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रातोंरात लखपति बनने का चस्का, कस्बे और गांवों के लोग सोशल ट्रेडिंग के शिकार

Sat, 04 Feb 2017 12:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 04 Feb 2017 12:17 PM IST
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

37 अरब से ज्यादा के सोशल ट्रेडिंग घोटाले के शिकार मेट्रो सिटी से लेकर छोटे शहरों और कस्बे के लोग हुए हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कस्बों के लोगों ने रातोंरात लखपति बनने के चक्कर में जहां महंगे पैक खरीदे तो दो से तीन हजार तक आईडी लगा डालीं।

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सूत्रों के अनुसार किला परीक्षितगढ़ जैसे कस्बे व उसके आसपास से दो हजार से अधिक आईडी लगाई गईं हैं। जिसमें बढ़ला गांव से ही सौ से अधिक आईडी लगी हैं। वहीं, मवाना से भी करीब तीन हजार से अधिक लोगों ने अपनी आईडी लगाकर लाखों रुपये सोशल ट्रेडिंग में झोंक दिए। जिन्हें अब आगे की चिंता सता रही है, हालांकि कुछ लोगों का लगा हुआ पैसा निकल चुका है। लेकिन बाकी मुश्किलों में हैं।
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मोटी कमाई का चढ़ा चस्का
सोशल ट्रेडिंग में 40 फीसदी से ज्यादा महिलाओं की आईडी लगी हैं। अधिकांश महिलाओं के पति प्राइवेट सेक्टर में हैं। महिलाओं ने पहले एक पैक खरीदा और फिर अपने रिश्तेदारों और सहेलियों को भी जोड़ा। मोटी कमाई का चस्का ऐसा चढ़ा कि पति और पत्नी दोनों सोशल ट्रेडिंग पर फोकस करने लगे। सारी जमा पूंजी लगा दी।
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36 सोशल ट्रेडिंग कंपनियां दूसरे कारोबार में शिफ्ट
मेरठ। छह माह में सोशल ट्रेडिंग से जुड़ीं कंपनियां तेजी से बढ़ी, तो इनमें अधिकांश कंपनियों द्वारा कारोबार शिफ्ट करने की रफ्तार उससे कहीं ज्यादा तेज रही। लाइक के नाम पर महंगे पैक बेचे और फिर करोड़ों रुपये बटोरकर इसे किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, कंज्यूमर गुड्स जैसे दूसरे ऑनलाइन कारोबार में निवेश कर दिया। इन ऑनलाइन प्रोडक्ट को सोशल ट्रेडिंग के जरिये बेचकर 20 से 30 प्रतिशत तक मुनाफा कमाया। घोटाला सामने आने के बाद सेंट्रल एक्साइज और डीजीसीईआई ऐसी कंपनियों की जांच में जुटी हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार बीते तीन माह में नोएडा, गाजियाबाद व दिल्ली के पतों पर 63 से अधिक ऐसी कंपनियां पंजीकृत हुईं। जिनमें से करीब तीन दर्जन कंपनियों ने सोशल ट्रेडिंग से बड़ी तेजी से अपने कारोबार को शिफ्ट किया। उन्होंने पैक से बटोरी धनराशि का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन कारोबार पर खर्च किया।

एक बड़ी कंपनी रडार पर
सूत्रों के अनुसार ऐसी ही एक बड़ी कंपनी सेंट्रल एक्साइज और डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस (डीजीसीईआई) के रडार पर है। बताया जा रहा है कि ऑनलाइन किराना कारोबार करने वाली इस कंपनी का दूसरा कारोबार सोशल ट्रेडिंग (लाइक कराने) का भी है। जिसकी विस्तृत शिकायत डीजीसीईआई मुख्यालय से की गई है। बताया गया कि अनुभव मित्तल ने सोशल ट्रेड डॉट बिज से लेकर अपनी छह ऑनलाइन पोर्टल कंपनियों से कमाई गई रकम शिफ्ट कर प्रोडक्ट की ऑनलाइन बिक्री करने पर लगा दी थी। एक फरवरी से उसने 57500 की जगह पर 60 हजार रुपये का पैक कर दिया था। जिसके बदले पैक खरीदने वाले ग्राहक को उतनी ही कीमत के प्रोडक्ट देने की बात कही गई।

95 फीसदी कंपनियों ने रोका पेमेंट, फरारी का अंदेशा
मेरठ। यूपी एसटीएफ की कार्रवाई के बाद सोशल ट्रेडिंग से जुड़ीं तमाम कंपनियों ने पेमेंट रोक दिया है। कंपनियां अपने ग्राहकों को भरोसा दे रही हैं कि उनका एकाउंट अपडेट होना है, जिसके चलते रोजाना मिलने वाला पैसा रोक दिया गया है। शुक्रवार को करीब 95 फीसदी कंपनियों ने बैंकों के माध्यम से कोई पेमेंट नहीं किया। कंपनियां भरोसा दे रही हैं कि सोमवार से भुगतान शुरू हो जाएगा। लेकिन सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कहीं ज्यादा बड़ा घोटाला हो सकता है। ऐसे में कुछ कंपनियां बोरिया बिस्तर बांधकर फरार भी हो सकती हैं। क्योंकि कंपनियों के बैंक को खातों की जांच चल रही है।

महाठगी का मायाजाल बचाने की कोशिशें
गिरफ्तार आरोपी अनुभव मित्तल को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम ऑडियो-वीडियो जारी हो रहे हैं। किसी में दावा है कि उन्हें आयकर विभाग ने पूछताछ कर छोड़ दिया। लेकिन बैंक ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी। दूसरे मेसेज में दावा है कि 14 दिन बाद बरी होकर निकलेंगे। बाकी लोगों को अगले हफ्ते से पेमेंट देना शुरू कर देंगे।


लाइक लिंक भेजे, नहीं हुआ पेमेंट
अनुभव मित्तल से जुड़े सोशल ट्रेड व अन्य पोर्टल की तरफ से उन लोगों को लाइक के लिए लिंक भेजने का सिलसिला जारी है, जिन्होंने पैकेज खरीद रखा है। लेकिन कंपनी से लाइक करने पर पैसा किसी के खाते में ट्रांसफर नहीं हो रहा है। जानकार बताते हैं कि इतने बड़े घोटाले में अनुभव को जल्द जमानत मिलने की संभावना कम है। जांच एजेंसी अभी बैंक ट्रांजैक्शन की इजाजत नहीं देगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच में अगर टैक्स चोरी पाई जाती है तो एकाउंट ब्लॉक कर दिया जाएगा। ऐसे में जल्द पैसा लौटने की संभावना दिखाई नहीं देती है। भले ही मेसेज में तमाम सारे दावे किये जा रहे हों।

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