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कुर्सी से हटाना रहा आसान पर पाने में करनी होगी मशक्कत

Thu, 20 Apr 2017 10:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Thu, 20 Apr 2017 10:17 AM IST
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

जिला पंचायत की राजनीति में असली खेल अब शुरू होगा। क्योंकि कुर्सी से हटाना तो शुरू से आसान नजर आ रहा था, लेकिन कुर्सी को पाने में भाजपाई खेमे को भारी मशक्कत करनी होगी। इसका बड़ा कारण आपसी गुटबाजी के बीच विपक्षी सदस्यों का बहुमत भी हासिल करना अहम है। अब जो शह मात का खेल शुरू होने जा रहा है, उसमें भाजपाई खेमे के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। 

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अतुल प्रधान जिला पंचायत अध्यक्ष से अपनी पत्नी को इस्तीफा दिलाने के बाद चुप बैठ जाएंगे, ऐसा मुश्किल नजर आ रहा है। वह अध्यक्ष पद पर सपा से चुनाव लड़ाने की बात भी कह चुके हैं। ऐसे में कहीं न कहीं ऐसे समीकरण जरूर तैयार करने की कवायद अतुल प्रधान खेमे की तरफ से चल रही है, जिसमें कुर्सी जाने के बाद भी वह दूसरे गुट का तगड़ा झटका दे सके। 
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नवाजिश मंजूर को प्रत्याशी बनवा दें 
अतुल प्रधान की सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से करीबी छिपी नहीं है। अतुल प्रधान ने सीमा प्रधान का इस्तीफा भी अखिलेश यादव से वार्ता और पूरे हालात बताने के बाद दिया है। ऐसे में वह अखिलेश यादव के जरिये पूर्व केबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर पर नवाजिश मंजूर को चुनाव मैदान में उतारे जाने का दबाव बनवा सकते हैं। यदि नवाजिश मंजूर मैदान में उतरते हैं तो भाजपा खेमा मुश्किल में फंस सकता है। 
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भाजपा खेमे में लगा सकते हैं सेंध 
दूसरा दांव भाजपा खेमे में ही सेंध लगाने का चला जा सकता है। क्योंकि भाजपा के इस समय दस सदस्य हैं और बाकी गैर भाजपाई है। अतुल प्रधान अपनी और अपने समर्थन की तीन वोटों के साथ किसी गुर्जर बिरादरी के सदस्य को मैदान में उतार सकते हैं। इसमें पांच मुस्लिम सदस्यों की वोट के साथ 10 गुर्जर सदस्यों को जोड़ते हुए आगे की रणनीति साधने की कवायद यदि पूरी हो जाती है तो भाजपा को झटका लग सकता है। 

गैर भाजपाई को प्रत्याशी बनाया तो भाजपा में टूट 
यहां भाजपा अब चक्रव्यूह में फंसी नजर आ रही है। यदि अध्यक्ष पद हासिल करने को भाजपा किसी गैर भाजपाई पर दांव खेलती है तो भाजपा में ही टूट हो सकती है। जिससे वह चुनाव लड़ने से पहले ही बिखर जाएगी। ऐसे में गुटबाजी से पार पाते हुए कुर्सी को हासिल करना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगा। 


विपक्षी सदस्य पहले ही कर चुके हैं आगाह 
सोमवार को हुई बैठक में गैर भाजपाई सदस्य अध्यक्ष पद प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपाइयों को आगाह कर चुके हैं। उनका कहना था कि जिस तरह हम लोग अविश्वास में आपके साथ हैं, उसी तरह जब प्रत्याशी तय हो तब भी हमें विश्वास में साथ लिया जाये। अब यदि भाजपा अपनी मर्जी से प्रत्याशी तय करती है, तो जरूरी नहीं कि जिन लोगों ने अविश्वास के शपथ दिये थे, वह तब भी भाजपा के साथ हों। 

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