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Meerut News: विश्व गुर्दा दिवस कल

Tue, 07 Mar 2023 05:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Mar 2023 05:55 PM IST
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विश्व गुर्दा दिवस कल
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संतुलित दिनचर्या अपनाएं...गुर्दों की बीमारी से खुद को बचाएं

मेरठ। गुर्दों की बीमारी धीरे धीरे मारती है। इससे प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे बचने के लिए एहतियात सबसे ज़रूरी है। अगर संतुलित दिनचर्या अपनाएं तो गुर्दों की बीमारियों से बचा जा सकता है। लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल मार्च के दूसरे बृहस्पतिवार को वर्ल्ड किडनी डे (विश्व गुर्दा दिवस) मनाया जाता है।
गुर्दे हमारे शरीर में उत्पन्न हुए जहर को बाहर निकालकर खून की सफाई का काम करते है, लेकिन अब जैसे जैसे रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर और मधुमेह की बीमारी बढ़ रही है तो उससे गुर्दों के लिए भी परेशानी बढ़ गई है। इन दोनों रोगों का गुर्दों पर सबसे ज्यादा विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। स्वाभाविक है कि जब गुर्दे ठीक से काम नहीं करेंगे तो इससे शरीर में रोगों की संख्या भी बढ़ती जाती है। अगर शरीर में लगातार ऐसी स्थिति बनी रहती है तो एक समय के बाद गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं।
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छन्नी का काम करते हैं गुर्दे
गुर्दे हमारे शरीर में छन्नी (फिल्टर) का काम करते हैं। इससे शरीर में पानी और नमक की मात्रा नियंत्रित रहती है। गुर्दे फिल्टर के अलावा खून की कमी को भी दूर करते हैं और हड्डियों को मजबूत रखते हैं। अगर गुर्दों में दिक्कत होती है तो फिर शरीर के दूसरे अंग भी ठीक तरह से काम नहीं करते।
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गुर्दो में पनपते हैं कई रोग
पथरी के अलावा गदूद बनना, पेशाब में संक्रमण व रुकावट, कैंसर जैसे रोग गुर्दे में पनपते हैं। वैसे तो आज अत्याधुनिक पद्धति से इलाज के चलते गुर्दे के रोगों का इलाज भी काफी हद तक संभव हो रहा है लेकिन सावधानी और जागरूकता से इन रोगों से बचाव भी हो सकता है।

बीमारी के लक्षण
- पेशाब में खून आना
- पेशाब में जलन होना और बार-बार आना
- पैरों व आखों में सूजन आना
- शीघ्र थकान महसूस होना
- ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना
- पेशाब की मात्रा में कमी होना

ऐसे बचा जा सकता है किडनी की बीमारी से
- नियमित व्यायाम करें।
- रोजाना तीन से चार लीटर पानी पिएं
- धूम्रपान, शराब के सेवन और फास्ट फूड से बचें
- खाने में नमक की मात्रा कम रखें
- दर्द की गोलियों का अनावश्यक सेवन न करें
- ब्लड प्रेशर व शुगर की नियमित जाच कराएं
- 35 साल की उम्र के बाद समय-समय पर खून व पेशाब की जांच ज़रूर कराएं।
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देर से मिलता है बीमारी का संकेत
शुरुआती स्टेज में किडनी की बीमारी को पकड़ पाना मुश्किल है। दोनों किडनी के करीब 50 से 60 फीसदी खराब होने के बाद ही खून में क्रिएटनिन बढ़ना शुरू होता है। रक्त में पाए जाने वाले वेस्ट को ही क्रिएटनिन कहते हैं। सामान्यत: किडनी इसे छानकर शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन कई बार शरीर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के बाद किडनी इसे बाहर नहीं कर पाती। इसी कारण रक्त में क्रिएटनिन बढ़ने लगता है।

- डॉ. संदीप गर्ग, गुर्दा रोग विशेषज्ञ

उच्च रक्तचाप और मधुमेह हैं किडनी के दुश्मन
उच्च रक्तचाप और मधुमेह किडनी के दुश्मन हैं। खाने पीने में सावधानी रखकर किडनी को सही रखा जा सकता है। पेस्टीसाइड का ज्यादा इस्तेमाल, फास्ट फूड आदि किडनी की सेहत खराब कर रहे हैं।
- डॉ. प्रशांत बेंद्रे, गुर्दा रोग विशेषज्ञ
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किडनी के सेहत के लिए गोल्डन रूल्स
- सप्ताह में पांच बार 30-30 मिनट की एक्सरसाइज करें
- ब्लड प्रेशर और शुगर को चेक कराते रहें और कंट्र्रोल में रखें
- वजन चेक कराते रहें, बॉडी इंडेक्स मास (बीएमआई) 25 से ज्यादा न होने दें
- धूम्रपान से दूर रहें, पेन किलर का कम से कम प्रयोग करें
- प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक का इस्तेमाल करें
- अंगूर खाएं, ये किडनी से फालतू यूरिक एसिड निकालते हैं
- मैग्नीशियम किडनी को सही से काम करने में मदद करता है, इसलिए गहरे रंग की सब्जियां खाएं।
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