दावे का कड़ा विरोध किया। शनिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लेखपाल को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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