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कांवड़ यात्रा के लिए 'वरदान' ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे, आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

Thu, 05 Jul 2018 07:25 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 05 Jul 2018 07:25 PM IST
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kawad yatra on Eastern Peripheral Expressway, common people will be relieved
फाइल फोटो

दिल्ली पर वाहनों का बोझ कम करने के लिए बनाया गया ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे (कुंडली, गाजियाबाद एवं पलवल) कांवड़ यात्रा में अहम भूमिका अदा करेगा। वहीं हरिद्वार से जल लाने के लिए भी शिवभक्त एक तरफ से इसका बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे। इस बार नये रास्ते खुलने से आम लोगों को राहत मिलेगी। शहर में कांवड़ियों की संख्या में अंतर आएगा तो आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी हो सकेगी।

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शिवरात्रि इस बार नौ अगस्त की है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर उमड़ने वाले कांवड़ियों के सैलाब के चलते दिल्ली-मेरठ-दून हाईवे, दिल्ली-बागपत-शामली-सहारनपुर हाईवे पर रूट डायवर्जन कर दिया जाता है। मेरठ से दिल्ली तक के मार्ग को तो आखिरी के तीन दिन पूरी तरह बंद रहता है। गाजियाबाद दिल्ली से आने वाले वाहनों को हापुड़ होते हुए कमिश्नरी चौराहे से होते हुए मवाना की ओर निकाला जाता है। वहां से मीरापुर होते हुए वाहन मुजफ्फरनगर की ओर जाते हैं। इसी तरह से सहारनपुर से शामली, बागपत और दिल्ली तक जाने वाले वाहनों को वाया करनाल निकाला जाता है।
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ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे का लाभ यह होगा कि मेरठ से बागपत की तरफ जाने, डासना से इस रूट को पकड़कर बागपत की तरफ से कुंडली तक जा सकेंगे। दिल्ली के अलावा हरियाणा के रोहतक, झज्जर, भिवानी और सोनीपत के डाक कांवड़िए कुंडली से एक्सप्रेस-पर चढ़ेंगे। बागपत के मवीकलां या गाजियाबाद के दुहाई से सीधे हरिद्वार के लिए रवाना हो जाएंगे। अन्य मार्गों पर डाक कांवड़ का बोझ कम हो सकेगा। केवल जल लेने जाने के लिए ही इसका इस्तेमाल होगा। लौटते वक्त एक्सप्रेस वे पर जाने की अनुमति नहीं होगी।

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कांवड़ यात्रा के लिए वरदान पेरीफेरल एक्सप्रेस वे

kawad yatra on Eastern Peripheral Expressway, common people will be relieved
फाइल फोटो

- हरिद्वार जाने के लिए हरियाणा व दिल्ली के डाक कांवडिए इस रूट का लेंगे सहारा
- कांवड़ के रूट डायवर्जन के दौरान एक्सप्रेस-वे पर बढ़ेगी वाहनों की संख्या 
- मेरठ की तरफ रहेगा मार्ग बंद तो एक्सप्रेस वे करेगा मदद 

एक्सप्रेस-वे पर इस तरह बढ़ेंगे वाहन 
श्रावणी शिवरात्रि के मद्देनजर तीन दिन तक रूट डायवर्जन रहता है। शामली में वाहनों को वाया करनाल से निकालकर वजीराबाद पुल तक ले जाया जाता है। बागपत में हरियाणा के कांवड़िए बुढ़ाना रोड से बड़ौत होते हुए गौरीपुर मोड़ से सोनीपत के रास्ते जाते हैं। इस कारण गौरीपुर मोड़ और बड़ौत के बीच भारी वाहन रोक दिए जाते हैं। शामली, सहारनपुर, बागपत, सोनीपत से पलवल, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जाने वाले वाहनों को सीधे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर कुंडली से एंट्री दी जाएगी। निर्माणाधीन वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे का अगर कुछ हिस्सा तैयार हो गया तो और अधिक लाभ होगा। 

मेरठ-सोनीपत मार्ग के वाहन भी होंगे डायवर्ट 
कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ-सोनीपत मार्ग के वाहनों को पुरा गांव के परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पर होने वाले मेेले के कारण रोक दिया जाता है। लेकिन इन्हें अब ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से निकाला जा सकेगा। ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और पलवल से वाहनों का आवागमन आसानी से हो सकेगा।

गंगनहर पर कांवड़ियों के लिए बनेंगे यात्री शेड

kawad yatra on Eastern Peripheral Expressway, common people will be relieved
फाइल फोटो

गंगनहर की पटरी (कांवड़ मार्ग) पर कांवड़ियों को सुविधा प्रदान करने के लिए यात्री शेड बनाए जाएंगे। इसके लिए पीडब्लूडी ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। विभाग का प्रयास है कि इसी कांवड़ मेले के दौरान कांवड़ियों को यात्री शेड की सुविधा मिल जाए। भाजपा सरकार आगामी 2019 के लोक सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए हिंदुत्व कार्ड खेलती नजर आ रही है। पश्चिम उप्र का सबसे बड़ा मेला कांवड़ यात्रा है। इस दौरान उप्र सरकार कांवड़ियों को विशेष सुविधाएं देने की तैयारी कर रही है। मुरादनगर से उत्तराखंड सीमा तक 104 किलोमीटर लंबा गंगनहर की पटरी कांवड़ मार्ग है। प्रत्येक पांच किलो मीटर पर एक यात्री शेड बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एक यात्री शेड पर 50 हजार से अधिक खर्च आएगा। पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता एसपी सिंह ने बताया कि सरकार की मंशा है कि कांवड़ यात्रा के समय शिव भक्तों को धूप और बारिश से बचने और आराम करने के लिए यात्री शेड बनाए जाएं। 

कांवड़ियों की राह में प्रशासन के रोड़े      
एतिहासिक कांवड़ यात्रा शुरू होने में महज एक पखवाड़ा शेष है, लेकिन शिवभक्तों की राह इस बार प्रशासनिक उदासीनता के चलते रोड़े व कीचड़ युक्त रहने की आशंका बनी हुई है। शहर का रुड़की रोड हो या सरवट-बझेड़ी मार्ग, अहिल्याबाई चौक हो अथवा मीनाक्षी चौक सब के सब मार्ग व चौराहे कीचड़ व मिट्टी से बदहाल हैं।

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