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लाखों खर्च, हैंडओवर में अटकी ‘तीसरी आंख’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Jul 2018 01:01 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सीसीटीवी कैमरों पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सिटी व कैंट स्टेशन की सुरक्षा रामभरोसे चल रही है। काम पूरा होने के बाद भी कंट्रोल रूम आरपीएफ के हैंडओवर नहीं किया जा सका है। इसके चलते कैमरों में कैद हो रहीं गतिविधियों की निगरानी नहीं हो पा रही है। आरपीएफ का कहना है कि हैंडओवर की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यहां स्टाफ तैनात किया जाएगा। दूसरी तरफ कंट्रोल रूम छोटा होने के चलते मशीनों के भी गरम होने की जानकारी मिल रही है। सूत्रों का कहना है कि हैंडओवर में कई पेंच फंसे हैं।
रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी बड़े स्टेशनों को तीसरी आंख में कैद करने का फैसला लिया था। इसके तहत सिटी व कैंट स्टेशन पर 15-15 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्टेशन का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा है जहां कैमरों की पहुंच न हो। कैंट स्टेशन के सीसीटीवी कंट्रोल को भी सिटी स्टेशन पर स्थापित कंट्रोल रूम से अटैच किया गया है। यह कंट्रोल रूम आरपीएफ के हवाले रहेगा। यहां तैनात आरपीएफ जवान 24 घंटे कैमरों में कैद हो रही गतिविधियों पर नजर रखेंगे। लेकिन मामला कंट्रोल रूम के हैंडओवर को लेकर अटक गया है। सिस्टम स्थापित करने वाले रेल-टेल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पूरा सिस्टम तैयार कर दिया है। कैमरे चालू कर दिए गए हैं। कंट्रोल रूम हैंडओवर का मामला रेलवे व आरपीएफ अधिकारियों के बीच फंसा हैं।
कैसे पकड़े जाएंगे अपराधी
बड़ा सवाल यह उठता है कि सुरक्षा सिस्टम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर दोनों स्टेशनों पर कोई अपराध हो जाए तो अपराधी को कैसे पकड़ा जाएगा। दोनों स्टेशनों पर जेबतराशी और यूटीएस पर टिकट को लेकर यात्रियों में आपसी मारपीट आम बात हैं। कई बार मामले महिला छेड़छाड़ के भी आते हैं। स्टेशनों पर भिखारियों और खानाबदोश लोगों की भी आवाजाही रहती है, जो पलक झपकते ही यात्रियों के सामान को ठिकाने लगा देते हैं।
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कांवड़ यात्रा भी नजदीक
इसी महीने कांवड़ यात्रा शुरू होनी है। बाहरी राज्यों के भोले कांवड़ लेने ट्रेनों से पहुंचने लगेंगे। अगले माह स्वतंत्रता दिवस भी है। इसके लिए भी रेलवे अपने मुख्य स्टेशनों पर सुरक्षा का अलर्ट जारी करता है। सुरक्षा व्यवस्था में सर्वाधिक मदद करने वाले कैमरे अगर समय से नहीं चलाए गए तो दिक्कत हो सकती है। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि कंट्रोल रूम हैंडओवर होते ही इसकी निगरानी शुरू कर दी जाएगी।
अधिकारियों से बात करेंगे
सिटी व कैंट स्टेशन सीसीटीवी कैमरों के कंट्रोल रूम के हैंडओवर होने का मामला संज्ञान में नहीं है। आरपीएफ और रेल-टेल अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाएगी। - नितिन चौधरी, सीपीआरओ उत्तर रेलवे
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रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी बड़े स्टेशनों को तीसरी आंख में कैद करने का फैसला लिया था। इसके तहत सिटी व कैंट स्टेशन पर 15-15 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्टेशन का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा है जहां कैमरों की पहुंच न हो। कैंट स्टेशन के सीसीटीवी कंट्रोल को भी सिटी स्टेशन पर स्थापित कंट्रोल रूम से अटैच किया गया है। यह कंट्रोल रूम आरपीएफ के हवाले रहेगा। यहां तैनात आरपीएफ जवान 24 घंटे कैमरों में कैद हो रही गतिविधियों पर नजर रखेंगे। लेकिन मामला कंट्रोल रूम के हैंडओवर को लेकर अटक गया है। सिस्टम स्थापित करने वाले रेल-टेल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पूरा सिस्टम तैयार कर दिया है। कैमरे चालू कर दिए गए हैं। कंट्रोल रूम हैंडओवर का मामला रेलवे व आरपीएफ अधिकारियों के बीच फंसा हैं।
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कैसे पकड़े जाएंगे अपराधी
बड़ा सवाल यह उठता है कि सुरक्षा सिस्टम पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर दोनों स्टेशनों पर कोई अपराध हो जाए तो अपराधी को कैसे पकड़ा जाएगा। दोनों स्टेशनों पर जेबतराशी और यूटीएस पर टिकट को लेकर यात्रियों में आपसी मारपीट आम बात हैं। कई बार मामले महिला छेड़छाड़ के भी आते हैं। स्टेशनों पर भिखारियों और खानाबदोश लोगों की भी आवाजाही रहती है, जो पलक झपकते ही यात्रियों के सामान को ठिकाने लगा देते हैं।
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कांवड़ यात्रा भी नजदीक
इसी महीने कांवड़ यात्रा शुरू होनी है। बाहरी राज्यों के भोले कांवड़ लेने ट्रेनों से पहुंचने लगेंगे। अगले माह स्वतंत्रता दिवस भी है। इसके लिए भी रेलवे अपने मुख्य स्टेशनों पर सुरक्षा का अलर्ट जारी करता है। सुरक्षा व्यवस्था में सर्वाधिक मदद करने वाले कैमरे अगर समय से नहीं चलाए गए तो दिक्कत हो सकती है। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि कंट्रोल रूम हैंडओवर होते ही इसकी निगरानी शुरू कर दी जाएगी।
अधिकारियों से बात करेंगे
सिटी व कैंट स्टेशन सीसीटीवी कैमरों के कंट्रोल रूम के हैंडओवर होने का मामला संज्ञान में नहीं है। आरपीएफ और रेल-टेल अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाएगी। - नितिन चौधरी, सीपीआरओ उत्तर रेलवे