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भगवान श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर कारसेवक यात्रा जल्द होगी आरंभ : महंत मच्छेंद्रपुरी
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हरिद्वार से कावंड़ लेकर जाते हुए महंत मच्छेंद्रपुरी का दौराला में हुआ स्वागत
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- कहा- वहां पर बने ढांचे को गिराया जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला (मेरठ)। हरिद्वार से अपने आठ शिष्यों के साथ कांवड़ में गंगा जल लेकर आ रहे गाजियाबाद के हिंडन विहार निवासी बाबा महंत मच्छेंद्रपुरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर कारसेवक यात्रा जल्द आरंभ होगी और वहां पर बने ढांचे को गिराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिसका जन्म होता है वह मरता है यह सत्य है। सिर्फ सनातन धर्म ही बचेगा जो सर्वोपरि है। कांवड़ यात्रा का अस्तित्व खतरे में है। कांवड़ यात्रा को खराब करने के लिए डीजे डाक कांवड़ बाइक सवार कांवड़िया जिम्मेदार हैं। कलश कांवड़ एक कॉम्पिटिशन है, कांवड़ नहीं है।
कलश कांवड़ के कॉम्पिटिशन में देश के भविष्य युवा नौजवान अपने घुटने, कंधे और रीढ़ की बीमारी को न्योता दे रहे हैं। भगवान भोलेनाथ तो एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। कॉम्पिटिशन करना है तो मां-बाप की सेवा का करो, भारी भरकम कलश कांवड़ का नहीं। कांवड़ यात्रा को साधारण ही रहने दें तो अच्छा है। कांवड़ यात्रा में बुर्का पहनकर कांवड़ लाना सस्ती प्रसिद्धि पाने का तरीका है, जो गलत है। सनातन धर्म और भगवान शिव में आस्था है तो तिलक लगाकर भगवा धारण कर कांवड़ लाएं तो उनका स्वागत है।
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पहले कभी कांवड़ यात्रा को इतना सम्मान नहीं मिला जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है तब से कांवड़ियों को सम्मान मिल रहा है और जगह-जगह कांवड़ यात्रा पर पुष्प वर्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि देश को बचाना है तो बाबा योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाना होगा। इस बार कांवड़ सेवा शिविर लगाने के चलते कांवड़ यात्रा में शामिल नहीं हो सके। इसी के चलते मंगलवार को हर की पौड़ी से साइकिल से कांवड़ लेकर गंतव्य की ओर चले। दादरी में रात्रि विश्राम के बाद बृहस्पतिवार को यात्रा आरंभ की और मेरठ में औघड़नाथ शिवालय पर जलाभिषेक कर गाजियाबाद के लिए यात्रा शुरू होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला (मेरठ)। हरिद्वार से अपने आठ शिष्यों के साथ कांवड़ में गंगा जल लेकर आ रहे गाजियाबाद के हिंडन विहार निवासी बाबा महंत मच्छेंद्रपुरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर कारसेवक यात्रा जल्द आरंभ होगी और वहां पर बने ढांचे को गिराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिसका जन्म होता है वह मरता है यह सत्य है। सिर्फ सनातन धर्म ही बचेगा जो सर्वोपरि है। कांवड़ यात्रा का अस्तित्व खतरे में है। कांवड़ यात्रा को खराब करने के लिए डीजे डाक कांवड़ बाइक सवार कांवड़िया जिम्मेदार हैं। कलश कांवड़ एक कॉम्पिटिशन है, कांवड़ नहीं है।
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कलश कांवड़ के कॉम्पिटिशन में देश के भविष्य युवा नौजवान अपने घुटने, कंधे और रीढ़ की बीमारी को न्योता दे रहे हैं। भगवान भोलेनाथ तो एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। कॉम्पिटिशन करना है तो मां-बाप की सेवा का करो, भारी भरकम कलश कांवड़ का नहीं। कांवड़ यात्रा को साधारण ही रहने दें तो अच्छा है। कांवड़ यात्रा में बुर्का पहनकर कांवड़ लाना सस्ती प्रसिद्धि पाने का तरीका है, जो गलत है। सनातन धर्म और भगवान शिव में आस्था है तो तिलक लगाकर भगवा धारण कर कांवड़ लाएं तो उनका स्वागत है।
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पहले कभी कांवड़ यात्रा को इतना सम्मान नहीं मिला जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है तब से कांवड़ियों को सम्मान मिल रहा है और जगह-जगह कांवड़ यात्रा पर पुष्प वर्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि देश को बचाना है तो बाबा योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाना होगा। इस बार कांवड़ सेवा शिविर लगाने के चलते कांवड़ यात्रा में शामिल नहीं हो सके। इसी के चलते मंगलवार को हर की पौड़ी से साइकिल से कांवड़ लेकर गंतव्य की ओर चले। दादरी में रात्रि विश्राम के बाद बृहस्पतिवार को यात्रा आरंभ की और मेरठ में औघड़नाथ शिवालय पर जलाभिषेक कर गाजियाबाद के लिए यात्रा शुरू होगी।